भारत-चीन की बढ़ती नजदीकी से पाकिस्तान बेचैन, आर्टिकल 370 के मॉडल पर PoK का स्टेटस बदलने की तैयारी?

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Narendra Modi, Xi Jinping, Shehbaz Sharif (Photo/X)

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर बातचीत बढ़ने के साथ ही पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गई हैं. पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक दर्जे में बदलाव की खबरें आ रही हैं, जिससे क्षेत्र में नई हलचल मची है.

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भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत आगे बढ़ने के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ती दिख रही है. News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक दर्जे में बदलाव पर विचार कर रही है. इसके लिए एक नए संवैधानिक ढांचे की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत दोनों क्षेत्रों को अंतरिम प्रांत जैसा दर्जा दिया जा सकता है. पाकिस्तान का यह कदम 2019 में भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले की तर्ज पर बताया जा रहा है.

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28वें संशोधन से बदल सकता है स्टेटस

रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह बदलाव 28वें संवैधानिक संशोधन या किसी अन्य आगामी कानून के जरिए किया जा सकता है. पाकिस्तान अपने संविधान के अनुच्छेद 1(2) में बदलाव की संभावना पर भी विचार कर रहा है. इस अनुच्छेद में पाकिस्तान के क्षेत्र और अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों को परिभाषित किया गया है.

प्रस्ताव के तहत PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के संघीय ढांचे में ज्यादा औपचारिक जगह देने और उन्हें पाकिस्तानी संसद में प्रतिनिधित्व देने की बात सामने आई है. हालांकि, अभी यह प्रस्ताव विचार के स्तर पर है. पाकिस्तान सरकार की ओर से इन दोनों क्षेत्रों को स्थायी रूप से प्रांत बनाने का कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है.

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भारत-चीन बातचीत पर पाकिस्तान की नजर

News18 के मुताबिक, पाकिस्तान भारत और चीन के बीच चल रही सीमा वार्ता पर बारीकी से नजर रख रहा है. खासकर भारतीय NSA अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई हालिया बैठक को इस्लामाबाद अहम मान रहा है.

भारत और चीन सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में पाकिस्तान को आशंका है कि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार से क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है.

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2019 के फैसले से क्यों की जा रही तुलना?

पाकिस्तान की प्रस्तावित कवायद की तुलना भारत के 2019 में अनुच्छेद 370 से जुड़े फैसले से की जा रही है. अगस्त 2019 में भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाया.

इसी तरह पाकिस्तान अगर PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक दर्जे में बदलाव करता है, तो इन क्षेत्रों को अपने संघीय ढांचे में ज्यादा औपचारिक रूप से शामिल करने की कोशिश मानी जाएगी.


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