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Automobile Industry: भारत में सालभर में बनीं 2.7 करोड़ गाड़ियां, जानें किस सेगमेंट की डिमांड सबसे ज्यादा

Updated at : 28 Jun 2023 5:33 PM (IST)
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Automobile Industry: भारत में सालभर में बनीं 2.7 करोड़ गाड़ियां, जानें किस सेगमेंट की डिमांड सबसे ज्यादा

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में देश में कुल दो करोड़ दोपहिया वाहनों का उत्पादन हुआ जो कुल वाहनों का करीब 77 प्रतिशत है. वहीं मूल्य के हिसाब से 1.8 लाख करोड़ रुपये वाले दोपहिया खंड की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही है.

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Vehicles In India : भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग लगातार बढ़ रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 के दौरान भी देश में करोड़ों वाहनों का निर्माण किया गया. हम आपको बता रहे हैं कि वित्त वर्ष 2023 के दौरान देश में कितने वाहनों का निर्माण हुआ और किस सेगमेंट के वाहनों की मांग सबसे ज्यादा रही. घरेलू वाहन उद्योग ने वित्त वर्ष 2022-23 में विभिन्न वाहन खंडों एवं किस्मों के तहत 108 अरब डॉलर (करीब 8.7 लाख करोड़ रुपये) मूल्य के कुल 2.7 करोड़ वाहनों का उत्पादन किया. इसमें मूल्य के हिसाब से यात्री वाहनों की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत रही. प्रबंधन सलाहकार फर्म प्राइमस पार्टनर्स ने एक रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए कहा कि पिछले वित्त वर्ष में कुल वाहनों में वाणिज्यिक वाहन खंड की हिस्सेदारी 10 लाख वाहनों की रही जिनका मूल्य करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये रहा.

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में देश में कुल दो करोड़ दोपहिया वाहनों का उत्पादन हुआ जो कुल वाहनों का करीब 77 प्रतिशत है. वहीं मूल्य के हिसाब से 1.8 लाख करोड़ रुपये वाले दोपहिया खंड की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत रही है. इस अवधि में देश के वाहन उद्योग में करीब 1.9 करोड़ लोगों को रोजगार मिला था. रिपोर्ट कहती है कि यात्री वाहन खंड में मध्यम आकार और पूर्ण आकार वाले एसयूवी उप-खंडों की हिस्सेदारी मूल्य के लिहाज से आधे से भी अधिक रही. कॉम्पैक्ट एसयूवी उप-खंड ने भी कुल वाहनों के मूल्य में 25 प्रतिशत योगदान दिया. वहीं लक्जरी खंड के वाहनों ने मूल्य में 63,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजार में अब सस्ती ‘मिनी’ कारों और सेडान कारों को अधिक पसंद नहीं किया जा रहा है जिसकी वजह से इनकी हिस्सेदारी घटी है. जहां तक बैटरी-चालित वाहनों का सवाल है तो इसका बड़ा हिस्सा दोपहिया और तिपहिया खंड में ही देखने को मिला है. रिपोर्ट कहती है कि भारतीय ईवी उद्योग चीन, अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे अग्रणी बाजारों से पीछे चल रहा है लेकिन इस खंड में भारी निवेश होने से भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत नजर आते हैं. (इनपुट भाषा से साभार)

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