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औरंगाबाद के नक्सल प्रभावित बादम में करोड़ों की अफीम की फसल नष्ट, दो साल से इस इलाके में हो रही थी खेती

Updated at : 06 Feb 2023 6:58 PM (IST)
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औरंगाबाद के नक्सल प्रभावित बादम में करोड़ों की अफीम की फसल नष्ट, दो साल से इस इलाके में हो रही थी खेती

औरंगाबाद के नक्सल प्रभावित बादम में करोड़ों की अफीम की फसल को पुलिस ने नष्ट कर दी. पुलिस को सूचना मिली थी कि मदनपुर थाना क्षेत्र के जंगली इलाके में अफीम की खेती की गई है. जब पुलिस ने जांच की तो यह बात सत्य निकली. इसके बाद सोमवार को यह कार्रवाई पुलिस ने की.

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औरंगाबाद. बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के नक्सल प्रभावित दक्षिणी इलाके में स्थित बादम गांव में लगभग तीन एकड़ में लगी अफीम फसल को पुलिस ने सोमवार को नष्ट कर दी. नष्ट की गई अफीम की कीमत दो करोड़ रुपए के करीब आंकी गई है. इस दौरान पुलिस ने हरा अफीम भी बरामद किया है. पुलिस को सूचना मिली थी कि मदनपुर थाना क्षेत्र के जंगली इलाके में अफीम की खेती की गई है. जब पुलिस ने जांच की तो यह बात सत्य निकली. इसके बाद मदनपुर थानाध्यक्ष शशि कुमार राणा के नेतृत्व में पुलिस की टीम पहुंची और खेतों में लगे अफीम की फसल को नष्ट कर दिया.

पता चला कि थानाध्यक्ष शशि कुमार राणा, मदनपुर सीओ अंजू सिंह, राजस्व अधिकारी उदय प्रताप सिंह के नेतृत्व में अभियान चलाकर बादम गांव में तीन एकड़ में लगी अफीम के फसल को नष्ट किया गया है. थानाध्यक्ष ने बताया कि मक्का व अरहर की फसल के बीच यह फसल लगायी गयी थी, जिसके कारण पता नहीं चल पा रहा था कि यहां अफीम की फसल लगायी गयी है. हालांकि जैसे ही गुप्त सूचना मिली वैसे ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पूरी फसल को नष्ट कर दी है. उन्होंने बताया कि मादक पदार्थ अफीम की खेती करने वाले को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में किसी की मौके से गिरफ्तारी नहीं की गई है

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दो वर्षों से इस इलाके में हो रही थी अफीम की खेती

ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने के नाम पर बताया कि इस इलाके में पिछले दो वर्षों से अफीम की खेती हो रही है. वैसे बादम, पिछुलिया, पिपरगढ़ी सहित अन्य क्षेत्रों में अफीम की खेती की जा रही है. पुलिस के इस कार्रवाई से इस इलाके के लोगों में दहशत का माहौल कायम है. हालांकि कुछ ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने पर बताया कि हम लोगों को मालूम नहीं था कि यह अफीम की खेती है. उन्हें बताया गया कि पोस्ता दाना की खेती की जा रही है. ग्रामीण सूत्रों ने बताया कि करीब पांच एकड़ खेती यहां की गई थी. अगर फसल को नष्ट नहीं किया जाता तो करोड़ों रुपया का लाभ इस इलाके के खेती करने वालों को होता.

अफीम की खेती में माफिया लगाते हैं पैसा

बताया जा रहा है कि माफियाओं द्वारा अफीम की खेती कराई जाती है. नशीले पदार्थ अफीम की खेती से अधिक लाभ कमाने का लालच देकर नक्सल क्षेत्र के ग्रामीणों से कराया जाता है. जंगली क्षेत्र की जमीन मालिकों को प्रलोभन दिया जाता है कि इसकी खेती करने से जल्द आप लोग अमीर हो जाएंगे. कई किसानों को सही जानकारी नहीं होने के कारण माफिया आगे बढ़कर जमीन मालिकों को सभी जरूरी संसाधन मुहैया करा देते हैं. इधर सीओ अंजू सिंह ने बताया कि जल्द लोगों को चिन्हित कर प्राथमिकी दर्ज करायी जायेगी.

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