आईआईटी कानपुर ने क्लाउड सीडिंग से करा दी कृत्रिम बारिश, सफल रहा परीक्षण

परीक्षण उड़ान लगभग 5000 फीट की ऊंचाई तक की गई और सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा करने के बाद आईआईटी कानपुर फ्लाइट लैब हवाई पट्टी पर वापस आ गई.
कानपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (IIT Kanpur) ने 21 जून को क्लाउड सीडिंग के परीक्षण के लिए एक उड़ान सफलतापूर्वक आयोजित की.यह परियोजना कुछ साल पहले आईआईटी कानपुर में शुरू की गई थी और इसका नेतृत्व कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर मनिन्द्र अग्रवाल कर रहे हैं. प्रयोग डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) से उचित अनुमोदन के साथ आयोजित किया गया था.
क्लाउड सीडिंग में वर्षा की संभावना को बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न रासायनिक एजेंटों जैसे सिल्वर आयोडाइड, सूखी बर्फ, नमक और अन्य तत्वों का उपयोग शामिल है. आईआईटी कानपुर द्वारा किए गए प्रयोग में, क्लाउड सीडिंग अटैचमेंट के साथ आईआईटी कानपुर की उड़ान प्रयोगशाला से एक सेना विमान उड़ाया गया था. ये अटैचमेंट अमेरिका के एक निर्माता से खरीदे गए थे और विमान में संशोधनों को सेना और डीजीसीए के निर्माताओं दोनों द्वारा अनुमोदित किया गया था. परीक्षण उड़ान ने मानक अभ्यास के अनुसार फ्लेयर का उपयोग करके एजेंटों को फैलाया.
प्रोफ़ेसर मनिन्द्र अग्रवाल ने कहा हमें ख़ुशी है कि क्लाउड सीडिंग के लिए हमारा परीक्षण सफल रहा.हमने फ्लेयर्स को बादलों में नहीं दागा.यह केवल उपकरण के लिए एक परीक्षण था. सफल परीक्षण उड़ान का अर्थ है कि अब हम बाद के चरणों में क्लाउड सीडिंग करने और इसे सफल बनाने के लिए तैयार हैं.उन्होंने आगे कहा कि हम पिछले कुछ वर्षों से इस परियोजना पर काम कर रहे हैं.कोविड के कारण खरीद प्रक्रियाओं में देरी हुई. लेकिन अब, डीजीसीए से मंजूरी और पहले परीक्षण के सफल समापन के बाद, हम सेटअप पूरा करने के करीब हैं.यह परीक्षण उड़ान लगभग 5000 फीट की ऊंचाई तक की गई और सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा करने के बाद आईआईटी कानपुर फ्लाइट लैब हवाई पट्टी पर वापस आ गई.
रिपोर्ट – आयुष तिवारी
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