नीरज चोपड़ा ब्रिटेन के लोबोरो यूनिवर्सिटी में करेंगे 63 दिनों की ट्रेनिंग, खेल मंत्रालय ने दी मंजूरी
Published by : AmleshNandan Sinha Updated At : 19 Nov 2022 8:25 PM
नीरज चोपड़ा को ब्रिटेन के लोबोरा यूनिवर्सिटी में जेवलीन का ट्रेनिंग लेंगे. खेल मंत्रालय ने उनके करीब दो महीनें की ट्रेनिंग को मंजूरी दे दी है. नीरज के साथ उनके कोच क्लॉस बार्टोनिट्ज और फिजियोथेरेपिस्ट ईशान मारवाहा भी ब्रिटेन जायेंगे.

खेल मंत्रालय ने ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के ब्रिटेन के लोबोरो विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज, कोच क्लॉस बार्टोनिट्ज और फिजियोथेरेपिस्ट ईशान मारवाहा के साथ 63 दिनों के लिए लोबोरो में प्रशिक्षण लेंगे.

नीरज के अलावा, सरकार की मिशन ओलंपिक सेल (एमओसी) ने शुक्रवार को अपनी 86वीं बैठक में बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत, पहलवान दीपक पूनिया, भाला फेंक और राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता अन्नू रानी के प्रस्तावों को भी मंजूरी दे दी.

इन सभी एथलीटों के प्रशिक्षण की अनुमानित लागत लगभग 94 लाख रुपये होगी, जिसे खेल मंत्रालय के राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) के तहत मंजूरी दी जायेगी. श्रीकांत ने अपने कोच और फिजियोथेरेपिस्ट के साथ जकार्ता के प्रिज्मा स्पोर्ट्स क्लब में 29 दिनों तक अभ्यास करेंगे.

दीपक 34 दिनों के लिए मिशिगन में अपने फिजियोथेरेपिस्ट के साथ रहेंगे, जबकि अनु रानी अपने फिजियोथेरेपिस्ट के साथ जर्मनी के लीचथलेटिक-जेमिनशाफ्ट (एलजी) ऑफेनबर्ग में कोच वर्नर डेनियल के नेतृत्व में प्रशिक्षण लेंगी.

डेनियल ने पहले नीरज को भी प्रशिक्षण दिया था. इनके लिए कोष भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) की टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) के तहत प्रदान किया जायेगा और इसमें खिलाड़ी और उनके सहयोगी स्टाफ की उड़ान, आवास, स्थानीय यात्रा और अन्य खर्चों जैसे की भोजन की लागत शामिल होगी.

इस दौरान टॉप्स हर खिलाड़ी को अपने प्रवास के दौरान किसी भी अन्य खर्च के लिए प्रति दिन 50 अमेरिकी डॉलर का ‘आउट-ऑफ-पॉकेट’ भत्ता (जेब खर्च) भी प्रदान करेगा. नीरज चोपड़ा टोक्यो ओलिंपिक 2020 में पहली बार चमके थे. तब उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था.
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अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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