बंगाल : जेयू को जल्द मिलेगा अंतिरम वीसी, कमेटी के साथ बैठक के बाद राज्यपाल ने दिया आश्वासन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Aug 2023 1:25 PM
प्रो वाइस चांसलर ने राज्यपाल को जादवपुर में अब तक उठाये गये कदमों के बारे में रिपोर्ट दी. विश्वविद्यालय में लंबे समय से कुलपति नहीं है. ‘कोर्ट’ के सदस्यों ने शिकायत की कि कार्यकारी परिषद की छह माह तक बैठक नहीं होती है.
पश्चिम बंगाल के जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) की घटना के बाद शिक्षा जगत में रैगिंग को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. इस घटना की पुलिस अलग-अलग पहलू से जांच कर रही है. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जेयू के छात्र की मौत पर कार्रवाई करने के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा है. चूंकि सभी विश्वविद्यालयों के चांसलर राज्यापल सीवी आनंद बोस हैं, इसलिए आयोग ने उन्हें पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की है. इस पूरे प्रकरण पर फिर से राजभवन में जेयू की ‘कोर्ट”” मीटिंग बुलायी गयी. मीटिंग में कुलपति से विस्तृत रिपोर्ट ली गयी. राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कुलपति से जानना चाहा कि उनके दौरे के बाद इस घटना को देखते हुए क्या कदम उठाये गये हैं.
प्रो वाइस चांसलर ने राज्यपाल को जादवपुर में अब तक उठाये गये कदमों के बारे में रिपोर्ट दी. विश्वविद्यालय में लंबे समय से कुलपति नहीं है. ‘कोर्ट’ के सदस्यों ने शिकायत की कि कार्यकारी परिषद की छह माह तक बैठक नहीं होती है. इस घटना के लिए विश्वविद्यालय के अधिकारी जिम्मेदार हैं. बैठक में मौजूद कुछ सदस्यों ने राज्यपाल के सामने यूनिवर्सिटी पर उंगली उठायी. राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कोर्ट मीटिंग में कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी जल्द ही अंतरिम कुलपति की नियुक्ति करेगी. श्री बोस ने भी परिसर में व्यवस्था बहाल करने की जरूरत बतायी. विश्वविद्यालय जल्द ही प्रशासनिक कामकाज में लौट आयेगा. वहीं, बैठक में जेयू के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष मनोजीत मंडल को राजभवन में जाने नहीं दिया गया. इस पर श्री मंडल ने कहा कि उनके पास ताकत है. उन्होंने मुझे अंदर नहीं जाने दिया.
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जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) में छात्र स्वप्नदीप कुंडू की मौत के मामले में गिरफ्तार छात्रों से प्राथमिक पूछताछ में पुलिस को चौंकानेवाली जानकारी मिली है. पुलिस का कहना है कि उन्होंने अबतक जिन छात्रों को गिरफ्तार किया है, उनकी गिरफ्तारी से पहले उनसे पूछताछ में सभी छात्रों से करीब-करीब एक तरह के जवाब मिल रहे थे. इसी से संदेह गहराया. जब इन छात्रों को एक साथ बैठाकर पूछताछ की गयी, तो पता चला कि वारदात के बाद विश्वविद्यालय परिसर में स्वप्नदीप की मौत को लेकर पुलिस को क्या बताना है, यह तय करने के लिए पूर्व छात्रों ने वहां गुप्त बैठक की थी. इस मीटिंग में मौत कैसे हुई, इस बारे में पुलिस को क्या बताना है, यह तय हुआ था.
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इसके बाद स्वप्नदीप के साथ किस छात्र ने कैसे ट्रीट किया, इस बारे में बताने पर भी चर्चा हुई थी. मौत के समय कौन छात्र कहां-कहां था, इस बारे में पुलिस को क्या बताना है, यह भी तय हो गया था, जिससे दोषी छात्र पुलिस की जांच में बच सकें. पुलिस का कहना है कि जब जांच शुरू हुई, तो पता चला कि जो पूर्व छात्र पास होने के बाद से अबतक एक दिन के लिए भी घर नहीं गये, वे अचानक गायब हो गये. यह जानकारी मिलने के बाद उन्हें इनपर संदेह हुआ. सख्ती से पूछताछ करने पर पूर्व छात्रों द्वारा आयोजित गुप्त मीटिंग के बारे में पता चला. अबतक वर्तमान व पूर्व छात्रों को मिलाकर करीब 22 छात्रों से पूछताछ की गयी है. जादवपुर थाने में लगातार अन्य छात्रों से पूछताछ की जा रही है. वे लगातार अपना बयान बदल रहे हैं. इस मामले में शामिल जल्द कुछ अन्य छात्र भी गिरफ्तार होंगे.
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जादवपुर यूनिवर्सिटी में घटना के दिन मुख्य छात्रावास में क्या हुआ था? गेट किसने बंद किया? ताला किसके आदेश पर लगाया गया? इसका खुलासा करते हुए मेन हॉस्टल के एक सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि उस दिन वह गेट पर ताला लगाकर खाना खाने बैठा ही था. तभी कई छात्र दौड़ते हुए आये और कहा कि गेट खोलो, एक बच्चा गिर गया है. उसने जल्दी से जाकर गेट खोल दिया. तभी उन्होंने देखा कि वहां बहुत सारे छात्र जमा हो गये. जल्दी में कुछ प्रवेश कर रहे हैं, कुछ जा रहे हैं. तभी छात्रों का एक समूह आकर उनसे कहता है कि देखो, कोई बाहर का व्यक्ति यहां प्रवेश न कर सके! फिर उसने हाथ धोये और गेट के पास खड़ा हो गया. तभी गेट के पास एक ऑटो और एक पीली टैक्सी रुकी. वे शायद जादवपुर पुलिस स्टेशन से ऑटो और टैक्सी बुलाये थे.
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उधर, जादवपुर में छात्र की मौत की जांच में पुलिस को सनसनीखेज जानकारी मिली है. छात्र की मौत के बाद महज 24 घंटे में चार बार गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई. पिछले बुधवार दोपहर करीब सवा 12 बजे छात्र बॉलकनी से गिरा, फिर उसे जादवपुर के केपीसी कॉलेज ले जाया गया. अगली सुबह उसकी वहीं मृत्यु हो गयी. शुक्रवार को मृतक के पिता के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी. पुलिस ने जांच शुरू की. हॉस्टल के छात्रों से पूछताछ की गयी. यानी छात्र की मौत के बाद करीब 24 घंटे की ऐसी अवधि रही, जिस दौरान पुलिस अधिकारियों ने हॉस्टल में जाकर छात्रों से पूछताछ नहीं की. सूत्रों के मुताबिक इस दौरान छात्रावास में चार बार आमसभा की बैठक हुई और इस बैठक का नेतृत्व जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने किया, जो इस छात्रावास में अवैध तरीके से रहते थे.
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इसके तुरंत बाद, जादवपुर विश्वविद्यालय की अपनी एंबुलेंस आ गयी, लेकिन तब तक हॉस्टल के ऊपर से गिरे छात्र को लेकर लड़के वहां से निकल चुके थे. तभी छात्रावास के अधीक्षक द्वैपायन दत्त ने उन्हें गेट बंद करने का आदेश दिया. उसके कहे अनुसार ताला लगा दिया. उस समय छात्र समूह में आये और कहा कि सुरक्षाकर्मी गेट से बाहर नहीं जायें, वहीं रहें. तभी पुलिसकर्मी गेट के सामने आये, लेकिन उन्होंने भी गेट खोलने के लिए नहीं कहा. लेकिन हॉस्टल के सुरक्षा गार्ड को समझ नहीं आया कि हुआ क्या है.
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जादवपुर यूनिवर्सिटी की घटना के बाद शिक्षा जगत में रैगिंग को लेकर हड़कंप मचा हुआ है. वहीं इस घटना के विरोध में नदिया के बगुला से आये मृत छात्र के पड़ोसियों ने न्याय की मांग पर जादवपुर यूनिवर्सिटी के सामने विरोध-प्रदर्शन किया. जेयू का छात्र, स्वपनदीप कुंडू नदिया के बगुला इलाके का रहने वाला था. उसकी मृत्यु के बाद न केवल उसके परिजन, बल्कि उसके पड़ोसी भी बहुत व्यथित हैं. उन्होंने प्रदर्शन कर प्रशासन से मांग की कि मृतक छात्र को न्याय दिलाये. उन्होंने कहा कि घटना के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाये, जिससे अन्य छात्रों को सबक मिले. उनका कहना है कि वे किसी राजनैतिक संगठन से नहीं हैं बल्कि सामान्य लोग हैं, जो चाहते हैं कि संस्थानों में बेहतर परिवेश हो. रैगिंग के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाये.
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एसयूसीआइ (सी) के राज्य सचिव चंडीदास भट्टाचार्य ने शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु को लिखे अपने पत्र में कहा है कि गत 10 अगस्त को जादवपुर यूनिवर्सिटी में रैगिंग के शिकार हुए छात्र की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है. समझ नहीं आता कि जेयू जैसे प्रथम रैंक के विश्वविद्यालय में ऐसी घटना कैसे हो सकती है. साफ लग रहा है कि ऐसी घटनाएं वर्षों से हो रही हैं, जिनसे विश्वविद्यालय के अधिकारियों को अनभिज्ञ नहीं होना चाहिए था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए विशिष्ट सिफारिशें की हैं, जिनमें से एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वाड का गठन, प्रथम वर्ष के छात्रों को अलग-अलग हॉस्टल में रखना, जूनियर और सीनियर छात्रों को तुरंत प्रवेश के बाद रैगिंग के प्रति जागरूक करना और उनके लिए मेले आदि का आयोजन करना शामिल हैं.
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राज्य सरकार भी इस घटना की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. विश्वविद्यालय में कोई स्थायी कुलपति नहीं है, जैसा कि पिछले मई तक था. अगर स्थायी कुलपति के अभाव में कोई कठिनाई होती है, तो राज्यपाल और राज्य सरकार जिम्मेदार हैं. पत्र में शीघ्र जांच और दोषियों को कड़ी सजा, विश्वविद्यालय में रैगिंग रोकने के लिए प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और यूजीसी द्वारा अनुशंसित सभी उपायों को लागू करे व रैगिंग की तरह असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए बुद्धिजीवियों, शिक्षकों, कलाकारों की समिति बनाकर प्रचार-प्रसार कार्यक्रम चलाये.
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जादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) के प्रथम वर्ष के छात्र स्वप्नदीप कुंडू की अस्वाभाविक मौत ने राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और शिक्षण संस्थानों की पोल खोल दी है. इस घटना से पता चलता है कि तृणमूल कांग्रेस की सत्ता में राज्य की शिक्षा व्यवस्था के क्या हाल है. यही वजह है कि अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए. यह मांग विपक्ष के नेता व भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को की. श्री अधिकारी इस दिन तमलुक स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकारों के सम्मुख हुए थे. इस मौके पर उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के कॉलेज और विश्वविद्यालयों में ज्यादातर सीटों पर विद्यार्थियों का दाखिला नहीं हो पाता है. क्या उनके लिए शिक्षा की आवश्यकता नहीं है? शिक्षा प्राप्त करने वाले युवा बेरोजगार हैं. श्री अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की हालत में सुधार लाने की बजाय वोट के लिए 500 रुपये और एक हजार रुपये युवाओं को बांटे जाते हैं. राज्य के कॉलेज और विश्वविद्यालय जैसे शराब, गांजा, फेंसिडील समेत अन्य नशा के सामान का अड्डा बन गये हैं. भाजपा नेता ने राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने की मांग भी की है.
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