ईरान की घेराबंदी: अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस लौटाया, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा


US Military Blockade: अमेरिकी सेंट्रल कमांड की बड़ी कार्रवाई के बाद मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात बन गए हैं. ईरान के तेल टैंकरों को रोकने के लिए 10 हजार सैनिकों ने मोर्चा संभाला है. राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त शर्तों और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर कब्जे ने दुनिया भर की टेंशन बढ़ा दी है.
US Military Blockade: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने गुरुवार (23 अप्रैल) को जानकारी दी है कि ईरान की नाकेबंदी के दौरान अमेरिकी सेना ने 31 समुद्री जहाजों को पोर्ट पर वापस जाने के लिए मजबूर कर दिया है. सेना के अधिकारियों के अनुसार, इनमें से ज्यादातर जहाज तेल के टैंकर थे. सोशल मीडिया पर जारी एक अपडेट में CENTCOM ने बताया कि इस कार्रवाई के दौरान उन्हें काफी सहयोग मिला है और रोकने के बाद ज्यादातर जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन किया है.
CENTCOM अमेरिकी सेना का वह खास हिस्सा है जो मिडिल ईस्ट (पश्चिमी एशिया और मिस्र जैसे इलाके) में सुरक्षा और सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालता है. मिडिल ईस्ट दुनिया का वह हिस्सा है जहां एशिया, अफ्रीका और यूरोप मिलते हैं और यह इलाका अपने तेल के भंडार और प्राचीन इतिहास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है.
10 हजार सैनिकों और 17 जंगी जहाजों के साथ बड़ा ऑपरेशन
क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर यह एक बड़ी हलचल मानी जा रही है. CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी बंदरगाहों की इस नाकेबंदी में 10,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक, 17 जंगी जहाज और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान शामिल हैं. इस बड़े सैन्य अभियान की वजह से मिडिल ईस्ट में माहौल काफी गरमा गया है. बुधवार को हालात तब और बिगड़ गए जब ईरानी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में तीन कमर्शियल जहाजों पर फायरिंग की और उनमें से दो पर कब्जा कर लिया.
U.S. forces have directed 31 vessels to turn around or return to port as part of the U.S. blockade against Iran. 🇺🇸 pic.twitter.com/lG5ACEt7LR
— U.S. Central Command (@CENTCOM) April 23, 2026
ट्रंप की चेतावनी और सीजफायर के बीच टकराव
यह समुद्री टकराव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर को आगे बढ़ाने के ठीक 24 घंटे बाद हुआ है. ट्रंप प्रशासन ईरान के नेतृत्व से सीधी बात करने की कोशिश में है ताकि तनाव कम किया जा सके. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने साफ किया है कि फिलहाल युद्धविराम की कोई आखिरी तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) का पूरा स्टॉक सरेंडर कर दे.
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ईरान का पलटवार: नाकेबंदी को बताया ‘युद्ध’
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक ईरान की तरफ से कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आता और बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती, तब तक यह समुद्री नाकेबंदी जारी रहेगी. दूसरी ओर, ईरान ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस नाकेबंदी को ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह मौजूदा सीजफायर का उल्लंघन है और ईरान किसी भी दबाव वाली कार्रवाई का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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