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B Positive : कठिन हालात में समायोजन के साथ नए रास्तों की तलाश भी जरूरी

By विजय बहादुर
Updated Date
B Positive : कठिन हालात में समायोजन के साथ नए रास्तों की तलाश भी जरूरी
B Positive : कठिन हालात में समायोजन के साथ नए रास्तों की तलाश भी जरूरी
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B Positive : जीवन में हर इंसान किसी ना किसी परेशानी से जूझता रहता है. परेशानी शारीरिक, मानसिक या आर्थिक कुछ भी हो सकती है और इंसान इससे उबरने के लिए कुछ हद तक प्रयास भी करता है, लेकिन जीवन में कुछ ऐसे क्षण भी आते हैं, जब परेशानी हमें हमारे अख्तियार से ज्यादा भारी लगने लगती है. ऐसा लगता है कि सबकुछ खत्म हो गया. आगे अंतहीन अंधेरा है और रोशनी की कोई किरण नजर नहीं आ रही है.

इसी तरह का अनुभव पूरी दुनिया ने कोरोना की इस महामारी के दौर में भी किया है. जीवन की रफ्तार मानो थम सी गयी है. लाखों लोगों की नौकरियां चली गयी हैं. काम -धंधा ठप हो गया है. आमदनी में कमी आ गयी है.

ना सिर्फ व्यक्ति, बल्कि कमोबेश संस्थानों की भी यही हालत है, लेकिन इस मानवीय त्रासदी में भी रोज दर्जनों ऐसे उदाहरण देखने-सुनने को मिल रहे हैं, जिसमें लोगों ने बहुत ही अनोखे अंदाज में नई राह बनाई है या यूं कहें जीवन जीने का नया तरीका ढूंढ निकाला और यही हमारे लिए प्रेरणा का कारक भी है.

विपरीत हालात में बेहतर करने वाले लोगों के सोचने या काम करने के तरीके का आकलन करेंगें तो कुछ चीजें कॉमन नजर आती हैं. कठिनतम समय में इंसान अपनी चीजों को समायोजित करने का प्रयास करता है, लेकिन समायोजन का तरीका दो तरह का होता है. एक व्यक्ति समायोजन की प्रक्रिया में अपने को बिल्कुल ही सिकोड़ लेता है. वो इस जुगत में रहता है कि उसके पास आज जो है उसे किसी भी तरीके से बचा कर रखा जाए. वहीं दूसरा व्यक्ति अपने को सिकोड़ता जरूर है, लेकिन उसके साथ थोड़ा जोखिम लेकर कुछ अलग करने का भी प्रयास करता है, ताकि आनेवाले वक्त के लिए नए रास्तों का सृजन हो सके. इसके साथ-साथ इस योजना पर भी काम करता है कि आज जो हालात उसके सामने हैं, चीजें उससे बदतर होती हैं या उसे इस कठिनाई का फिर से सामना करना पड़े तो वो बेहतर तरीके से निपटने के लिए तैयार रहे.

जीवन के कठिनतम हालात हमें ये भी सिखाते हैं कि अग्रसोची बनें. हमेशा अपने साथ प्लान बी रखें और उसे उस समय बनाने और क्रियान्वित करने की जरूरत है जब हालात बेहतर हों. चीजों के बिगड़ जाने के बाद इंसान कुछ नया सोचने या करने के बजाय अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करने लगता है.

और सबसे महत्वपूर्ण है कि सिर्फ सोचने या सोचते रहने के बदले उसके क्रियान्वयन के लिए गंभीरता से प्रयास शुरू कर देना क्योंकि जब हम कोई काम शुरू कर देते है तो रास्ता भी निकल जाता है या उससे निकलने का हुनर भी सीख जाते हैं.

हजार बर्फ गिरे लाख आंधियां उठे, वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं.

- साहिर लुधियानवी

Posted By : Guru Swarup Mishra

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