ईरान के साथ जंग में अमेरिका के 16 विमान तबाह, 10 रीपर ड्रोन भी ध्वस्त; रिपोर्ट में दावा

Updated at : 20 Mar 2026 7:38 AM (IST)
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US Iran War 16 military aircraft destroyed

सैन्य विमान की एआई से बनाई गई इमेज.

US Iran War: ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग में अमेरिकी एयरफोर्स को तगड़ा नुकसान हुआ है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी मिसाइलों और तकनीकी खराबियों ने सुपरपावर के 16 लड़ाकू विमानों को खाक कर दिया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने का खतरा है.

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US Iran War: ईरान के साथ छिड़ी जंग में अब तक अमेरिका को अपने 16 सैन्य विमानों से हाथ धोना पड़ा है. इनमें 10 बेहद महंगे और खतरनाक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन (MQ-9 Reaper Drones) शामिल हैं, जिन्हें दुश्मन की आग ने मार गिराया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई अन्य विमानों को भी हमलों और ऑपरेशनों के दौरान भारी नुकसान पहुंचा है.

ब्लूमबर्ग और सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को सबसे बड़ा झटका तकनीकी खराबियों और आपसी तालमेल की कमी से लगा है. कुवैत में अमेरिका के ही 3 ‘F-15 फाइटर जेट्स’ गलती से अपनी ही तरफ की फायरिंग (फ्रेंडली फायर) का शिकार होकर गिर गए. वहीं इराक में एक ‘KC-135 रिफ्यूलिंग टैंकर’ हवा में ऑपरेशन के दौरान क्रैश हो गया, जिसमें सवार सभी 6 क्रू मेंबर्स की जान चली गई. इसके अलावा, सऊदी अरब के एक बेस पर ईरान की मिसाइल स्ट्राइक में 5 और ‘KC-135’ विमानों को नुकसान पहुंचने की खबर है.

ईरानी डिफेंस के आगे टिक नहीं पाए रीपर ड्रोन

ब्लूमबर्ग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका के 9 रीपर ड्रोन्स को हवा में ही उड़ा दिया है. वहीं, एक ड्रोन जॉर्डन के एयरफील्ड पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल का निशाना बना. बाकी के 2 ड्रोन हादसों की वजह से बर्बाद हुए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन ड्रोन्स को ऐसी खतरनाक जगहों पर इसीलिए भेजा जाता है क्योंकि इनमें पायलट नहीं होते और ये कम खर्चीले होते हैं. पीटर लेटन के अनुसार, अमेरिका ने जंग की शुरुआत में इतने ज्यादा चक्कर (सॉर्टीज) लगाए हैं कि यह संख्या खाड़ी युद्ध से भी ज्यादा हो गई है.

F-35 जेट की इमरजेंसी लैंडिंग  

सीएनएन ने सेंटकॉम (Centcom) अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका का सबसे आधुनिक ‘F-35 फाइटर जेट’ भी ईरानी हमले की चपेट में आ गया. हालांकि, पायलट इसे सुरक्षित तरीके से इमरजेंसी लैंडिंग कराने में कामयाब रहा और उसकी हालत स्थिर है. विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के एयर डिफेंस को पूरी तरह खत्म करना अमेरिका के लिए मुश्किल साबित हो रहा है. यही वजह है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम रास्तों को सुरक्षित करना अमेरिका के लिए सिरदर्द बन गया है.

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जंग के तीसरे हफ्ते में बढ़ा खतरा

जंग के तीसरे हफ्ते में पहुंचने के साथ ही ईरान ने कतर और सऊदी अरब के एनर्जी सेंटर्स पर हमले तेज कर दिए हैं. ईरान ने अपने ‘साउथ पार्स गैस फील्ड’ पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए यह कदम उठाया है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ईरान ने इतिहास में पहली बार हॉर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को ब्लॉक कर दिया है. इससे दुनिया की 20% तेल और गैस सप्लाई रुक गई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. अमेरिका फिलहाल इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने के लिए देशों का गठबंधन बनाने में संघर्ष कर रहा है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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