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UP: अलीगढ़ के ताला कारोबार को मिला GI टैग, हाथरस की हींग भी शामिल, उद्यमियों में खुशी

Updated at : 06 Apr 2023 1:12 PM (IST)
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UP: अलीगढ़ के ताला कारोबार को मिला GI टैग, हाथरस की हींग भी शामिल, उद्यमियों में खुशी

अलीगढ़ का ताला पहले ही ODOP में शामिल है. यह जीआई टैग 31 मार्च को जारी किया गया. अब ताले को जीआई टैग की स्वीकृति मिली है. हालांकि मंडल में शामिल हाथरस से भी गुलाब जल के उत्पाद के बाद अब हींग को जीआई टैग दिया गया है.

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यूपीः अलीगढ़ के ताले को जीआई टैग (GI Tag) जारी किया गया है. केंद्र, राज्य सरकार और नाबार्ड के स्तर से 31 मार्च को प्रदेश के जीआई टैग में शामिल 11 कृषि और औद्योगिक उत्पादों की सूची में इसे शामिल किया गया है. इससे ताला उद्योग को नई ऊंचाइयां मिलेंगी. दरअसल जीआई टैग (बौद्धिक संपदा अधिकार) मिलने के बाद बाजार में नकली उत्पादों को रोकने में मदद मिलेगी. कोई व्यक्ति अलीगढ़ के अलावा अन्य किसी जिले में ताला तैयार कर उसे अलीगढ़ के ताले के नाम से बेचेगा, तो उसे अपराध माना जाएगा.

अलीगढ़ के ताला को जीआई टैग

अलीगढ़ का ताला पहले ही ODOP में शामिल है. यह जीआई टैग 31 मार्च को जारी किया गया. पिछले दिनों एक जनपद एक उत्पाद में शामिल औद्योगिक एवं कृषि को जीआई टैग दिये जाने के लिए आवेदन मांगे गए थे. जिसमें एटा की चिकोरी, अलीगढ़ का ताला व इगलास की चमचम मिठाई का नाम भेजा गया था. कमेटी ने पूर्व में चिकोरी पर मोहर लगाई थी. वहीं चमचम पर निर्णय नहीं हो सका. अब ताले को जीआई टैग की स्वीकृति मिली है. हालांकि मंडल में शामिल हाथरस से भी गुलाब जल के उत्पाद के बाद अब हींग को जीआई टैग दिया गया है.

जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने क्या कहा

अलीगढ़ ताले को जीआई टैग मिलने पर जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने कहा कि इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान में कानूनी रूप से लोकल से ग्लोबल होने में मदद मिलेगी. टैग मिलने से यहां का ताला दुनिया के बाजार में नई धाक जमाएगा. अब ताला उद्योग को नई पहचान मिलेगी. दूसरे शहरों में ताले का निर्माण कर अलीगढ़ के नाम से भेजना अपराध होगा.

अलीगढ़ हार्डवेयर और आर्टवेयर कारोबार का भी केंद्र

अलीगढ़ ताला उद्योग के साथ हार्डवेयर और आर्टवेयर के कारोबार का केंद्र है. शहर में ताला निर्माण कुटीर उद्योग बन गया है. यहां करीब पांच हजार से ज्यादा इकाइयां हैं. 40 हजार करोड़ का सालाना कारोबार होता है. मुगल काल से ही अलीगढ़ में ताले का निर्माण शुरू हुआ था. सन् 1965 में जॉनसन नाम के इंग्लैंड के इंजीनियर ने इसे आधुनिकतम रूप दिया. उन्होंने लोहार के काम को पावर प्रेस से जोड़कर ताला निर्माण शुरू किया था. आज कंप्यूटरीकृत मशीनों से ताला कारोबार गति पकड़ रहा है. हालांकि पहले पीतल के ताले बनते थे, लेकिन अब स्टील के ताले बनाए जा रहे हैं. अलीगढ़ से विदेशों में ताले का एक्सपोर्ट होता है.

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क्या बताया ताला उद्यमी ने

ताला अलीगढ़ की पहचान है और इसी पहचान को जीआई टैग नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा. ताला उद्यमी चंद्र शेखर शर्मा ने बताया कि जीआई टैग से शहर निर्मित ताले को इंटरनेशनल बाजार में एक अलग पहचान मिलेगी. प्रदेश सरकार भी ब्रांडिंग पर जोर दे रही है. टैग मिलने से नकली कारोबार पर रोक लगेगी. ताला निर्माता नीरज ने बताया कि सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है.

रिपोर्टः आलोक, अलीगढ़

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