Mysterious Fort in India: 200 साल पुराने इस किले पर हर साल गिरती है बिजली, जानें रांची के इस किला का रहस्य

Published by : Shaurya Punj Updated At : 11 Sep 2023 7:30 AM

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Mysterious Fort in India: झारखंड के रांची-पतरातू मार्ग के पिठौरिया गांव स्थित एक प्राचीन किला है. इसे राजा जगतपाल सिंह का किला कहा जाता है. यह आकाशीय बिजली गिरने से लगातार तबाह होता जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पीछे एक 'श्राप' है.

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  • राजा जगतपाल सिंह का किला आकाशीय बिजली गिरने से लगातार तबाह होता जा रहा है

  • स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पीछे एक ‘श्राप’ है.

Mysterious Fort in India: भारत में आज भी कई ऐसे किले मौजूद हैं, जिनके रहस्य से आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है. ऐसा ही एक किला झारखंड की राजधानी रांची से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. झारखंड के रांची-पतरातू मार्ग के पिठौरिया गांव स्थित एक प्राचीन किला है. इसे राजा जगतपाल सिंह का किला कहा जाता है. यह आकाशीय बिजली गिरने से लगातार तबाह होता जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके पीछे एक ‘श्राप’ है.

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खंडहर में तब्दील हो गया है किला

किसी जमाने में ये किला 100 कमरों वाला एक विशाल महल हुआ करता था, लेकिन हर साल बिजली गिरने के कारण ये किला अब पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है. गांव वालों के मुताबिक, इस किले पर हर साल बिजली एक क्रांतिकारी द्वारा राजा जगतपाल सिंह को दिए गए श्राप के कारण गिरती है. वैसे तो आसमानी बिजली का गिरना एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन एक ही जगह पर सालों से बिजली का गिरना लोगों को जरूर सोचने पर मजबूर कर देता है.

जानें किले का इतिहास

साल 1857 का विद्रोह अपने चरम पर पहुंच रहा था. राजा जगतपाल सिंह ने, अपने झुकाव के प्रति सच्चे रहते हुए, ब्रिटिश सैनिकों का समर्थन किया और ठाकुर विश्वनाथ सहदेव के नेतृत्व में लड़ रहे विद्रोहियों पर काबू पाने में मदद की. विद्रोही नेता को पकड़ लिया गया और उसे मृत्यु तक फांसी की सजा दी गई. फांसी पर चढ़ने से पहले, ठाकुर विश्वनाथ सहदेव ने राजा जगतपाल सिंह को श्राप दिया कि यह उनके राज्य का अंत होगा, और उनके प्रिय किले पर बिजली तब तक गिरेगी जब तक कि वह धूल में न बदल जाए.

इसे संयोग कहें या श्राप का प्रभाव, हर साल खासकर मानसून के मौसम में पिठोरिया किले पर बिजली गिरती है. हर हमले के साथ किले के कुछ हिस्से स्थायी रूप से नष्ट हो जाते हैं.

जानें क्या कहते हैं स्थानीय लोग

जबकि स्थानीय लोगों का मानना है कि यह श्राप का परिणाम है, शोधकर्ताओं का मानना है कि श्राप से अधिक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह किला बाकियों की तुलना में बहुत अधिक ऊंचाई पर बना है, और यह तथ्य कि यह क्षेत्र (छोटानागपुर) ज्यादातर किसके लिए जाना जाता है इसका लौह अयस्क भण्डार है.

टूरिस्ट स्पॉर्ट से भरा है रांची शहर

रांची में कई ऐसी जगहें हैं जहां आप सब पूरे परिवार संग मस्ती में सराबोर हो सकते हैं. इन जगहों पर आपको एडवेंचर के साथ-साथ खाने पीने की भी अच्छी व्यवस्था है. 

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झारखंड की राजधानी और झीलों के शहर रांची की सैर

झारखंड की राजधानी रांची पर्यटन के लिहाज से शानदार जगह है. रांची को झीलों का शहर कहा जाता है. यहां पर जोन्हा फॉल, हिरनी फॉल, दशम फॉल, पंचघाघ जैसे ढेर सारे वॉटर फॉल्स हैं, जिनकी सुंदरता देखते बनती है. वैसे तो पर्यटक इन फॉल को देखने जाड़े के मौसम में ज्यादा आते हैं, क्योंकि सुहावने मौसम में जलप्रपात की सैर मजेदार होती है. यहां आपको टैगोर हिल, रांची हिल स्टेशन, कांके डैम, हटिया संग्रहालय और जनजातीय अनुसंधान संस्थान घूमने के लिए बेस्ट है.

झारखंड घूमने जाने के लिए सबसे अच्छा समय

भारत के झारखंड राज्य की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का माना जाता हैं. क्योंकि इस मौसम के दौरान पर्यटक झारखंड राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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