Korean Liberation Day: राष्ट्रपति ली ने स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और ऐतिहासिक न्याय का लिया संकल्प

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‘कोरिया अमर रहे’ के नारों के बीच लिबरेशन डे, राष्ट्रपति ली ने स्वतंत्रता नायकों के परिवारों के कल्याण का किया वादा.

दक्षिण कोरिया के 81वें लिबरेशन डे समारोह में राष्ट्रपति ली जे-म्यॉन्ग ने स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और उनके वंशजों के सम्मान व कल्याण की रक्षा का संकल्प लिया. समारोह में 283 लोगों को राजकीय सम्मान दिया गया.

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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यॉन्ग (Lee Jae Myung) ने शनिवार को देश के 81वें लिबरेशन डे (स्वतंत्रता दिवस) समारोह में स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और उनके परिवारों के सम्मान व कल्याण को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया.

उन्होंने कहा कि सरकार देश के दर्दनाक इतिहास की बची हुई विरासतों को दूर करने और स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वालों के सम्मान और कल्याण की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगी.

सियोल के जोंगनो जिले स्थित सेजोंग सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति ली अपनी पत्नी किम ह्ये-क्यॉन्ग के साथ शामिल हुए.

समारोह में करीब 3,000 लोगों ने हिस्सा लिया.

इनमें स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सम्मानित कार्यकर्ता, उनके परिजन, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, दक्षिण कोरिया में तैनात राजनयिक और बड़ी संख्या में आम नागरिक व विद्यार्थी शामिल थे.

283 स्वतंत्रता सेनानियों को मिला राजकीय सम्मान

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों को राजकीय सम्मान प्रदान करना रहा. कुल 283 लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान के लिए राज्य सम्मान दिया गया.

राष्ट्रपति ली ने अपने संबोधन में स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों और उनके वंशजों के प्रति सरकार की जिम्मेदारी को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित किया, उनके सम्मान और उनके परिवारों के कल्याण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है.

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण कोरिया अपने औपनिवेशिक अतीत और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को राष्ट्रीय पहचान के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखता है.

समारोह में दिखी स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत

81वें लिबरेशन डे समारोह की शुरुआत औपचारिक उद्घोषणा और राष्ट्रीय स्मरण के साथ हुई.

इसके बाद राष्ट्रपति का संबोधन, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े लोगों को सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुति और लिबरेशन डे एंथम का सामूहिक गायन हुआ.

समारोह का समापन पारंपरिक ‘मनसे’ (Manse or 10,000 years) के नारों के साथ हुआ.

कोरियाई स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में ‘मनसे’ का अर्थ मोटे तौर पर ‘कोरिया अमर रहे’ या ‘कोरिया की जय’ के रूप में लिया जाता है.

यह नारा स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति से गहराई से जुड़ा हुआ है.

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वीडियो के जरिए सुनाई गई ‘आजादी के सपनों’ की कहानी

समारोह में एक विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसे आयोजकों ने ‘रिले ऑफ ड्रीम्स’ यानी ‘सपनों की मशाल आगे बढ़ाने’ की थीम पर तैयार किया था.

वीडियो में स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं के सपनों और आधुनिक दक्षिण कोरिया के निर्माण के बीच संबंध को दिखाया गया. इसमें स्वतंत्रता सेनानी किम कू, आह्न चांग-हो और ली होए-योंग जैसे नेताओं का उल्लेख किया गया.

वीडियो में उनके उन सपनों को आधुनिक दक्षिण कोरिया की उपलब्धियों से जोड़ा गया, जिनमें एक सांस्कृतिक रूप से शक्तिशाली राष्ट्र, दुनिया में सम्मानित देश और अपनी रक्षा करने में सक्षम स्वतंत्र राष्ट्र की कल्पना शामिल थी.

इतिहास को याद रखना क्यों महत्वपूर्ण है?

राष्ट्रपति ली के भाषण का केंद्रीय संदेश केवल स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देना नहीं था.

उन्होंने इतिहास से जुड़े उन सवालों को भी उठाया जिन्हें दक्षिण कोरिया आज भी अपनी राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा मानता है.

उनका जोर इस बात पर रहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले लोगों के साथ-साथ उनके वंशजों और परिवारों के सम्मान और कल्याण की जिम्मेदारी भी राज्य को उठानी चाहिए.

इस तरह 81वें लिबरेशन डे समारोह में दक्षिण कोरिया ने अपनी स्वतंत्रता की कहानी को केवल अतीत की घटना के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान, ऐतिहासिक न्याय और आधुनिक राष्ट्र निर्माण की निरंतर प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया.

राष्ट्रपति ली का संदेश स्पष्ट था- स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष को याद रखना और उसके नायकों का सम्मान करना आधुनिक कोरिया की जिम्मेदारी है.

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अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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