ePaper

Dhanteras 2023: धनतेरस कब है? यहां जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त-पूजा विधि और इस दिन का महत्व

Updated at : 01 Nov 2023 1:08 PM (IST)
विज्ञापन
Dhanteras 2023: धनतेरस कब है? यहां जानें सही डेट, शुभ मुहूर्त-पूजा विधि और इस दिन का महत्व

हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व है. धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस पर्व को धन त्रयोदशी या धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है. धनतेरस के दिन से ही दिवाली की शुरुआत हो जाती है. धनतेरस के दिन कुबेर देव और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है

विज्ञापन
undefined
Dhanteras 2023 Date: धनतेरस का महत्व

Dhanteras 2023 Date: धनतेरस के पर्व से ही दीपावली की शुरुआत हो जाती है, इस बार धनतेरस का पर्व 10 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन प्रदोष काल में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है. धनतेरस का पर्व भगवान धनवंतरी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब इसी दिन भगवान धन्वंतरी अपने हाथों में अमृत कलश लेकर समुंद्र मंथन सहित प्रकट हुए थे.

undefined
कब से शुरू होगी त्रयोदशी तिथि

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ 10 नवंबर दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर होगा. वहीं, अगले दिन 11 नवंबर दिन शनिवार को दोपहर 1 बजकर 56 मिनट पर तिथि का समापन होगा. धनतेरस के दिन कुबेर देव और मां लक्ष्मी की पूजा प्रदोष काल में की जाती है. इस इन प्रदोष काल 10 नवंबर की शाम 5 बजकर 29 मिनट से रात 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा.

undefined
धनतेरस 2023 शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का समय 10 नवंबर की शाम 5 बजकर 46 मिनट से शाम 7 बजकर 43 मिनट है, इस अवधि में धनतेरस की पूजा करना श्रेष्ठ रहेगा. पूजा मुहूर्त में आप चाहें तो घर में लक्ष्मी जी, गणेश जी और कुबेर आदि यंत्र की स्थोना भी कर सकते हैं.

undefined
धनतेरस के दिन किसकी पूजा करना चाहिए

धनतेरस के दिन घर की सफाई कर सुबह स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र पहन लें. इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश का आवाहन और पूजन करें. फिर षोडशोपचार विधि से धनवंतरी देव की पूजा करें. इनके साथ-साथ मां लक्षमी की पूजा करें.

undefined
धनतेरस की पूजा विधि

धनतेरस के दिन धन्वंतरि और धन की देवी लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है. इस दिन स्वास्थ्य, समृद्धि और कल्याण की कामना की जाती है. माना जाता है कि देवी लक्ष्मी की पूजा करने और धनतेरस या धनत्रयोदशी पर नई चीजें लाने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इसी दिन से पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो जाती है.

undefined

धनतेरस के बाद नरक चौदस, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजन और भाईदूज के साथ महापर्व का समापन होता है. माना जाता है कि इस दिन दक्षिण दिशा में एक बड़ा दीपक जलाकर रखने से जीवन से अकाल मृत्यु का योग टल जाता है.

विज्ञापन
Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola