प्रसिद्ध साहित्यकार महादेव टोप्पो साहित्य अकादमी की कार्यकारिणी समिति में शामिल, कहा-खुश हूं पर आश्चर्यचकित भी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 Feb 2023 7:00 PM

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महादेव टोप्पो ने कहा कि मैं एक सदस्य के रूप में वृहत झारखंड की बातों को वहां उठाऊंगा और यह कोशिश करूंगा कि वृहत झारखंड और नाॅर्थ ईस्ट में साहित्य के लिए बेहतर माहौल बने.

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साहित्य अकादमी ने झारखंड के प्रसिद्ध साहित्यकार और रंगकर्मी महादेव टोप्पो को अपनी कार्यकारिणी समिति का सदस्य नियुक्त किया है. उन्हें यह जानकारी साहित्य अकादमी के सचिव द्वारा पहले फोन पर दी गयी और बाद में उन्हें पत्र द्वारा सूचित किया गया.

खुशी के साथ आश्चर्यचकित हूं

साहित्य अकादमी की कार्यकारिणी समिति का सदस्य नियुक्त होने पर महादेव टोप्पो ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि यह मेरे लिए जितनी खुशी की बात है उतना ही मैं आश्चर्यचकित भी हूं. मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि मुझे साहित्य अकादमी का सदस्य बनने का मौका मिलेगा. मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं.

वृहत झारखंड के मुद्दों को प्राथमिकता

महादेव टोप्पो ने कहा कि मैं एक सदस्य के रूप में वृहत झारखंड की बातों को वहां उठाऊंगा और यह कोशिश करूंगा कि वृहत झारखंड और नाॅर्थ ईस्ट में साहित्य के लिए बेहतर माहौल बने. नाॅर्थ ईस्ट की बातें तो फिर भी हुआ करती थी, लेकिन वृहत झारखंड की बातें कम हुई हैं मैं उसे प्राथमिकता में रखूंगा.

साहित्य, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान

महादेव टोप्पो झारखंड में साहित्य, भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं. उनकी कविताएं देश के लगभग सभी प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. उनकी कविताओं ने झारखंड आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई है. इनका जन्म 1954 में बेड़ो, रांची जिले में हुआ है. उनकी रचनाओं में जंगल पहाड़ के पाठ (कविता संग्रह), सभ्यों के बीच आदिवासी (लेख संग्रह) का चर्चित रचनाएं हैं . उनकी रचनाओं का अन्य भाषाओं में अनुवाद भी हुआ है.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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