₹19 लाख की नयी EV 4 दिन में पड़ गई बंद, उपभोक्ता आयोग ने ग्राहक को दिलाया पूरा रिफंड

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एमजी विंडसर ईवी / फोटो एमजी मोटर्स की वेबसाइट से

नई MG Windsor EV खरीदने के कुछ ही दिनों बाद वाहन में आई गंभीर समस्या ने ग्राहक को उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा दिया. सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी और डीलर को रिफंड और मुआवजा देने का आदेश दिया.

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इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच चंडीगढ़ से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने वाहन कंपनियों और ग्राहकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. करीब 19 लाख रुपये की नई इलेक्ट्रिक SUV खरीदने वाले एक ग्राहक को तब बड़ा झटका लगा जब डिलीवरी के महज चार दिन बाद ही वाहन रास्ते में अचानक बंद हो गया. मामला इतना बढ़ गया कि आखिरकार उपभोक्ता आयोग को दखल देना पड़ा और अब ग्राहक के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया गया है.

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4 दिन बाद ही रास्ते में बंद हो गई नई EV

बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, मामला MG Windsor EV से जुड़ा है. शिकायतकर्ता पुखराज सिंह बल ने जुलाई 2025 में MG Windsor EV Essence Pro खरीदी थी. वाहन की कुल कीमत एक्सेसरीज समेत लगभग 19 लाख रुपये से अधिक बताई गई. शिकायत के अनुसार, डिलीवरी के केवल चार दिन बाद परिवार के साथ यात्रा के दौरान कार अचानक सड़क पर रुक गई. इससे पीछे से आ रहे वाहन की टक्कर भी हुई, जिसने सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

घटना के बाद इलेक्ट्रिक वाहन को टो करके अधिकृत सर्विस सेंटर ले जाया गया. ग्राहक का आरोप था कि कई बार संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया और बाद में वाहन में अतिरिक्त नुकसान भी देखने को मिला.

कंपनी ने क्या दी सफाई?

मामले की सुनवाई के दौरान डीलर और वाहन निर्माता कंपनी ने किसी भी मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट से इनकार किया. उनका कहना था कि वाहन का एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) सामान्य रूप से काम कर रहा था और सड़क की परिस्थितियों के कारण ऑटोमैटिक ब्रेकिंग एक्टिव हुई थी.

कंपनी ने यह भी दलील दी कि वाहन ने डिलीवरी के चार दिनों के भीतर लगभग 485 किलोमीटर की दूरी तय की थी, जिससे यह साबित होता है कि उसका सामान्य उपयोग किया जा रहा था.

आयोग ने क्यों खारिज की दलील?

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कंपनी और डीलर की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना. आयोग ने कहा कि वाहन के अचानक रुकने की वजह साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं किया गया. सुनवाई के दौरान इवेंट डेटा रिकॉर्डर लॉग, डायग्नोस्टिक रिपोर्ट, सॉफ्टवेयर विश्लेषण या किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ की राय जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई.

आयोग ने डीलर की ओर से प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट को भी एकतरफा दस्तावेज माना क्योंकि इसमें ग्राहक की भागीदारी नहीं थी.

सर्विस सेंटर में वाहन को नुकसान पहुंचने पर भी उठे सवाल

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वाहन सर्विस सेंटर में खड़ा होने के दौरान किसी तीसरे पक्ष की वजह से क्षतिग्रस्त हुआ था. आयोग ने इसे सेवा में कमी और लापरवाही का मामला माना.

आयोग का कहना था कि जब कोई ग्राहक नई कार खरीदने के लिए 19 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करता है, तो उसे विश्वसनीय और परेशानी-मुक्त उत्पाद मिलने की उम्मीद करना स्वाभाविक है.

ग्राहक को मिला पूरा पैसा वापस

मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने वाहन निर्माता और अधिकृत डीलर को ग्राहक को राशि लौटाने का आदेश दिया. फैसले के तहत वाहन की कीमत के रूप में 18.49 लाख रुपये वापस करने, एक्सेसरीज पर खर्च हुए 57,690 रुपये की भरपाई करने और 50,000 रुपये मुआवजा एवं मुकदमे के खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया गया.

यह फैसला वाहन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है कि यदि किसी नए वाहन में गंभीर गुणवत्ता संबंधी समस्या सामने आती है या ग्राहक को उचित सेवा नहीं मिलती, तो कंपनियों और डीलरों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है.

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