Jharkhand News: झारखंड का एक गांव, जहां महामारी से बचाव के लिए 100 साल पहले शुरू हुई थी माघी काली पूजा

माघी काली पूजा इस वर्ष भी भव्य तरीके से मनाने की तैयारी की जा रही है. गांव को पूरी तरह से सजाया जा रहा है. मंदिर के रंग-रोगन का कार्य पूरा कर लिया गया है. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाने की भी तैयारी की गयी है. गांव के सरदार सिंह का कहना है कि सौ साल से अधिक समय से यह पूजा हो रही है.
बगोदर (गिरिडीह), कुमार गौरव. गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के खंभरा गांव में माघी काली पूजा शुक्रवार से शुरू हो रही है. पूजा को लेकर तैयारी जोर-शोर से चल रही है. इस गांव में काली पूजा करीब सौ वर्षों से होती आ रही है. पूजा का उत्साह व आस्था इस कदर है कि गांव से बाहर दिल्ली, मुंबई, गुजरात, सूरत, राजस्थान यहां तक कि विदेशों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर भी अपने घर लौट आते हैं और करीब चार दिन तक इस पूजा में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं.
सांस्कृतिक कार्यक्रम का होगा आयोजन
काली पूजा इस वर्ष भी भव्य तरीके से मनाने की तैयारी की जा रही है. गांव को पूरी तरह से सजाया जा रहा है. मंदिर के रंग-रोगन का कार्य पूरा कर लिया गया है. इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाने की भी तैयारी की गयी है. इस बाबत उपप्रमुख हरेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि माघी काली पूजा की शुरुआत गांव के जमींदार स्व लखपत सिंह के द्वारा की गयी थी.
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गांव में था चेचक का प्रकोप
गांव के सरदार सिंह का कहना है कि सौ साल से अधिक समय से ही यह पूजा हो रही है. गांव में चेचक जैसी महामारी का प्रकोप फैल गया था. इससे गांव में काफी नुकसान हो रहा था. गांव को बचाने के लिए जमींदार ने काली पूजा की शुरुआत की. सबसे पहले मंदिर मिट्टी का बना हुआ था. इसमें लालटेन जलाकर पूजा की जाती थी. बाद में 1990-92 के समय लकड़ी बेचकर मंदिर को पक्का बनाया गया.
20 जनवरी से शुरू होगी पूजा
मुंबई में रह रहे गांव के युवकों ने चंदा करके गांव में लाइट और तोरण द्वार बनवाया. अब और बेहतर करके गांव में हर घर से आर्थिक मदद लेकर लाइट, साउंड के साथ सजावट की जाती है. पूजा जमींदार परिवार के लोग करते हैं. पूजा 20 जनवरी से शुरू होगी और 21 जनवरी की सुबह तीन बजे से सरकारी बलि की प्रथा चली आ रही है. इसके बाद गांव के हर घर में बकरे की बलि दी जाती है और मां काली की आराधना की जाती है. गांव में होने वाली मां काली पूजा दशहरे की तरह धूमधाम से मनायी जाती है. लोग नया वस्त्र खरीदते हैं. पूरे विधि-विधान से पूजा पाठ की जाती है. गांव की खुशहाली के लिए बकरे की बलि दी जाती है.
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