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वोटिंग के दौरान अब नहीं बदलना पड़ेगा EVM, बंगाल चुनाव में होगा M-3 मशीन का इस्तेमाल, जानें इसकी खूबियां

Updated at : 02 Mar 2021 7:35 AM (IST)
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Electronic Voting Machine

पुरानी मशीनों में मतदान के दौरान इवीएम के लिए इस्तेमाल होने वाली एम-वन व एम-टू मशीनों में एक सिंगल फ्लैप देकर बैटरी सेक्शन व कैंट सेक्शन को ढका जाता था. बैटरी खत्म होने पर पूरी मशीन को ही बदलना पड़ता था.

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कोलकाता (नम्रता पांडेय) : मतदान के बीच में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का पावर डाउन हो जाये, तो अब उसे बदलने की जरूरत नहीं होगी. सिर्फ पावर पैक को रिप्लेस कर दिया जायेगा. एम-थ्री (M-3) मशीन की वजह से यह संभव हो पाया है. इस मशीन का पहली बार बंगाल विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल होगा.

दक्षिण 24 परगना के जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक यह मशीन उपलब्ध नहीं थी. पुरानी मशीनों में मतदान के दौरान इवीएम के लिए इस्तेमाल होने वाली एम-वन व एम-टू मशीनों में एक सिंगल फ्लैप देकर बैटरी सेक्शन व कैंट सेक्शन को ढका जाता था. बैटरी खत्म होने पर पूरी मशीन को ही बदलना पड़ता था.

अब ऐसा नहीं करना पड़ेगा. नयी एम-थ्री मशीन में बैटरी सेक्शन व कैंट सेक्शन को अलग-अलग रखा गया है. डीसीआरसी से जो मशीन मिल रही है, उसमें एड्रेस टैग करके कैंट सेक्शन व बैटरी सेक्शन को अलग किया गया है. इस बार मतदान के दौरान यदि किसी प्रकार से बैटरी डाउन हो जायेगी, तो प्रेजाइडिंग ऑफिसर रिपोर्ट पार्ट-थ्री के तहत काम करेंगे और सिर्फ पावर बैटरी को बदला जायेगा.

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जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि इसके लिए जरूरी प्रक्रिया के तहत कॉडोलेंट नंबर व एड्रेस टैग के यूनिक आइडी नंबर को लिखकर बैटरी को बदला जा सकेगा. नयी बैटरी लगाने के बाद फिर से नयी बैटरी एड्रेस टैग लगाकर एड्रेस टैग को नोट किया जायेगा. सभी पोलिंग एजेंट व ऑफिसर्स की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की जायेगी.

क्या है इवीएम

इवीएम (EVM) मतदाताओं के मत को दर्ज करने का एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन दो इकाइयों से बनी होती हैं. कंट्रोल यूनिट एवं बैलेटिंग यूनिट. दोनों यूनिट पांच मीटर लंबे केबल से जुड़ी होती हैं. नियंत्रण इकाई पीठासीन अधिकारी या मतदान अधिकारी के पास होती है, जबकि बैलेट यूनिट को मतदान कम्पार्टमेंट में रखा जाता है.

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मतपत्र जारी करने की बजाय कंट्रोल यूनिट के प्रभारी मतदान अधिकारी कंट्रोल यूनिट पर मतपत्र बटन दबाकर एक मतपत्र जारी करेंगे. इससे मतदाता अपनी पसंद के अभ्यर्थी व प्रतीक के सामने बैलेट यूनिट पर नीले रंग के बटन को दबाकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल समेत देश के 4 राज्यों एवं एक केंद्रशासित प्रदेश में मार्च से अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव कराये जा रहे हैं. मतदान के लिए इक्लेट्रल रोल, पोलिंग स्टेशन, इवीएम व पोलिंग पर्सनल का होना अनिवार्य है. मतदान केंद्र में इवीएम में गड़बड़ी हो जाये, तो काफी देर तक वोटिंग रोकनी पड़ जाती है. इसलिए मशीन में सुधार किया गया है, ताकि चुनाव बाधित न हो.

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Posted By : Mithilesh Jha

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