शेर पालना महंगा पड़ा, जान देकर चुकाई कीमत

चेक रिपब्लिक के रहने वाले माइकल प्रासेक ने शायद ये सोचा भी न हो कि जिस शेर को वो पाल रहे हैं और प्रशासन से लड़कर भी अपने पास रख रहे हैं, वो उनकी ही जान ले लेगा. 33 साल के माइकल प्रासेक की लाश उसी पिंजरे में मिली जहां उन्होंने अपना प्यारा शेर रखा […]
चेक रिपब्लिक के रहने वाले माइकल प्रासेक ने शायद ये सोचा भी न हो कि जिस शेर को वो पाल रहे हैं और प्रशासन से लड़कर भी अपने पास रख रहे हैं, वो उनकी ही जान ले लेगा.
33 साल के माइकल प्रासेक की लाश उसी पिंजरे में मिली जहां उन्होंने अपना प्यारा शेर रखा था.
माइकल प्रासेक अपने घर के पीछे एक शेर और शेरनी को पाल रहे थे. वह साल 2016 में इस शेर को लेकर आए थे और तब उसकी उम्र नौ साल थी. इसके बाद प्रजनन के लिए पिछले साल वो एक शेरनी को भी लेकर आए.
लेकिन माइकल जब इन्हें लेकर आए तो आसपास के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी. उन्हें डर था कि शेर और शेरनी लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
पर इनसे जुड़े जोखिम जानने के बावजूद भी माइकल जानवरों को जीडीशोफ गांव में अपने घर के पीछे बने बाड़ों में रखते रहे.
प्रशासन ने भी उन्हें ऐसे जंगली जानवर रखने की अनुमति नहीं दी थी. पहले उन्हें पिंजरे बनाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था और बाद में अवैध प्रजनन के लिए जुर्माना लगाया था.
चेक रिपब्लिक में इन जानवरों को रखने की कोई वैकल्पिक सुविधा न होने और जानवरों के साथ प्रताड़ना के कोई प्रमाण न मिलने की वजह से शेर और शेरनी को वहां से नहीं हटाया जा सका.
इस तरह उन्हें शेर को रखने की मंज़ूरी मिल गई. लेकिन पिछली गर्मियों में माइकल प्रासेक तब ख़बरों में आ गए जब वो अपनी शेरनी को लेकर वॉक पर गए थे और एक साइकिल सवार उनकी शेरनी से टकरा गया था.
ये मामला पुलिस तक पहुंचा और इसे एक सड़क दुर्घटना का मामला माना गया.
लेकिन फिर वो दिन भी आया जब माइकल के शेर ने अपने मालिक को ही मार दिया. माइकल के पिता को उनकी लाश शेर के पिंजरे में मिली और उन्होंने स्थानीय मीडिया को बताया कि पिंजरा अंदर से बंद था.
घटनास्थल पर मौजूद पुलिस ने दोनों जानवरों को मार दिया. एक पुलिस प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि माइकल प्रासेक को निकालने के लिए जानवरों को गोली मारना बहुत ज़रूरी था.
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