Bangladesh Violence: बांग्लादेश हिंसा से मालामाल हुआ मोहम्मद सुमन, ये काम कर हजारों की कमाई की
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 27 Aug 2024 8:01 PM
Bangladesh Violence
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में छात्रों के प्रदर्शन ने शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका. हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भी हिंसा नहीं रुकी और करीब 600 से अधिक लोगों की मौत हो गई.
Bangladesh Violence: बांग्लादेश हिंसा ने पड़ोसी देश को पूरी तरह से तोड़ दिया. आर्थिक रूप से बांग्लादेश को भारी नुकसान उठाना पड़ा. हिंसा से भले ही बांग्लादेश तबाह हो गया, लेकिन एक ऐसा भी शख्स है, जिसके लिए हिंसा और प्रदर्शन ‘आपदा में अवसर’ साबित हुआ. जब बांग्लादेश जल रहा था, तो मोहम्मद सुमन हजारों की कमाई करने में लगा था. आप सोच रहे होंगे कि आखिर शख्स ने किस तरह से कमाई की. ये जानने के लिए आपको खबर के अगले हिस्से में पहुंचना होगा.
ध्वज और हैडबैंड बेचकर शख्स ने कमाई की
1989 में ढाका में जन्मा मोहम्मद सुमन रोजी-रोटी के लिए तीन अलग-अलग आकार के बांग्लादेशी झंडे और हैडबैंड बेचता है। उसके मुताबिक, देश में एक महीने से अधिक समय तक हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान उसने ‘जबरदस्त कमाई’ की. सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच ढाका में राष्ट्रीय ध्वज और ‘हैडबैंड’ बेचने वाला मोहम्मद सुमन बांग्लादेश के असाधारण घटनाक्रम का पल-पल का गवाह रहा, लेकिन उसकी खुद की जिंदगी बेहद साधारण है. मोहम्मद सुमन का नाम सामाजिक सद्भाव की कहानी बयां करता है, जिसकी इस हिंसाग्रस्त देश में इस समय सबसे ज्यादा जरूरत है.
बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शनों का प्रतीक बनकर उभरा सुमन का ध्वज और हैडबैंड
बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज से प्रेरित हरा हैडबैंड बेचने वाला सुमन कहता है कि उसके इस उत्पाद की मांग सबसे ज्यादा है, खासकर छात्रों के बीच. यह हैडबैंड बांग्लादेश में विरोध-प्रदर्शनों का प्रतीक बनकर उभरा है. काम से समय निकालकर थोड़ा आराम करते सुमन (35) ने अपने जीवन की कहानी साझा की और बताया कि कैसे उसे ‘सुमन’ नाम मिला, जो हिंदू समुदाय में रखा जाने वाला एक आम नाम है.
प्रदर्शन के दौरान सुमन ने 1500 झंडे और 500 हैडबैंड बेच डाले
सुमन के मुताबिक, उसने पांच अगस्त को ‘रिकॉर्ड बिक्री’ की थी, क्योंकि प्रदर्शनकारी हैडबैंड पहनकर और झंडे लहराकर प्रदर्शन करना चाहते थे. सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों और वीडियो में इसकी झलक भी देखी जा सकती है. सुमन स्वीकार करता है कि उसने दोनों उत्पाद मूल कीमत से तीन गुना से ज्यादा दाम पर बेचे, क्योंकि उस दिन मांग बढ़ गई थी. उसने दावा किया, पांच अगस्त को हर आकार के झंडों की मांग थी. मैं तीन आकार के झंडे बेचता हूं. उस दिन सारे झंडे बिक गए. मैं सुबह आया और बेहद कम समय में लगभग 1500 झंडे और 500 हैडबैंड बेच डाले. सुमन 2018 से रोजी-रोटी के लिए झंडे बेच रहा है. ढाका में क्रिकेट मैच के दौरान भी उसकी अच्छी बिक्री होती है.
धर्म से मुस्लिम, हिंदु महिला ने नाम रखा, मोहम्मद सुमन नाम के पीछे की कहानी
सुमन ने बताया, मेरा जन्म ढाका के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. मेरे नाम की वजह से कई लोगों को लगता है कि मेरे माता-पिता अलग-अलग धर्म के थे, लेकिन ऐसा नहीं है. जब मेरी मां गर्भवती थी, तब हमारे पड़ोस में रहने वाली अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की एक महिला ने उससे कहा था कि वह जन्म के बाद बच्चे का नाम रखेगी. और जब मेरा जन्म हुआ, तो उसने मुझे सुमन नाम दिया. पुराने ढाका के अलु बाजार इलाके में रहने वाला सुमन बताता है कि भारतीय मूल का उसका पिता 1971 के आसपास कलकत्ता (अब कोलकाता) से ढाका आ गया था और यहीं पर घर बसा लिया था.
झंडे बनाने वाली फैक्टरी में सुमन ने किया काम
झंडे बेचने से पहले सुमन झंडे बनाने वाली एक फैक्टरी में काम करता था. हिंदी और बांग्ला भाषा जानने वाले सुमन ने एक सरकारी स्कूल से कक्षा आठ तक की पढ़ाई की और फिर परिवार के पालन-पोषण के लिए काम करने लगा. वह बताता है, मैंने पहले बिजलीकर्मी के रूप में काम किया, लेकिन आय बहुत कम थी, इसलिए झंडा बनाने वाली फैक्टरी में नौकरी शुरू कर दी.
बांग्लादेश हिंसा ने 600 से अधिक लोगों की जान ली
सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ जुलाई के मध्य में बांग्लादेश में भड़के विरोध-प्रदर्शन में 600 से अधिक लोग मारे गए थे. विरोध-प्रदर्शनों के बीच पांच अगस्त को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बड़े पैमाने पर हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया था. पांच अगस्त को शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और बांग्लादेश छोड़कर भारत चले जाने के बाद देश में सरकार विरोधी प्रदर्शन थम गए थे.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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