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US presidential election 2020: क्या सुप्रीम कोर्ट बदल सकता है अमेरिका चुनाव का परिणाम, क्या हैं नियम और इतिहास

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव 2020
अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव 2020
Photo: Twitter

वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है. इलेक्टॉल वोटों के आधार पर डेमोक्रेट जो बाइडेन ने बढ़त हासिल की है. वहीं डोनाल्ड ट्रंप भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. इस बीच वोटों की गिनती में पिछड़ने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद के मुताबिक चुनाव में धांधली का आरोप लगाना शुरू कर दिया है. ट्रंप का आरोप है कि तय सीमा के बाद भी पोस्टल वोटों को जमा किया जा रहा है और गिनती की जा रही है.

पेन्सिलवेनिया और जॉर्जिया में काउंटिंग रोकने की मांग

इस बीच अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पेन्सिलवेनिया और जॉर्जिया में वोटों की काउंटिंग को रोकने के लिए स्थानीय अदालत में अर्जी दाखिल की. लेकिन फिलहाल रोक नहीं लगाई गई है और काउटिंग जारी है. इस बीच संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका में वोटों की गिनती के बाद जो हालात बनें हैं, अमेरिका के अगले राष्ट्रपति का फैसला सुप्रीम कोर्ट में होगा.

जानें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच विवाद की वजह

दरअसल, अमेरिका में परंपरागत रूप से ये बात रही है कि डेमोक्रेट उम्मीदवार पोस्टल बैलेट के जरिए वोटिंग को प्राथमिकता देते हैं जबकि रिपब्लिकन समर्थक पर्सन इन बूथ के जरिए. डोनाल्ड ट्रंप ने 4 महीने पहले मांग की थी कि चुनाव पर्सन इन बूथ के माध्यम से ही किया जाए, लेकिन उनकी ये मांग नहीं मानी गई.

यदि पर्सन इन बूथ के माध्यम से वोटिंग को अनिवार्य बना दिया जाता तो लाखों की संख्या में लोग वोट ही नहीं डाल पाते क्योंकि कोरोना महामारी चल रही है. अधिकांश राज्यों में डेमोक्रेट उम्मीदवारों ने पोस्टल बैलेट के जरिए ही वोटिंग की है.

अभी तक वोटों की काउंटिंग में जो बाइडेन को बढ़त

डोनाल्ड ट्रंप वोटों की काउंटिंग के पहले चरण में बढ़त हासिल किए हुए थे लेकिन अब बाइडेन का पलड़ा भारी है. खबर लिखे जाने तक बाइडेन को 274 इलेक्ट्रॉल वोटों की बढ़त हासिल थी. उम्मीद के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने कहना शुरू कर दिया है कि काउटिंग गलत तरीके से की जा रही है. समय सीमा खत्म होने के बाद भी वोटों की काउंटिंग की जा रही है. इस बीच ट्रंप ने इशारा कर दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.

ना केवल डोनाल्ड ट्रंप बल्कि डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन ने भी कहा है कि उन्होंने पहले से ही कानूनी विकल्पों की तैयारी कर ली है. अमेरिकी कानून के मुताबिक इस तरह की विवाद की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट दखल दे सकता है और इतिहास में ऐसा हो चुका है.

जानें कब-कब अमेरिकी चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने दी दखल

पहला मामला साल 2000 का है. इस चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने बढ़त हासिल की थी. उनके विरोधी उम्मीदवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली. मांग की गई कि फ्लोरिडा में वोटों की दोबारा गिनती की जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा परिणामों को वैध माना और दोबारा काउंटिंग की मांग खारिज कर दी. रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉर्ज डब्ल्यू बुश जीत गए. ऐसा ही 2016 में हुआ.

रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को इलेक्ट्रॉल वोटों की बढ़त मिली थी. पॉपुलर वोट हिलेरी क्लिंटन को मिले थे. ट्रंप की बढ़त को चुनौती दी गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के हक में फैसला सुनाया. डोनाल्ड ट्रंप इलेक्ट्रॉल वोटों की बढ़त के हिसाब से चुनाव जीत गए.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला कैसे करेगा नतीजों को प्रभावित

इस बार भी ऐसा हो सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप कई राज्यों में पोस्टल बैलेट वोटिंग में धांधली का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. मांग कर सकते हैं कि पेन्सिलवेनिया, जॉर्जिया, फ्लोरिडा जैसे राज्यों में दोबारा मतदान करवाए जाएं. दिक्कत है ये कि इस वक्त अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 9 में से 6 जज रिपब्लिकन समर्थक हैं.

इनमें से एक की नियुक्ति अभी 6 महीने पहले ही हुई है. हो सकता है कि काउंटिंग की दोबारा इजाजत दी जाए. हालांकि जो बाइडेन ने जितनी बढ़त हासिल की है उसे देखते हुए ऐसा होना संभव नहीं लगता.

Posted By- Suraj Thakur

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