CTX: ताकि परिंदा भी पर नहीं मार पाये, एयरपोर्ट पर बदल जाएगा स‍िक्‍योर‍िटी स‍िस्‍टम; क्‍या है फुल बॉडी स्कैनर?

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 17 Dec 2023 12:00 PM

विज्ञापन

what is CTX and full body scanner technology used for airport security - 10 मिलियन से अधिक वार्षिक यात्री यातायात वाले हवाई अड्डों पर फुल-बॉडी स्कैनर और 5 मिलियन से अधिक यात्रियों वाले हवाई अड्डों पर सीटीएक्स मशीनें स्थापित करने की प्रारंभिक समय सीमा...

विज्ञापन

What Is CTX Technology : एयरपोर्ट सिक्योरिटी के लिए देश में नयी-नयी तकनीक इस्तेमाल में लायी जा रही है. इसी के तहत, दिल्ली हवाई अड्डे पर मई 2024 तक फुल बॉडी स्कैनर लगाये जाने की उम्मीद है. वहीं कंप्यूटर टोमोग्राफी एक्स-रे को भी अगले साल मई तक स्थापित किया जा सकता है. नागरिक विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) के महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने कहा कि कुछ प्रावधान संबंधी मुद्दों के कारण, कुछ हवाई अड्डों पर फुल-बॉडी स्कैनर और सीटीएक्स स्कैनर स्थापित करने की समय सीमा बढ़ाई जा रही है. दोनों उपकरणों को 31 दिसंबर तक स्थापित किया जाना था. राष्ट्रीय राजधानी में हसन ने कहा कि कुछ प्रावधान संबंधी मुद्दे हैं. बीसीएएस स्कैनर की स्थापना पर हवाई अड्डा संचालकों के साथ चर्चा कर रहा है. उन्होंने कहा, हमें फुल बॉडी स्कैनर और एक्स-रे मशीन के मई तक स्थापित किये जाने की उम्मीद है.

कंप्यूटर टोमोग्राफी एक्स-रे का इस्तेमाल

हसन ने कहा कि दोनों के अगले साल मई तक दिल्ली हवाई अड्डे पर स्थापित होने की उम्मीद है. बीसीएएस ने हवाई अड्डों पर कंप्यूटर टोमोग्राफी प्रौद्योगिकी से लैस स्कैनर लगाने की पिछले साल सिफारिश की थी. सीटीएक्स (कंप्यूटर टोमोग्राफी एक्स-रे) स्कैनर लगाये जाने के बाद यात्रियों को हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को अपने सामान से अलग नहीं निकालना पड़ेगा. अभी हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के दौरान यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक सामान निकालकर अलग ट्रे में रखना पड़ता है.

Also Read: Project Wave के तहत इस सरकारी बैंक ने लॉन्च की नयी सर्विस, ग्राहकों को ऐसे मिलेगा फायदा

फुल-बॉडी स्कैनर से होगी जांच

फुल-बॉडी स्कैनर की शुरुआत यात्री स्क्रीनिंग में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है, जो सुरक्षा जांच के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है. बीसीएएस के महानिदेशक जुल्फिकार हसन ने खुलासा किया कि प्रावधान के मुद्दों के कारण इन स्कैनर और सीटीएक्स मशीनों की स्थापना की समय सीमा बढ़ाई जा रही है, और 10 मिलियन से अधिक वार्षिक यात्री यातायात वाले हवाई अड्डों पर फुल-बॉडी स्कैनर और 5 मिलियन से अधिक यात्रियों वाले हवाई अड्डों पर सीटीएक्स मशीनें स्थापित करने की प्रारंभिक समय सीमा 31 दिसंबर निर्धारित की गई थी. हालांकि, संशोधित समय सीमा, जो अब मई 2024 तक होने की उम्मीद है, प्रतिबद्धता को दर्शाती है. इन उन्नत सुरक्षा प्रौद्योगिकियों की सुचारू और चरणबद्ध तैनाती सुनिश्चित करना. मार्च 2024 को समाप्त होने वाले चालू वित्तीय वर्ष में 70 मिलियन से अधिक यात्री यातायात के साथ देश के सबसे बड़े हवाई अड्डे के रूप में दिल्ली हवाई अड्डा, इन अत्याधुनिक सुरक्षा उपायों को लागू करने में सबसे आगे है.

क्या है CTX तकनीक?

CTX मशीनें कंप्यूटर टोमोग्राफी एक्स-रे प्रौद्योगिकी का लाभ उठाती हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षा जांच के दौरान अपने हैंड बैगेज में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने की सुविधा मिलती है. इससे यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को अलग से निकालने और ट्रे में रखने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, जिससे सुरक्षा जांच प्रक्रिया सरल हो जाती है. बीसीएएस ने चरणबद्ध तरीके से फुल-बॉडी स्कैनर तैनात करने की योजना बनाई है, और कंप्यूटर टोमोग्राफी तकनीक पर आधारित स्कैनर की स्थापना से हाथ के सामान के अंदर वस्तुओं का दो-आयामी दृश्य प्रदान करने की उम्मीद है. यह न केवल सुरक्षा बढ़ाता है बल्कि सुरक्षा जांच प्रक्रिया को भी तेज करता है, जिससे अधिक कुशल और यात्री-अनुकूल अनुभव में योगदान मिलता है.

Also Read: Innovation: शिफ्ट ओवर होते ही खुद बंद हो जाएगा कंप्यूटर, मध्य प्रदेश की IT कंपनी ने बनाया कमाल का सॉफ्टवेयर

विज्ञापन
Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola