#WorldRadioDay: मैं आकाशवाणी हूं .....

पवन कुमार पाण्डेपोस्ट ऑफिस और रेल नेटवर्क के आगमन के बाद आम भारतीयों के जीवन में रेडियो का प्रवेश किसी परिकथा से कम नहीं है. करीब एक सदी तक लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका यह यंत्र, आज बदले हुए स्वरूप में सबके सामने है. गांव के चौपाल से निकलकर गाड़ी की स्टीयरिंग के […]
पवन कुमार पाण्डे
पोस्ट ऑफिस और रेल नेटवर्क के आगमन के बाद आम भारतीयों के जीवन में रेडियो का प्रवेश किसी परिकथा से कम नहीं है. करीब एक सदी तक लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुका यह यंत्र, आज बदले हुए स्वरूप में सबके सामने है. गांव के चौपाल से निकलकर गाड़ी की स्टीयरिंग के में बगल में मौजूद यह यंत्र बदलाव का प्रतीक है. इन सब के बावजूद यह लोगों की स्मृतियों में जिंदा है. अलमीरा में बंद रेडियो सिर्फ एक अदद यंत्र न होकर, अपनी पीढ़ियों के साथ गुजाारे क्त की याद समेटे हुए है. उस जमाने में जिंदगी इतनी व्यस्त नहीं थी. समाचार, मनोरंजन और क्रिकेट कमेंट्री का जरिया रेडियो ही हुआ करता था.
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