Mahindra Scorpio Classic घर लाना चाहते हैं? शोरूम जाने से पहले जान लें 3 फायदे और 2 नुकसान
महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक (Pic: Mahindra)
महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक, जो पुराने मॉडल का अपडेटेड रूप है, खरीदने पर विचार कर रहे हैं? इस आर्टिकल में हम स्कॉर्पियो क्लासिक के 3 फायदों और 2 नुकसानों के बारे में बताएंगे. इसके परफॉर्मेंस से लेकर फीचर्स तक के बारे में जानेंगे.
देश की पॉपुलर ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा ने जब साल, 2022 में स्कॉर्पियो एन को स्कॉर्पियो नाम के सेकंड जनरेशन के रूप में सेलिंग के लिए पेश किया था, तो कंपनी ने इसके पुराने मॉडल को बंद नहीं किया. इसके बजाय महिंद्रा ने पिछले जनरेशन के मॉडल को कई फ्रंट्स पर अपडेट किया और स्कॉर्पियो क्लासिक के रूप में रीब्रांड किया, जो स्कॉर्पियो एन का एक एक्स्ट्रा स्ट्रॉंग और ईजी ऑप्शन है. यदि आप इस शानदार एसयूवी को खरीदने का प्लान कर रहे हैं और 'लूं या न लूं' को लेकर कंफ्यूज हैं, तो इस आर्टिकल में हम इसके 3 फायदे और 2 नुकसान बताएंगे.
स्कॉर्पियो क्लासिक खरीदने के 3 फायदे
रिफाइंड इंजन
महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक में हुए अपडेटों में सबसे बड़ा अपडेट इसके इंजन को मिला है. इसमें 2.2 लीटर डीजल इंजन लगाया गया है, जो 130 हॉर्स पावर और 300 nm का टॉर्क जेनरेट करता है. यह केवल 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जुड़ा है. यह इंजन काफी साइलेंट है और केबिन में किसी प्रकार का वाइब्रेशन नहीं होने देता है. बेहतर साउंड इंसुलेशन के लिए गियरबॉक्स सिर्फ ऑपेरेटेड है. क्लासिक चलाने में दमदार महसूस होती है, क्योंकि इसके डीजल इंजन का अधिकांश टॉर्क 1,000 rpm से ही मिलना शुरू हो जाता है.
अमेजिंग सेंस ऑफ स्पेस
स्कॉर्पियो क्लासिक के केबिन में बैठते ही आप इसका शानदार फीचर्स के फैन बन जाएंगे. ओल्ड डैशबोर्ड डिजाइन, जिसका ऊपर का पार्ट फ्लैट है और इसमें ध्यान चेंज करने वाले फीचर्स ज्यादा नहीं मिलते हैं. साथ ही, बेज रंग और बिग ग्लास एरिया बाहर का शानदार व्यू और बड़ा स्पेस जैसा फील देता है. इतना ही नहीं, ड्राइवर की हाइट वाली सीट से यह एक्सपिरियंस और जबरदस्त हो जाता है. इससे सामने सड़क पर ध्यान अच्छे से दे पाते हैं. इसकी सीटें लंबी दूरी के लिए आरामदायक हैं और इनमें अलग-अलग आर्मरेस्ट दिए गए हैं.
ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बेहतर बैलेंस
अपनी रेपुटेशन के अनुरूप, स्कॉर्पियो क्लासिक ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर भी बेहतर बैलेंस बनाए रखती है. गांव हो या पहाड़ों वाली सड़कें, इसके परफॉर्मेंस पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है. इसके मजबूत टायरों और बॉडी-ऑन-फ्रेम चेसिस के चलते यह डैमेज रास्तों पर भी आसानी से चलती है, जिससे यह ग्रामीण एरिया के लिए एक बेहतर ऑप्शन बनती है.
स्कॉर्पियो क्लासिक खरीदने के 2 नुकसान
बाउंसी राइड क्वालिटी
हालांकि, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर महिंद्रा की यह गाड़ी शानदार परफॉर्मेंस देती है, लेकिन दरारों और गड्ढों वाली समतल सड़कों पर यह उतनी ज्यादा आरामदायक नहीं है. इसमें बैठने वाले पैसेंजर्स वर्टिकली और होरिजोंटली दोनों दिशाओं में उछलते हैं और टर्न लेते समय अपनी हाइट और नैरो व्हील ट्रैक के कारण स्कॉर्पियो क्लासिक में काफी बॉडी रोल देखने को मिलता है.
एर्गोनोमिक की कमियां
स्कॉर्पियो क्लासिक में भरपूर जगह होने के बावजूद इसके केबिन में कुछ कमियां हैं. आगे के दरवाजों में बोतल रखने की जगह नहीं है, सीट की ऊंचाई एडजस्ट करने के लिए बनाई गई जगह बेहद नैरो है और पीछे की सीट का कुशन छोटे कद के यात्रियों के लिए लंबा है. स्कॉर्पियो क्लासिक में एप्पल कारप्ले एंड एंड्रॉयड ऑटो कनेक्टिविटी और पीछे की तरफ यूएसबी पोर्ट जैसे फीचर्स नहीं मिलते हैं.
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By शिवांश शेखर
शॉर्ट बायो
शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्शन में कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, खासियत, टिप्स, कंपेरिजन और सपेक्स से संबंधित खबरें कवर करते हैं.
विस्तृत बायो
शिवांश शेखर ऑटोमोबाइल और खेल स्पेशलिस्ट पत्रकार हैं, जो पिछले 3 वर्षों से डिजिटल मीडिया में ऑटो और खेल जगत से जुड़ी खबरों के बारे में लगातार लिखते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. ऑटो सेक्शन में उनकी रूचि कार/बाइक लॉन्च, फीचर्स, स्पेसिफिकेशन, टिप्स, ट्रिक्स और कंपेरिजन से जुड़े विषयों में है. इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्रीज के बदलते ट्रेंड्स पर लगातार लिखते हैं.
उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को सिर्फ लॉन्च, कीमत और फीचर्स के बारे में ही न बताया जाए, बल्कि यह भी जानकारी दी जाए कि वह तकनीक आम लोगों के लिए कितने काम का है, उसे इस्तेमाल करने का अनुभव कैसा रहेगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई
बिहार राज्य के जहानाबाद जिले में जन्में शिवांश शेखर की शुरुआती शिक्षा (BSEB) से पूरी हुई. इसके बाद उन्होंने साल 2023 में चौधरी चरण सिंह यूनीवर्सिटी, मेरठ (CCSU) के अंतर्गत आने वाली इंसटीच्युट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, नोएडा (IMS) से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. पढ़ाई के दौरान ही शिवांश की रुचि खेल और ऑटो के विषयों पर लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने खेल और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
काम का सफर
पत्रकारिता का ककहरा सीखने के बाद शिवांश का सफर एपीएन न्यूज से शुरू हुआ था. उन्होंने पत्रकारिता का समूह जागरण न्यू मीडिया में बतौर सब एडिटर खेल और अन्य खबरों की तकनीकी समझ विकसित की. जेएनएम में करीब डेढ़ साल खेल और अन्य विषयों पर काम करने के बाद उन्होंने एसियानेट न्यूज की तरफ रुख अपनाया. वहां, करीब डेढ़ साल तक ऑटोमोबाइल और स्पोर्ट्स सेक्शन में काम किया और फिर प्रभात खबर का रुख किया, जहां ऑटो बीट पर काम कर रहे हैं. ट्रेंड्स को लगातार फॉलो करते हैं.
विजन
शिवांश का मानना है कि ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नई गाड़ियों के बारे में जानकारी नहीं देती, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारों के फैसलों और डिजिटल एक्सपिरियंस पर भी असर डालती हैं.
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