Narada Sting-CBI Case: फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी को जमानत पर 5 जजों की बेंच आज करेगी सुनवाई

तृणमूल के तीन बड़े नेताओं और शोभन चटर्जी की गिरफ्तारी से बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया था.
कोलकाता: कलकत्ता हाइकोर्ट की पांच जजों की बेंच गुरुवार (27 मई) को नारद स्टिंग केस से जुड़ी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और बंगाल के दो मंत्रियों समेत चार बड़े नेताओं के मामले की सुनवाई करेगी. सुनवाई 2 बजे शुरू होगी. इसके पहले कोर्ट ने कहा था कि मामले की सुनवाई दिन में 11 बजे करेगी, लेकिन बाद में इसका समय बदल दिया गया.
सीबीआई ने ममता बनर्जी की कैबिनेट के दो सीनियर मंत्रियों, तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक और इसी पार्टी के एक पूर्व नेता और कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर को गिरफ्तार किया है. नारद स्टिंग मामले में कुछ नेताओं द्वारा कथित तौर पर धन लिये जाने के मामले का खुलासा हुआ था.
केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले के संबंध में तृणमूल कांग्रेस के नेता फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी और मदन मित्रा के साथ शोभन चटर्जी को कोलकाता में सोमवार सुबह गिरफ्तार किया. फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी वर्ष 2014 में मंत्री थे. इसी दौरान यह अपराध हुआ था.
तृणमूल के तीन बड़े नेताओं और शोभन चटर्जी की गिरफ्तारी से बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया था. मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सीबीआई कार्यालय में 6 घंटे तक धरना दिया और इस दौरान टीएमसी के हजारों कार्यकर्ताओं ने निजाम पैलेस के बाहर और राजभवन समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किया.
जिस वक्त ममता बनर्जी सीबीआई कार्यालय में धरना दे रहीं थीं, उसी वक्त तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय बलों पर हमले किये. पत्थर और बोतलें निजाम पैलेस में फेंकी. इस दौरान कोलकाता पुलिस के जवान निजाम पैलेस के बाहर खड़े थे, लेकिन उन्होंने हमलावरों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया.
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बहरहाल, जिस दिन केंद्रीय जांच एजेंसी ने फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी को गिरफ्तार किया, बैंकशाल कोर्ट स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सभी को जमानत दे दी. लेकिन, उसी दिन सीबीआई हाइकोर्ट पहुंच गयी और कलकत्ता हाइकोर्ट ने सभी की जमानत पर रोक लगा दी.
हाइकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ चारों नेताओं ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी. चीफ जस्टिस की अगुवाई ली दो जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की. अदालत ने अपने पूर्व के आदेश को संशोधित किया, जिसके तहत सीबीआई अदालत द्वारा चारों नेताओं को दी गयी जमानत पर रोक लगायी गयी थी.
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अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों मंत्री ऑनलाइन उन्हें भेजी गयी आधिकारिक फाइलों का निबटारा और वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बैठकें कर सकते हैं. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पीठ में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा नेताओं को दी गयी जमानत पर रोक लगाने को लेकर मतभेद था. इसके बाद पीठ ने मामले को वृहद पीठ के पास भेजने का फैसला किया.
दो जजों की पीठ ने 17 मई के अपने पूर्व के आदेश को संशोधित करते हुए 21 मई को निर्देश दिया कि आरोपियों की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए जेल में हिरासत की बजाय सभी आरोपियों को उनके घरों पर ही नजरबंद रखा जा सकता है. सभी नेता इस वक्त अपने-अपने घर में नजरबंद हैं.
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सीबीआई ने फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और शोभन चटर्जी के अभियोजन की मंजूरी के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से संपर्क किया था. श्री धनखड़ ने 7 मई को सभी चारों नेताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी, जिसके बाद सीबीआई ने अपने आरोप पत्र को अंतिम रूप दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
हकीम, मुखर्जी और मित्रा हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में विधायक चुने गये हैं, जबकि चटर्जी ने भाजपा में शामिल होने के लिए तृणमूल को छोड़ा और उनके दोनों पार्टियों से संबंध हैं. नारद टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने वर्ष 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था, जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर धन लेते नजर आये थे.
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि फिरहाद हकीम ने स्टिंग ऑपरेटर से पांच लाख रुपये रिश्वत लेने की बात स्वीकारी, जबकि मदन मित्रा और सुब्रत मुखर्जी को कैमरे पर पांच-पांच लाख रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया. चटर्जी को स्टिंग ऑपरेटर से चार लाख रुपये लेते हुए देखा गया.
यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में मार्च 2017 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था.
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Posted By: Mithilesh Jha
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