दिल्ली में हाइब्रिड कारों को मिल सकती है बड़ी राहत, नई EV पॉलिसी पर तेज हुई बहस
दिल्ली में सस्ती हो सकती हैं हाइब्रिड कारें // सिम्बॉलिक एआई इमेज
दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी में मजबूत हाइब्रिड कारों को रोड टैक्स राहत देने का प्रस्ताव चर्चा में है. इससे कारों की कीमत कम हो सकती है, जबकि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए तैयार की जा रही नई EV पॉलिसी 2026-30 अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. राजधानी में जल्द लागू होने वाली इस नीति के तहत मजबूत हाइब्रिड (Strong Hybrid) कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में राहत देने का प्रस्ताव चर्चा का केंद्र बन गया है. सरकार का मानना है कि यह कदम लोगों को पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों से स्वच्छ तकनीक की ओर ले जाने में मदद करेगा, जबकि कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि फोकस पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर होना चाहिए. ऐसे में नई नीति को लेकर ऑटो इंडस्ट्री, नीति विशेषज्ञों और पर्यावरण समूहों के बीच बहस तेज हो गई है.
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
ड्राफ्ट EV पॉलिसी के अनुसार 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली मजबूत हाइब्रिड कारों को रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50 प्रतिशत तक की छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है. दिल्ली परिवहन विभाग को इस मसौदे पर सैकड़ों सुझाव प्राप्त हुए हैं और अंतिम फैसला कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया जाएगा.
सरकार का मानना है कि जब तक राजधानी में EV चार्जिंग नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं हो जाता, तब तक मजबूत हाइब्रिड वाहन एक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकते हैं. ये वाहन कम गति पर केवल इलेक्ट्रिक मोटर से चल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इंजन अपने आप सक्रिय हो जाता है.
स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड और EV में क्या अंतर है?
कई लोग हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को एक जैसा मानते हैं, जबकि दोनों तकनीकों में बड़ा अंतर है. इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह बैटरी से चलते हैं, जबकि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन के साथ बड़ी बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर भी होती है. शहरों में चलने के दौरान ये वाहन लंबे समय तक इलेक्ट्रिक मोड में काम कर सकते हैं, जिससे ईंधन की खपत और उत्सर्जन दोनों कम होते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारें पारंपरिक वाहनों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक घटा सकती हैं और चार्जिंग स्टेशन की चिंता भी नहीं रहती.
उत्तर प्रदेश मॉडल से क्या मिला सबक?
हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन देने के पक्ष में सबसे बड़ा तर्क उत्तर प्रदेश का उदाहरण माना जा रहा है. वहां टैक्स छूट मिलने के बाद स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों की बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. साथ ही वाहन पंजीकरण से मिलने वाले राजस्व में भी इजाफा हुआ.
ऑटो उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि दिल्ली में भी ऐसी नीति लागू होने पर उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे और स्वच्छ मोबिलिटी को गति मिल सकती है.
विरोध करने वाले क्या कह रहे हैं?
नई नीति के आलोचकों का कहना है कि सरकार को हाइब्रिड कारों के बजाय पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना चाहिए. उनका तर्क है कि टैक्स छूट पर खर्च होने वाले संसाधनों का उपयोग सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क और EV इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में किया जाना चाहिए.
हालांकि दूसरी तरफ कई शोध संस्थानों और मोबिलिटी विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बाजार में हाइब्रिड तकनीक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिशन स्टेज साबित हो सकती है.
उपभोक्ताओं के लिए क्या होगा फायदा?
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो मजबूत हाइब्रिड कारों की ऑन-रोड कीमत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. इससे ऐसे खरीदारों को फायदा होगा जो कम ईंधन खर्च और कम प्रदूषण चाहते हैं, लेकिन अभी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.
नई EV पॉलिसी पर अंतिम फैसला आने वाले दिनों में हो सकता है. अगर मजबूत हाइब्रिड कारों को टैक्स राहत मिलती है, तो दिल्ली देश के उन प्रमुख राज्यों में शामिल हो जाएगी जहां स्वच्छ मोबिलिटी के लिए बहु-स्तरीय रणनीति अपनाई जा रही है.
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By Rajeev Kumar
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