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कोलकाता में गंगा के तट का हो रहा अतिक्रमण, पोर्ट ट्रस्ट और जहाजरानी मंत्रालय तक पहुंचा मामला

Updated at : 04 Jul 2021 2:27 PM (IST)
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कोलकाता में गंगा के तट का हो रहा अतिक्रमण, पोर्ट ट्रस्ट और जहाजरानी मंत्रालय तक पहुंचा मामला

भाजपा नेता ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन और जहाजरानी मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि वार्फ (Wharf) लाइसेंस की आड़ में गंगा के तट के अतिक्रमण का खेल चल रहा है.

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कोलकाता (नवीन कुमार राय): कोलकाता में गंगा के तट का अतिक्रमण हो रहा है. कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट और जहाजरानी मंत्रालय से इसकी शिकायत की गयी है. शिकायत काशीपुर इलाके के स्थानीय भाजपा नेता सुनील राय ने की है. भाजपा नेता ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन और जहाजरानी मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि वार्फ (Wharf) लाइसेंस की आड़ में गंगा के तट के अतिक्रमण का खेल चल रहा है.

सुनील राय ने ई-मेल के जरिये पोर्ट ट्रस्ट और जहाजरानी मंत्री मनसुख मंडविया को भेजी गयी चिट्ठी में कहा है कि वार्फ लाइसेंस की आड़ में भू-माफिया जमीन कब्जा करते हैं. उनका आरोप है कि पोर्ट ट्रस्ट के कुछ अधिकारी भी इनकी मदद करते हैं. कोलकाता के सभी घाटों के साथ-साथ उत्तर 24 परगना और हुगली जिला में भी गंगा के तट पर कब्जा करके निर्माण कार्य हो रहा है. कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन विनीत कुमार ने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है.

सुनील राय ने प्रभात खबर को बताया कि गंगा किनारे जमीन पर कब्जा का जो खेल चल रहा है, उसमें वार्फ लाइसेंस की अहम भूमिका है. दरअसल, गंगा में जल परिवहन के लिए यह लाइसेंस जरूरी है. इसके बगैर गंगा के तट पर किसी नाव या जहाज में माल को न तो लादा जा सकता है, न उतारा जा सकता है. लाइसेंसधारक को इस काम के लिए 10 वर्ग मीटर से 100 वर्ग मीटर तक की जमीन लीज पर दी जाती है.

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अल्प अवधि के लिए मिलने वाले इस लाइसेंस का भू-माफिया दुरुपयोग करते हैं. लाइसेंस किसी और के नाम पर होता है और जमीन पर कोई और कब्जा करता है. यहां पक्का निर्माण कर लिया जाता है, जबकि लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद उन्हें उस जमीन का किसी तरह से इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होता.

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भाजपा नेता ने पोर्ट ट्रस्ट और जहाजरानी मंत्रालय को जो चिट्ठी लिखी है, उसमें कहा गया है कि काशीपुर फेरी घाट पर पोर्ट ट्रस्ट ने एक मार्च 2021 को तरसीना बीबी को 10 वर्ग मीटर जगह 31 मई 2021 तक के लिए वार्फ लाइसेंस दिया था. समय बीत जाने के बाद भी उस जगह को छोड़ा नहीं गया है. यहां पक्का निर्माण हो गया है.

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काशीपुर बेलगछिया के संयोजक सुनील राय ने पोर्ट और जहाजरानी मंत्रालय से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. बंगाल चुनाव से पहले जहाजरानी मंत्रालय मनसुख मंडाविया ने उन्हें आश्वस्त किया था कि वह लिखित शिकायत करें, उस पर कार्रवाई की जायेगी. सुनील राय ने कहा है कि अब भी अगर इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई, तो वह बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे.

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क्या है वार्फ लाइसेंस

किसी व्यक्ति या संस्था को नाव, स्टीमर या वेसेल से गंगा के रास्ते सामान लाने या ले जाने के लिए जिस जगह का इस्तेमाल होता है, उसके लिए पोर्ट ट्रस्ट से एक लाइसेंस लेना होता है. इस लाइसेंस को ही वार्फ लाइसेंस कहते हैं. यह लाइसेंस छोटी अवधि के लिए दिया जाता है. लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद जमीन छोड़ देनी होती है.

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बालू, सादा बालू, गिट्टी और पाट के साथ मिट्टी और जूट को लाने और ले जाने के नाम पर यह लाइसेंस लिया जाता है. जो एक बार घाटों पर लीज के लिए जगह पा जाता है, वह वहां पर पक्का शेड और घर बनाकर अपना कारोबार शुरू कर देता है.

Posted By: Mithilesh Jha

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