साहिबगंज में बांस के बने सूप का चार राज्यों में होता है निर्यात, एक लाख से भी ज्यादा घरों तक पहुंचता है
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 17 Nov 2023 1:17 PM
सूप का कारोबार तकरीबन 100 वर्षों से चलता आ रहा है. जब पर्व का समय आता है तो तकरीबन 50 से 70 हजार सूप कारोबारी अपने सूप का निर्यात कर देते हैं. वैसे दो कारोबारी की अगर हम बातें करें तो तकरीबन एक लाख से ज्यादा सूप साहिबगंज से निकलकर चार राज्यों के घरों में पहुंचता है.
साहिबगंज : सूर्योपासना का पर्व छठ को लेकर शहर में तैयारी जोर-शोर से चल रही है. लोग छठ पर्व की तैयारी से जुड़े सामग्री की खरीदारी शुरू कर दिये हैं. छठ पर्व में बांस के सूप को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. छठव्रती बांस के सूप से ही भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं. बांस के सूप बनाने की परंपरा जिले में वर्षों से पहाड़िया, संताल व मल्लिक समुदाय के लोग करते आ रहे हैं. शहर से सूप का निर्यात वर्षों से होता आ रहा है. वैसे तो सूप का कारोबार नियमित रूप से सालों भर चलता रहता है. छठ पर्व में कारोबार में चार चांद लग जाता है. सूप कारोबारी अपने शॉप में सालभर सूप का स्टॉक जमा कर रखते हैं. सूप का सारा स्टॉक छठ पर्व में ही खत्म हो जाता है. सबसे खास बात यह है कि छठ पर्व में साहिबगंज से चार राज्यों में सूप की सप्लाई की जाती है. वहीं सूप व टोकरी कारोबारी एलसी रोड निवासी मो अख्तर अली ने बताया कि सूप का कारोबार उनके घर वर्ष 1960 से पहले से होता आ रहा है, जब सूप की कीमत मात्र 10 आना और बड़ी टोकरी की कीमत 10 आना हुआ करता था. वहीं एक अन्य सूप कारोबारी एलसी रोड निवासी एजाज उल इस्लाम उर्फ मुन्ना ने बताया कि सूप का यह कारोबार उनके दादा मो सुलेमान अली ने वर्ष 1920 में शुरू किया था. इसके बाद 1956 में मेरे दादा के निधन के बाद मेरे पिता इमामुद्दीन ने इस कारोबार को संभाला. हमारे घर में सूप का कारोबार तकरीबन 100 वर्षों से चलता आ रहा है. जब पर्व का समय आता है तो तकरीबन 50 से 70 हजार सूप कारोबारी अपने सूप का निर्यात कर देते हैं. वैसे दो कारोबारी की अगर हम बातें करें तो तकरीबन एक लाख से ज्यादा सूप साहिबगंज से निकलकर चार राज्यों के घरों में पहुंचता है.
महापर्व छठ पूजा को लेकर गुरुवार को गाेड़ाबाड़ी के साप्ताहिक हाट में जमकर खरीदारी हुई. मिली जानकारी के अनुसार 50 लाख से अधिक की खरीदारी हुई. हाट में सुबह 8 बजे से ही लोग पहुंचने लगे थे. दूर-दराज से आये लोगों ने बांस का सूप 125 रुपया जोड़ा व नारियल 50 से 60 रुपया जोड़ा, डाभा नींबू 40 से 50 रुपये जोडा, सेब 80 से 100 रुपये किलो, केला 40 रुपये दर्जन, अनार 140 से 180 रुपये किलो, नासपाती 100 रुपये किलो, नारंगी 100 रुपये किलो की दर से खरीदारी की. मिट्टी से बना चूल्हा 50 रुपये से 100 रुपये तक में बिक्री हुई. आम की लकड़ी 200 से 300 रुपये बोझा की दर से बिक्री हुई. टोकरी छोटी 120 रुपया पीस, माध्यम टोकरी 250 रुपये, बड़ी टोकरी 300 रुपये प्रति पिस बिके.
श्रद्धालुओं ने छठ पूजा से पूर्व किया गंगा स्नान : छठ पूजा से पूर्व हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर गंगा पूजन किया. कार्तिक मास में गंगा स्नान का विशेष महत्व है. छठ पूजा को लेकर बाजार में काफी चहल-पहल देखने को मिली. फलों के दुकानों से पूरा बाजार पट गया है.
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