यादों में महाराज: नरेंद्र गिरि का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे अमित शाह और योगी, हर समस्या का होता था समाधान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Oct 2021 1:56 PM
सियासत की बात करें तो इससे जुड़े राजनेताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी महंत की कमी जरूर खल रही होगी. इसकी वजह यह है कि सरकार किसी की भी हो महंत नरेंद्र गिरि का आशीर्वाद सभी पर रहता था. छोटे-बड़े सारे नेताओं की समस्या महंत नरेंद्र गिरि सुलझा देते थे.
प्रयागराज: महंत नरेंद्र गिरि को ब्रह्मलीन हुए दो सप्ताह से ज्यादा गुजर गए हैं. महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी भंडारे के साथ ही गद्दी के नए महंत बलबीर गिरि महाराज ने बाघंबीर मठ की तमाम जिम्मेदारियां संभाल ली है. मठ से जुड़े लोगों की मानें तो महंत नरेंद्र गिरि की कमी सभी महंतों और साधु-संन्यासियो को हमेशा खालेगी. सियासत की बात करें तो इससे जुड़े राजनेताओं के साथ प्रशासनिक अधिकारियों को भी महंत की कमी जरूर खल रही होगी. इसकी वजह यह है कि सरकार किसी की भी हो महंत नरेंद्र गिरि का आशीर्वाद सभी पर रहता था. छोटे-बड़े सारे नेताओं की समस्या महंत नरेंद्र गिरि सुलझा देते थे.
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दो दशक से सरकार किसी की भी हो महंत नरेंद्र गिरि का सभी सरकारों में एक जैसा सम्मान था. इसकी एक वजह उनका अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष होना माना जा सकता है. ब्रह्मलीन महंत नरेंद्र गिरि की अपनी कई व्यक्तिगत विशेषताएं भी थीं. जिससे लोग उनसे मिलकर अपनी समस्या का समाधान निकाल लेते थे.
महंत नरेंद्र गिरि ने कभी भी राजनीति में आने की इच्छा जाहिर नहीं की. लेकिन, राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय जरूर रखते थे. हिंदुत्व और सनातन का मुद्दा हो या कुछ और, वो हमेशा खुद को आगे रखते थे. महंत नरेंद्र गिरि ने कभी भी राजनीति में आने का पक्ष नहीं रखा. इसके उलट उनके मठ में राजनेताओं का उतना ही सम्मान होता था. हर राजनीतिक पार्टी के नेता का बाघंबरी मठ में एक जैसा सम्मान किया जाता था.
एक समय था, जब महंत नरेंद्र गिरि से मिलने मुरली मनोहर जोशी, संघ के कद्दावर नेता, भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, पूर्व सीएम अखिलेश यादव, शिवपाल यादव सरीखे प्रभावी नेता पहुंचते थे. जब भी कोई राजनेता संगम स्नान के लिए आता तो महंत नरेंद्र गिरि महाराज का आशीर्वाद जाकर लेना नहीं भूलता था.
दूसरी ओर महंत के षोडशी भंडारे में सरकार और विपक्ष का कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आया. जिसकी वहां चर्चा होती रही. लोगों का मानना था की लखनऊ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के चलते और लखीमपुर की घटना को लेकर सरकार और विपक्ष के बड़े नेता मठ नहीं पहुंच सके. वजह जो भी हो महंत नरेंद्र गिरि महाराज के सियासी रिश्ते, रसूख के चर्चे और कमी कई राजनेताओं को आगामी चुनाव में खल सकती है.
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बाघंबरी मठ के नए महंत के रूप में महंत नरेंद्र गिरि महाराज के उत्तराधिकारी बलबीर गिरि ने कामकाज संभाल लिया है. महंत बलबीर गिरि ही बाघंबरी मठ के कर्ता-धर्ता होंगे. बड़े हनुमान मंदिर समेत बाघंबरी मठ के सभी फैसले बतौर मठ के महंत वो ले सकेंगे. बलबीर गिरि ने चादर विधि और मठ के महंत बनने के बाद कहा है कि वो अपने गुरु के दिखाए मार्ग का ही अनुसरण करेंगे. मठ जैसे चल रहा था, वैसे चलेगा. विद्यार्थियों की शिक्षा, गऊ सेवा और बाघंबरी मठ में आने वाले तमाम लोगों का सम्मान वैसे ही होगा.
(रिपोर्ट: एसके इलाहाबादी, प्रयागराज)
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