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झारखंड के मुस्लिम दर्जी ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए तैयार किया हनुमान ध्वज

Updated at : 27 Dec 2023 9:33 PM (IST)
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झारखंड के मुस्लिम दर्जी ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए तैयार किया हनुमान ध्वज

जिलानी ने कहा कि उन्होंने सिलाई अपने पिता अब्दुल शकूर से सीखी थी, जिनकी लगभग 40 साल पहले 80 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई. हजारीबाग के जिलानी ने कहा कि मैं पिता के साथ वीर वस्त्रालय के सामने स्थित फतेह लाल अग्रवाल के स्वामित्व वाले भोला वस्त्रालय में काम करता था. मैं वीर वस्त्रालय में कार्यरत हूं.

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झारखंड की राजधानी रांची से 90 किलोमीटर दूर स्थित हजारीबाग जिले के एक मुस्लिम दर्जी ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के लिए विशाल हनुमान ध्वज तैयार किया है. गुलाम जिलानी (55) ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए 40 फुट लंबा और 42 फुट चौड़ा ‘हनुमान ध्वज’ तैयार किया है. यह ध्वज अयोध्या स्थित नवनिर्मित राम मंदिर के शिखर पर 22 जनवरी को फहराया जाएगा. झारखंड के हजारीबाग जिले के जिलानी तीसरी पीढ़ी के दर्जी हैं, जिन्हें धार्मिक ‘महावीरी’ ध्वज तैयार करने में विशेषज्ञता हासिल है. जिलानी ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरे द्वारा सिला गया ध्वज ऐतिहासिक राम मंदिर की शोभा बढ़ाएगा, जिसका सपना 100 करोड़ से अधिक लोग देख रहे हैं. अगर मुझे अवसर मिला, तो मैं उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए निश्चित रूप से अयोध्या जाऊंगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को राम मंदिर में राम लला की प्रतिमा की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ या अभिषेक समारोह में भाग लेंगे. 70 एकड़ के मंदिर परिसर में 392 खंभे और 732 मीटर तक फैली 14 फीट चौड़ा ‘परकोटा’ है.

ऐसा होगा 40 फुट का ध्वज

जिलानी ने कहा कि उन्होंने सिलाई अपने पिता अब्दुल शकूर से सीखी थी, जिनकी लगभग 40 साल पहले 80 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई थी. हजारीबाग के जिलानी ने कहा, ‘मैं अपने पिता के साथ वीर वस्त्रालय के सामने स्थित फतेह लाल अग्रवाल के स्वामित्व वाले भोला वस्त्रालय में काम करता था. मैं वीर वस्त्रालय में कार्यरत हूं.’ वीर वस्त्रालय के मालिक देवेंद्र जैन ने कहा, ‘40 फुट के ध्वज में एक तरफ भगवान हनुमान की छवि है और दूसरी तरफ भगवान हनुमान के कंधों पर भगवान राम और लक्ष्मण की छवि है.’

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हजारीबाग के जिलाने ने बनाए हैं हजारों महावीरी ध्वज

जैन ने कहा कि जिलानी ने क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने वाले हजारों रामनवमी और महावीरी ध्वज बनाए हैं. उन्होंने कहा कि इस ध्वज को बनाने का काम बड़ाबाजार हजारीबाग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख नेता नवल किशोर खंडेलवाल ने दिया था. उन्होंने दावा किया कि खंडेलवाल (81) वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व वाले उस समूह का हिस्सा थे, जिन्होंने छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस में भाग लिया था. जैन ने कहा कि यह ध्वज करीब 10 दिन में बनकर 26 दिसंबर को तैयार हो गया था.

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150 मीटर कपड़े का हुआ है ध्वज बनाने में इस्तेमाल

जैन ने कहा कि इस ध्वज को बनाने में 150 मीटर कपड़े का इस्तेमाल किया गया है. इसे मंदिर में 100 फुट ऊंचे खंभे पर लगाया जाएगा. उन्होंने बताया कि इस ध्वज की कीमत 21,000 रुपये है. उन्होंने कहा कि वीर वस्त्रालय की स्थापना 1977 में हुई थी और यह हर साल सभी धर्मों के लिए दो लाख से अधिक ध्वज बनाता है. जैन ने कहा कि उन्हें रामनवमी और शिवरात्रि के दौरान विदेशों से भी ध्वज बनाने का काम मिलता है. खंडेलवाल ने अपने रिकॉर्ड किए गए बयान में कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस में भाग लेने के बाद, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और तीन महीने के लिए हजारीबाग केंद्रीय कारागार में बंद कर दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘अयोध्या में राम मंदिर देखने का मेरा सपना लगभग 32 वर्षों के बाद सच हो रहा है. फिलहाल मैं अस्वस्थ हूं, लेकिन 22 जनवरी को मंदिर के उद्घाटन में भाग लेने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा.’

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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