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EXCLUSIVE : 'हाथी उन्नी' के शेड्यूल के अनुसार हम सभी एक्टर्स को अपने डेट्स मैनेज करने पड़े -राणा दग्गुबती

Updated at : 16 Mar 2021 1:30 PM (IST)
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EXCLUSIVE : 'हाथी उन्नी' के शेड्यूल के अनुसार हम सभी एक्टर्स को अपने डेट्स मैनेज करने पड़े -राणा दग्गुबती

Rana Daggubati Interview : बाहुबली,गाजी अटैक,बेबी जैसी फिल्मों से हिंदी भाषी दर्शकों के बीच लोकप्रिय चेहरा बन चुके अभिनेता राणा दग्गुबती की फ़िल्म हाथी मेरे साथी जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी. यह फ़िल्म तमिल तेलगु के साथ साथ हिंदी भाषा में भी रिलीज हो रही है. राणा कहते हैं कि पॉलिटिक्स की सीमा होती है आर्ट की नहीं. हाथी मेरे साथी की बात करूं तो मैं हैदराबाद से हूं पुलकित सम्राट मुम्बई से निर्देशक प्रभु सर चेन्नई से. जब हम जंगल शूटिंग के लिए पहुंचे तो जंगल हम तीनों के लिए एक जैसा था. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत...

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Rana Daggubati Interview : बाहुबली,गाजी अटैक,बेबी जैसी फिल्मों से हिंदी भाषी दर्शकों के बीच लोकप्रिय चेहरा बन चुके अभिनेता राणा दग्गुबती की फ़िल्म हाथी मेरे साथी जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी. यह फ़िल्म तमिल तेलगु के साथ साथ हिंदी भाषा में भी रिलीज हो रही है. राणा कहते हैं कि पॉलिटिक्स की सीमा होती है आर्ट की नहीं. हाथी मेरे साथी की बात करूं तो मैं हैदराबाद से हूं पुलकित सम्राट मुम्बई से निर्देशक प्रभु सर चेन्नई से. जब हम जंगल शूटिंग के लिए पहुंचे तो जंगल हम तीनों के लिए एक जैसा था. उर्मिला कोरी से हुई बातचीत…

फ़िल्म काफी समय से बनकर तैयारी थी अब रिलीज होने वाली है क्या ये सही समय है?

मुझे लगता है कि यह एकदम सही समय हैफ़िल्म की रिलीज का. कोरोना की महामारी से लोगों को समझ आ गया है कि प्रकृति में शक्ति कितनी है और प्रकृति को बचाकर रखना हमारी कितनी बड़ी जरूरत है.

एक एक्टर के तौर पर इस फ़िल्म ने आपको क्या खास करने का मौका दिया?

बहुत कुछ नया करने का मौका इस फ़िल्म ने मुझे दिया , जो भी कुछ मैंने सीखा था एक्टर के तौर पर इस फ़िल्म के लिए मुझे सबकुछ भूलना पड़ा. इस फ़िल्म के निर्देशक प्रभु सोलोमन सर बहुत ही ऑर्गेनिक निर्देशक हैं. इस फ़िल्म की शुरुआती शूटिंग के 20 दिन मेरे साथ सिर्फ और सिर्फ हाथी थे. जिस जंगल में हम शूट कर रहे थे. वहां दूर दूर तक नेटवर्क नहीं आता था तो मोबाइल फ़ोन हमारे हाथ से खुद ब खुद दूर हो गया तो पूरी तरह से प्रकृति के बीच में शूटिंग बहुत ही अलग और खास अनुभव था.

इस फ़िल्म के अहम किरदारों में हाथी उन्नी का किरदार है एक जानवर के साथ शूटिंग में क्या चुनौतियां थी?

उन्नी बहुत ही प्रोफेशनल है, वो कई फिल्मों में काम कर चुका है. उसका शूटिंग शेड्यूल हमसे भी ज़्यादा पैक्ड था और भी दूसरी फिल्मों में उसके सीन्स थे. जिस वजह से हमें अपने डेट्स उन्नी के मुताबिक देने पड़ते थे. वैसे ये सवाल मेरे लिए नहीं मेरे को एक्टर पुलकित सम्राट से पूछा जाना चाहिए था. मैंने तो हाथियों के साथ शूटिंग से पहले 10 दिन बिताया था लेकिन पुलकित को एक दिन बाद ही हाथी की पीठ पर खड़ा होना था लेकिन पुलकित ने कर दिखाया. पहले दिन अपने टच से वह हाथियों के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाने की कोशिश की. फिर तो एक दो दिन में इतनी दोस्ती हो गयी कि वो एक हाथ से खुद खाना खाता दूसरे से उसे केला खिलाता था. हाथी हमारे लिए कमाल के कोस्टार साबित हुए उनसे हमने बहुत कुछ सीखा.

पर्यावरण के निजी तौर पर आप कितने हितैषी हैं?

मुझे लगता है कि पिछले पांच सालों में हम सभी पर्यावरण को लेकर इतने जागरूक हो गए हैं. बिजली बचाना, सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करना. प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करना. ये सब हम कर रहे हैं. मैं भी अपने आफिस,घर और फ़िल्म के सेट पर यह करने की कोशिश करता हूं.

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इस फ़िल्म के लिए आपने तीस किलो वजन कम किया?

हाँ,बाहुबली की शूटिंग खत्म हुई थी और प्रभु सर ने मुझे इस फ़िल्म के लिए अप्रोच किया. उस वक़्त तो मैं और भीमकाय शरीर में था. प्रभु सर ने कहा कि जंगल के लोग ऐसे नहीं होते हैं तुम्हे अपना वजन कम करना होगा. जिसके बाद मेरी तैयारी शुरू हुई. छह से सात महीने गए. वजन घटाया,दाढ़ी,बाल बढ़ाए. शूट से पहले फाइनल लुक टेस्ट थाईलैंड में हुआ था. उसके बाद हमारी शूटिंग शुरू हुई.

साउथ की फिल्में अब हिंदी भाषा में भी लगातार रिलीज हो रही हैं इस ट्रेंड को किस तरह देखते हैं?

इस बात को बहुत अच्छा मानता हूं. हम सभी लोग राज्यों में बंटे हुए हैं लेकिन हमारी फिल्में हमें जोड़ रही हैं. अच्छी फिल्मों को देखने के लिए पूरा भारत एक साथ आ रहा है. इसे ट्रेंड नहीं मैं फ़िल्ममेकर्स के लिए ताकत कहूंगा कि वो कहीं से भी पूरे भारत के लिए फ़िल्में बना सकते हैं. केरल,मदुरई में बनी फिल्म को पंजाब,यूपी और बिहार का आदमी देखेगा. यही तो सिनेमा की ताकत है.

हिंदी फिल्मों के दर्शक अभी भी थिएटर में नहीं जा रहे हैं क्या ये बातें आपलोग को परेशान कर रही हैं?

तेलुगु,तमिल फिल्मों के दर्शक थिएटर जाने लगे हैं. मुझे लगता है कि अब हिंदी फिल्मों के दर्शक भी रुख करेंगे ही. हाथी मेरे साथी एक सिनेमैटिक अनुभव को जीने वाली फिल्म है. फ़िल्म को देखते हुए आपको लगेगा कि आप जंगल में ही है.आखिरकार थिएटर का यही जादू भी होता है. जिसे महसूस करने लोग थिएटर में जाते हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि साउथ की तरह हिंदी फिल्मों के दर्शक भी थिएटर जाना शुरू करेंगे और हाथी मेरे साथी पहली फ़िल्म होगी.

ओटीटी के बढ़ती धूम ने ये चर्चा शुरू कर दी है कि सिनेमाघरों का अस्तित्व आनेवाले वक़्त में अधर में है?

मैं एक्टर से पहले सिनेमा लवर हूं. मैं थिएटर में फिल्में एक्सपीरियंस के लिए जाता हूं. बाहुबली जैसी फिल्मों के अनुभव को आप मोबाइल या टीवी पर नहीं महसूस कर पाएंगे वो थिएटर में ही आप फील कर पाएंगे. हाथी मेरे साथी के लिए रेन फॉरेस्ट क्रिएट किया गया है.

शादी के बाद ज़िन्दगी कितनी बदल गयी है?

शादी तब करनी चाहिए जब आप इसके लिए तैयार हो. मैंने सिंगल लाइफ बहुत एन्जॉय कर ली थी. मैं सेटल होना चाहता था और सही लाइफ पार्टनर भी मिल गयी तो शादी कर ली. शादी के बाद सबसे बड़ा जो बदलाव आया है वो ये कि मैं बहुत ही ऑर्गनाइज़्ड हो गया हूं.

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कोरी

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By कोरी

कोरी is a contributor at Prabhat Khabar.

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