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Navratri 2021 LIVE: नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के बाद जरूर पढ़ें मां शैलपुत्री की ये कथा . . .

Updated at : 07 Oct 2021 3:31 PM (IST)
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Navratri 2021 LIVE:  नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के बाद जरूर पढ़ें मां शैलपुत्री की ये कथा . . .

Navratri 2021 Start and End Date in India: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्‍वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्रि की शुरुआत आज यानी गुरुवार 7 अक्टूबर 2021 को हो रही है. इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि एक साथ पड़ रही है, इसी वजह से शारदीय नवरात्र 8 दिनों तक ही होगा.

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3:31 PM. 7 Oct 213:31 PM. 7 Oct

मां ब्रह्मचारिणी का भोग

नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, माता को शक्कर से बनी चीजें काफी प्रिय हैं. शक्कर से कई तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं. आप माता को शक्कर से बनी खीर का भोग लगा सकते हैं. खीर एक बहुत ही स्वादिष्ट रेसिपी है. अगर आप नौ दिनों का व्रत कर रहे हैं तो आप व्रत वाली खीर बना के भोग में लगाएं. भोग के बाद आप भी इसे खा सकते हैं. साबूदाना खीर बनाने में ज्यादा झंझट नहीं है. इसे सिर्फ साबूदाना, दूध, चीनी, इलाइची और केसर से बनाया जाता है.

3:31 PM. 7 Oct 213:31 PM. 7 Oct

नवरात्रि के दूसरे दिन होगी मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

नवरात्र के दूसरे दिन मां को चीनी का भोग लगाएं और दान करें. इससे साधक को लंबी आयु की प्राप्ति होती है. योग शास्त्र के अनुसार यह शक्ति स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित है. इसलिए स्वाधिष्ठान चक्र में ध्यान करने से यह शक्ति प्रबल होती है और हर जगह सफलता और विजय प्राप्त होती है.

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मां शैलीपुत्री की पौराणिक कथा

देवी भागवत पुराण के अनुसार प्रजापति दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया. उसमें सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेजा लेकिन अपने ही जमाता भगवान शिव और पुत्री सती को नहीं बुलाया. देवी सती भगवान शिव के मना करने के बाद भी पिता के यज्ञ समारोह में चली गई. वहां पर अपने पति भगवान शिव के अपमान से नाराज हो कर,उन्होंने यज्ञ का विध्वंस कर दिया. यज्ञ में अपनी आहूति देकर आत्मदाह कर लिया था. इससे कुपित हो कर भगवान शिव ने दक्ष का वध कर, महासमाधि धारण कर ली. देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर में देवी पार्वती या माता शैलपुत्री के रूप में जन्म लिया. कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पुनः पति के रूप में प्राप्त किया.

3:31 PM. 7 Oct 213:31 PM. 7 Oct

नौ दिन लगाया जाता है भोग

नौ देवियों को 9 दिनों तक भोग लगाया जाता है. कहते हैं कि इस समय भक्त मां दुर्गा के लिए भोग बनाते हैं जिनसे वह प्रसन्न होती हैं और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. इस समय देवी मां के दर्शन करने से जीवन में सफलता मिलती है. सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस मौके पर कई लोग घर में कलश स्थापित करते हैं और व्रत रखते हैं.

8:48 AM. 7 Oct 218:48 AM. 7 Oct

व्रत का सामान

घर में पहले से ही व्रत का सामान रख लें. इसके लिए कट्टू का आटा, समारी के चावल, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, फल, मेवे, मखाना आदि मंगा लें.

8:48 AM. 7 Oct 218:48 AM. 7 Oct

सात्विक भोजन का करें प्रयोग

नवरात्रि के व्रत में पूरी तरह से सात्विक भोजन करें. खाने में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. इसके अलावा किसी के लिए भी बुरा नहीं बोलना चाहिए.

8:28 AM. 7 Oct 218:28 AM. 7 Oct

नवरात्रि में रंगों का है खास महत्व

नवरात्रि के 9 दिन दिन अलग रंग के कपड़े पहने जाते हैं. इस दौरान रंगों का खास महत्व होता है.

7:56 AM. 7 Oct 217:56 AM. 7 Oct

नवरात्रि में करें घर की साफ सफाई

मां दुर्गा के आगमन से पहले ही घर की साफ-सफाई कर लें. मान्यता है कि जिस घर में गंदगी होती है वहां माता की कृपा नहीं करसती. ऐसे में नवरात्रि में घर की साफ-सफाई करना बहुत जरूरी होता है. घर के पूजा स्थल को अच्छे से साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें. इसके बाद माता की पूजा करें और भोग लगाएं.

8:28 AM. 7 Oct 218:28 AM. 7 Oct

माता की चौकी का है विशेष महत्व

माता की चौकी की स्थापना करने से पहले वहां स्वास्तिक बना लें. इसके अलावा कलश स्थापान की पूजा सामग्री को भी एक जगह एकत्रित करके रख लें ताकि पूजा के समय किसी तरह की कोई परेशानी न हों.

7:56 AM. 7 Oct 217:56 AM. 7 Oct

नवरात्रि के दौरान मांस-मछली का सेवन न करें

नवरात्रि के दौरान मांस-मछली का सेवन न करें. नवरात्रि से पहले ही आप बाल, दाढ़ी कटवा लें. नवरात्रि में ये सभी चीजें करना अशुभ माना जाता है. इसके अलावा नाखून काटना भी वर्जित माना गया है.

6:53 AM. 7 Oct 216:53 AM. 7 Oct

मां शैलपुत्री को पसंद है सफेद रंग

कहते हैं मां शैलपुत्री को सफेद रंग अधिक प्रिय होता है, इसलिए उन्हें सफेद रंग की बर्फी का भोग लगाए. साथ ही पूजा में सफेद रंग के फूल अर्पित करें. इतना ही नहीं, पूजा करते समय सफेद वस्त्र भी धारण कर सकते हैं. इसके बाद भोग लगे फल और मिठाई को पूजा के बाद प्रसाद के रूप में लोगों को बांट दें. जीवन में आ रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए एक पान के पत्ते पर लौंग, सुपारी और मिश्री रखकर अर्पित करने से परेशानियों से निजात मिलती है.

6:53 AM. 7 Oct 216:53 AM. 7 Oct

नवरात्रि घटस्थापना पूजा सामग्री-

चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन कलश

सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज)

पवित्र स्थान की मिट्टी

गंगाजल

कलावा/मौली

आम या अशोक के पत्ते

छिलके/जटा वाला

नारियल

सुपारी अक्षत (कच्चा साबुत चावल), पुष्प और पुष्पमाला

लाल कपड़ा

मिठाई

सिंदूर

दूर्वा

8:28 AM. 7 Oct 218:28 AM. 7 Oct

जानिए किस दिन कौन-सा शुभ योग बनेगा

  • 7 अक्टूबर– घट स्थापना, मां शैलपुत्री पूजन, अग्रसेन जयंती, चंद्रदर्शन

  • 8 अक्टूबर- मां ब्रह्मचारिणी पूजन, रवियोग सायं 7.01 से, वक्री बुध हस्त में

  • 9 अक्टूबर- मां चंद्रघंटा और मां कुष्मांडा पूजन, विनायक चतुर्थी, रवियोग सायं 4.48 तक

  • 10 अक्टूबर- स्कंदमाता पूजन, ललिता पंचमी, सूर्य चित्रा में, रवियोग सायं 6.46 से

  • 11 अक्टूबर- मां कात्यायनी पूजन, मंगल चित्रा में, शनि मार्गी

  • 12 अक्टूबर- मां कालरात्रि पूजन, रवियोग प्रात: 11.26 तक

  • 13 अक्टूबर- दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजन

  • 14 अक्टूबर- महानवमी, मां सिद्धिदात्री पूजन, नवरात्र उत्थापन

6:53 AM. 7 Oct 216:53 AM. 7 Oct

करें ये उपाय

मां शैलपुत्री (Goddess Shailputri) को गाय के शुद्ध घी का भोग लगाएं और इसी का दान भी करें. ऐसा करने से रोगी का ना सिर्फ कष्टों से मुक्ति मिलती है बल्कि उसका शरीर निरोगी रहता है.

6:53 AM. 7 Oct 216:53 AM. 7 Oct

मां शैलपुत्री पूजा विधि (Maa Shailputri Puja Vidhi)

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा की पूजा की जाती है और व्रत का संकल्प लेते हैं. इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. उन्हें लाल सिंदूर, अक्षत, धूप आदि चढ़ाएं. इसके बाद माता के मंत्रों का उच्चारण किया जाता है. दुर्गा चालीसा का पाठ करें और इसके बाद घी का दीपक और कपूर जलाकर आरती करें.

6:53 AM. 7 Oct 216:53 AM. 7 Oct

आज करें मां शैलपुत्री की पूजा

आज से यानी 7 अक्टूबर, 2021 से नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो रही है. नवरात्रि का पर्व 9 दिनों तक बड़े ही धूम- धाम से मनाय जाता है. नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा- अर्चना की जाती है. मां शैलपुत्री सौभाग्य की देवी हैं. उनकी पूजा से सभी सुख प्राप्त होते हैं. पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा.

6:22 AM. 7 Oct 216:22 AM. 7 Oct

नवरात्रि 2021 कलश स्थापना विधि

प्रातः स्नान करके शुभ साफ़ मिट्टी के द्वारा वेदी निर्माण कर सप्तधान (जौ) छींटकर जल से भरे हुए कलश में रक्षासूत्र (कलावा) बांधकर वैदिक मन्त्रों के द्वारा कलश स्थापन करना चाहिए. इसके बाद कलश में नारा, रोली, अक्षत्, पुष्प, सुपारी, पान एवं दक्षिणा डालकर पंचपल्लव रखकर उस पर पूर्णपात्र स्थापित कर जटादार जल भरे हुए नारियल को उस पर रखना चाहिए. फिर नवरात्रि के लिए नौदुर्गा का आवाहन एवं स्थापन करना चाहिए.

6:08 AM. 7 Oct 216:08 AM. 7 Oct

नवरात्रि की कथा…

महिषासुर नामक राक्षस ने भगवान ब्रह्मा से वरदान मांगा था कि देव, दानव या फिर धरती पर रहने वाला कोई भी मनुष्य उसका वध ना कर सके. ब्रह्मा जी का आशीर्वाद पाने के बाद राक्षस ने तीनों लोगों में उत्पात मचाना शुरू कर दिया. जिसके बाद महिषासुर के आतंक से त्रस्त आकर देवताओं ने देवी दुर्गा का आवाहन किया. 9 दिनों तक मां दुर्गा और महिषासुर के बीच भीषण युद्ध चला था. दसवें दिन मां दुर्गा ने भयानक राक्षस महिषासुर का वध कर दिया.

6:08 AM. 7 Oct 216:08 AM. 7 Oct

Navratri 2021: कब होगा पारण

नवरात्र के इन व्रत का पारण दशमी तिथ‍ि को होगा. ये 15 अक्टूबर को होगा. इसी द‍िन दशहरा यानी व‍िजयदशमी का पर्व भी मनाया जाएगा.

6:08 AM. 7 Oct 216:08 AM. 7 Oct

 Navratri 2021: पूजा की सामग्री

मिट्टी का कटोरा, जौ, साफ मिट्टी, कलश, रक्षा सूत्र, लौंग, इलाइची, रोली, कपूर, आम के पत्ते, पान के पत्ते , साबूत सुपारी, अक्षत, नारियल, फूल, फल, धूप, दीप, माला (तस्वीर पर चढ़ाने के लिए), लाल चुन्नी, गंगाजल

6:08 AM. 7 Oct 216:08 AM. 7 Oct

Navratri 2021: कलश स्थापना का मुहूर्त

दिन: 7 अक्टूबर दिन गुरुवार

समय: 6:17 मिनट से 7: 7 मिनट तक

6:08 AM. 7 Oct 216:08 AM. 7 Oct

Navratri 2021: मां के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि के दिन सुबह उठकर नित्य कर्म से निवृत्त होकर साफ कपड़े पहन लें. फिर पूरे घर में गंगा जल का छिड़काव करें। कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा शुरू करें और व्रत रखने का संकल्प लें. इसके बाद देवी दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा करें. माता शैलपुत्री को लाल फूल, सिंदुर, अक्षत और धूप आदि चढ़ाएं। इसके बाद शैलपुत्री देवी के मंत्रों का उच्चारण करें.

5:42 AM. 7 Oct 215:42 AM. 7 Oct

पहले द‍ि‍न शैलपुत्री पूजन

नवरात्र के पहले द‍िन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इसका अर्थ है शैल यानी पर्वत की पुत्री। इनको हेमाव‍ती, सती भवानी और पार्वती के नाम से भी जाना जाता है।

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

नवरात्रि की महिषासुर वध की कथा

नवरात्र के अंतिम द‍िन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध क‍िया था. माना जाता है क‍ि उसके वध के ल‍िए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने तेज प्रकाश से मां दुर्गा को जन्म दिया था.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

शनि की दृष्टि (Shani Ki Drishti)

मिथुन, तुला, धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की दृष्टि है. मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया. धनु, मकर और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती चल रही है. इसलिए इन रशियों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है. शनि को शांत रखने के लिए शनि चालीसा और शनि मंत्रों का जाप करना चाहिए. शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करने से भी शांत होते हैं.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

नवरात्रि में शनि बदलेंगे चाल (Navratri 2021)

नवरात्रि का पर्व 7 अक्टूबर 2021 से आरंभ हो रहा है. नवरात्रि का पर्व 15 अक्टूबर 2021 तक मनाया जाएगा. 11 अक्टूबर 2021 को शनि मार्गी हो रहे हैं. इस दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी. मां कात्यायनी की पूजा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने वाली मानी गई है. इस शनि देव के साथ मां कात्यायनी की पूजा करने से जीवन में आ रही है दिक्कतों को दूर करने में सफलता प्राप्त होती है.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

लकड़ी से बने आसन पर करें माता के मूर्ति की स्थापना

माता के मूर्तियों को लकड़ी से बने आसन पर ही स्थापित करना शुभ माना जाता है. मूर्ति स्थापना वाले स्थान पर पहले स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं, तब जाकर मूर्ति की स्थापना करें.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

मुख्य द्वार पर बनाएं स्वस्तिक

नवरात्रि के दिन घर में माता का आगमन होता है. इसे शुभ बनाने के लिए घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण सजाएं. तत्पश्चात, हल्दी और चावल के मिश्रण से बने लेप से द्वार पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी माता के पैरों के निशान बनाना बेहद शुभ होता है. इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न रहतीं हैं.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

नवरात्रि में माता की सवारी

नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी को विशेष माना गया है. माता की सवारी दिन के अनुसार निर्धारित होती है. इस वर्ष शरद नवरात्रि का पर्व गुरुवार को आरंभ हो रहा है. माता की सवारी का वर्णन देवीभागवत पुराण में मिलता है. देवीभागवत पुराण के इस श्लोक में दुर्गा जी की सवारी के बारे में बताया गया है-

शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे।

गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

9 दिन लगेगा अलग भोग

07 अक्टूबर 2020 से मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा प्रारंभ हो जाएगी. इस दौरान मां को प्रसन्न करने के लिए भक्तगण उन्हें हर दिन अलग प्रसाद चढ़ाते हैं.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

अभिजीत मुहूर्त में भी कर सकते हैं कलश स्थापित

जो लोग इस मुहूर्त में कलश की स्थापना किसी कारणवश नहीं कर सकते हैं. वे अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापित कर सकते हैं. 7 अक्टूबर दिन गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 38 मिनट के बीच है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, चित्रा वैधृति योग का निषेध होने से कल 7 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करना विशेष फलदायी होगा.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

शारदीय नवरात्रि 2021 में कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

हिंदी पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि में घट स्थापना के दिन चित्रा नक्षत्र, दिन गुरुवार के साथ-साथ विष कुम्भ जैसे शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. इसके अलावा इस दिन कन्या राशि में चर्तुग्रही योग का निर्माण भी हो रहा है. जो कि घट स्थापना के लिए उत्तम होता है. नवरात्रि में घट स्थापना के लिए 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक शुभ मुहूर्त है.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

दशहरा 2021: तिथि और समय

  • विजय मुहूर्त- 14:01 से 14:47

  • अपर्णा पूजा का समय- 13:15 से 15:33

  • दशमी तिथि शुरू- 14 अक्टूबर 18:52

  • दशमी तिथि समाप्त- 15 अक्टूबर 18:02

  • श्रवण नक्षत्र प्रारंभ- 14 अक्टूबर 09:36

  • श्रवण नक्षत्र समाप्त- 15 अक्टूबर 09:16

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

कन्या पूजन का होता है विशेष महत्व

नवरात्रि में कन्या पूजन कराने का विशेष महत्व होता है. जो लोग नौ दिनों के लिए व्रत रखते हैं या दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखते हैं वे कन्या पूजन करते है. कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं. कन्या पूजन के दिन जातक नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूप मानकर पूजा करते हैं.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

नवरात्रि पर बन रहे हैं विशेष योग

इस बार नवरात्रि गुरुवार से प्रारंभ हो रही है. पूजा के पहले दिन कई सारे शुभ संयोग बन रहे है. नवरात्रि में पांच रवियोग के साथ सौभाग्य योग्य और वैधृत योग बन रहा है. नवरात्रि की शुरुआत चित्रा नक्षत्र में हो रही है जो सुख और सौभाग्य का प्रतीक है. ज्योतिषों के अनुसार कोई जातक नवरात्रि के शुभ मुहूर्त में किसी कार्य को शुरू करने पर सफतला जरूर मिलेगी. इसके अलावा इस दौरान घर, प्रॉपटी और अन्य चीजों को खरीदना बहुत शुभ माना गया है.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

दुर्गा चालीसा और सप्तशती पाठ

नवरात्रि में मां दुर्गा के पूजन में नौ दिनों दुर्गा सप्तशती पाठ करने, दुर्गा चालीसा पढ़ने और मां दुर्गा के मंत्रों की पुस्तक भी जरूरी होती है.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

मां दुर्गा के वस्त्र, लाल चुनरी

मां दुर्गा को चढ़ाने के लिए वस्त्र और लाल चुनरी जरूर खरीदें. दुर्गा मां के वस्त्र लाल रंग के ही खरीदने चाहिए. इसके साथ ही श्रृगांर का सामान लाल रंग की चूड़िया और बिंदी भी दुर्गा मां को चढ़ाई जाती है.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

Navratri 2021: ऐसे करें पूजा

वरात्र का पर्व आरंभ करने के लिए मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं मिलाकर बोएं. उस पर विधि पूर्वक कलश स्थापित करें. कलश पर देवीजी मूर्ति (धातु या मिट्टी) अथवा चित्रपट स्थापित करें. नित्यकर्म समाप्त कर पूजा सामग्री एकत्रित कर पवित्र आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठें और आचमन, प्राणायाम, आसन शुद्धि करके शांति मंत्र का पाठ कर संकल्प करें. रक्षा दीपक जला लें. सर्वप्रथम क्रमश: गणेश-अंबिका, कलश (वरुण), मातृका पूजन, नवग्रहों का पूजन करें. इसके बाद माता का श्रद्धा भाव से पूजन करें.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

Navratri 2021: इस विधि से करें संध्या आरती

दीपक, धूप और अगरबत्ती जलाकर दुर्गा स्तुति, दुर्गा चालीसा, दुर्गा स्तोत्र और दुर्गा मंत्र पढें. फिर माता की आरती करें. आरती करने के बाद देवी दुर्गा को फल-मिठाई का भोग लगाएं.

3:02 PM. 6 Oct 213:02 PM. 6 Oct

Shardiya Navratri 2021: शुभ समय

उत्सव की शुरुआत कलश स्थापना से होती है, जिसे घटस्थापना के नाम से भी जाना जाता है और नौ दिनों तक एक दिन का उपवास रखने का संकल्प लिया जाता है.

कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त

  • दोपहर 3:33 से शाम 5:05 बजे तक

पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

  • सुबह 9:33 से 11:31 बजे तक

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

Navratri 2021: नवरात्रि में माता रानी की पूजा में लगने वाली पूजन सामग्री

शारदीय नवरात्रि में माता रानी की पूजा के लिए- मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो, दुर्गा चालीसा व आरती की किताब, दीपक, घी/ तेल, फूल, फूलों का हार, पान, सुपारी, लाल झंडा, इलायची, बताशे या मिसरी, असली कपूर, उपले, फल व मिठाई, कलावा, मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी, जौ, वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सिंदूर, केसर, कपूर, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, सुगंधित तेल, चौकी, आम के पत्ते, नारियल, दूर्वा, आसन, पांच मेवा, कमल गट्टा, लोबान, गुग्गुल, लौंग, हवन कुंड, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, दीपबत्ती, नैवेद्य, शहद, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, लाल रंग की गोटेदार रेशमी चुनरी, लाल चूड़ियां, माचिस, कलश, साफ चावल, कुमकुम,मौली, श्रृंगार का सामान आदि की जरूरत होती है.

6:09 PM. 6 Oct 216:09 PM. 6 Oct

Navratri 2021: घोड़े पर हो रहा मां का आगमन, हाथी पर प्रस्थान

इस बार माता का आगमन घोड़े पर हो रहा है, जो सामान्य फलदायक है, लेकिन दशमी शुक्रवार को होने से माता का प्रस्थान हाथी पर हो रहा है, जो शुभ फलदायक होगा. इससे समस्त व्यक्तियों में नई स्फूर्ति, नव चेतना का संचार होगा. साथ ही सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी.

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