यूपी निकाय चुनावः अलीगढ़ में मेयर चुनाव के बाद अटकलों का बाजार गर्म, भाजपा, सपा , बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 May 2023 1:59 PM
यूपी नगर निकाय चुनावः अलीगढ़ नगर निगम चुनाव में 45.25 फीसदी वोट पड़े जो पिछले चुनाव के वोट प्रतिशत से कम है. वहीं वोटिंग परसेंटेज कम होने से प्रत्याशियों के माथे पर शिकन है. हालांकि कुछ इलाकों में कमल की रफ्तार दिखी तो वहीं साइकिल और हाथी भी की चाल मस्त रही.
यूपी नगर निकाय चुनावः अलीगढ़ नगर निगम चुनाव में 45.25 फीसदी वोट पड़े जो पिछले चुनाव के वोट प्रतिशत से कम है. वहीं वोटिंग परसेंटेज कम होने से प्रत्याशियों के माथे पर शिकन है. हालांकि कुछ इलाकों में कमल की रफ्तार दिखी तो वहीं साइकिल और हाथी भी की चाल मस्त रही. प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो चुका है, अब प्रत्याशी और मतदाता आंकड़ों पर अटकलें लगा रहे हैं. लेकिन अंदर खाने प्रत्याशी परेशान है.
वोटिंग के दौरान देखने को मिला कि ध्रुवीकरण तो हुआ है. लेकिन किन दो लोगों के बीच मुकाबला है. यह कहना कठिन है. पिछले मेयर चुनाव मे बसपा और भाजपा के बीच मुकाबला था. जिसमें बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी थी. इस बार भाजपा, सपा और बसपा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला होता हुआ दिख रहा है. हालांकि मतदान प्रतिशत 2017 के चुनाव के मुकाबले कम है. जिसको लेकर के तीनों दलों के प्रत्याशी के माथे पर शिकन है. हालांकि प्रत्याशी बूथों पर पड़े मतदान को लेकर समीक्षा में जुट गए हैं.
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इस बार भी 2017 चुनाव की पुनरावृत्ति होती हुई दिख रही है. शहर विधानसभा और कोल विधानसभा पर भाजपा विधायक जीते तो मेयर चुनाव में बहुजन समाज पार्टी की जीत हुई. वहीं मेयर के चुनाव में मुस्लिम और दलित गठजोड़ देखने को मिला था. 2012 में जब अलीगढ़ शहर और कोल विधानसभा में दोनों जगह मुस्लिम विधायक थे. तब भाजपा के प्रत्याशी की जीत हुई थी.
अलीगढ़ में करीब नौ लाख से ज्यादा मतदाता है. जिसमें करीब तीन लाख से अधिक मुस्लिम वोटर है. इस बार भी 2017 की तरह सपा और बसपा ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारा है. 2017 में एक तरफा मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण हुआ था. वहीं इस बार भी सपा – बसपा के बीच ध्रुवीकरण होना तय है. वहीं कांग्रेस ने पिछले मेयर चुनाव में मधुकर शर्मा को उतारा था जो करीब 25000 से ज्यादा वोट मिले थे. इस बार भी कांग्रेस ने ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा है. वहीं आम आदमी पार्टी ने लोधी समाज के राजकुमार लोधी को चुनावी मैदान में उतारा .हालांकि यह किसका गणित बिगाड़ देंगे. इस पर मंथन चल रहा है.
गुरुवार को नगर निगम चुनाव में धीमी गति से मतदान शुरू हुआ. वहीं सपा और बसपा के झंडे के नीचे लोगों की भीड़ दिखी, लेकिन सपा के प्रति मुसलमानों में रुझान ज्यादा दिखा. उसके पीछे यह भी बताया जा रहा है कि आजाद समाज पार्टी के सहारे दलित और परंपरागत ओबीसी वोट में अच्छी सेंधमारी की है. हालांकि दलित, मुस्लिम और ओबीसी वोटों का गठजोड़ सही दिख रहा है. जो सपा को मजबूती प्रदान कर रहा है. हालांकि बसपा के खेमे में दलित के साथ मुस्लिम प्रत्याशी भी खड़े दिखे. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने वोटरों को अपनी और खींचा, तो इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है. हालांकि 13 मई को मतगणना में किसी एक प्रत्याशी की किस्मत खुलेगी, लेकिन भाजपा, सपा, बसपा में त्रिकोणीय संघर्ष दिख रहा है.
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