Ekadashi Vrat 2022: 28 जनवरी को है षटतिला एकादशी व्रत, इस साल कब-कब पड़ेगी एकादशी तिथि नोट कर लें सही डेट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 Jan 2022 1:17 PM
Ekadashi Vrat 2022: हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है. इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है.
धार्मिक मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से हर तरह के दु:ख और दरिद्रता दूर होती है और सुख और सौभाग्य जीवन में आता है. प्रत्येक मास में दो बार एकादशी व्रत पड़ता है एक कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में. जानें इस साल एकादशी का व्रत कब-कब पड़ेगा.
पौष मास के शुक्ल पक्ष को पड़ने वाली एकादशी तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्रधारी स्वरूप की पूजा करने पर संतान सुख की कामना पूरी होती है. इस साल यह एकादशी तिथि 13 जनवरी को थी
अपने नाम के स्वरूप षटतिला एकादशी के व्रत में तिल का विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ तिल से स्नान, दान, हवन, और तर्पण आदि करने से बहुत ज्यादा पुण्य फल मिलता है.
मान्यता है कि जया एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने पर व्रती को जीवन में किसी भी प्रकार की भूत-प्रेत, बाधा आदि का भय नहीं रहता है. सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है.
विजया एकादशी व्रत को भक्ति भाव के साथ रखने पर साधक पर शीघ्र ही भगवान विष्णु की कृपा बरसती है और जीवन में प्रत्येक क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है.
आंवला भगवान विष्णु को बहुत ज्यादा प्रिय है. मान्यता है कि आमलकी एकादशी व्रत करने पर साधक को स्वास्थ्य और संपत्ति दोनों तरह के सुख प्राप्त होते हैं.
भगवान विष्णु की साधना-आराधना के लिए समर्पित पापमोचनी एकादशी के दिन विधि-विधान से व्रत रखने पर व्रती के सभी प्रकार के पाप दूर होते हैं और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
कामदा एकादशी के दिन भक्ति-भाव के साथ जो व्यक्ति भगवान विष्णु की पूजा पीले फूल से करता है और व्रत रखता है, उसकी श्री हरि सभी कामनाएं पूरी करते हैं.
ऐसी धार्मिक मान्यता है कि जो पुण्यफल स्वर्ण दान का होता है, वैसा ही पुण्यफल सिर्फ वरुथिनी एकादशी व्रत करने पर मिल जाता है. भगवान विष्णु को समर्पित वरुथिनी एकादशी से सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है.
मोहिनी रूप भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है, जो उन्होंने समुद्र मंथन के समय राक्षसों से अमृत की रक्षा करने के लिए धारण किया था. मान्यता है कि मोहिनी एकादशी व्रत करने से साधक सभी प्रकार के मोह माया के जंजाल से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति करता है.
अपरा एकादशी व्रत के दिन भगवान त्रिविक्रम की पूजा करने का विधान है. मान्यता है कि इस व्रत को करने पर यश, पुण्य और धन की प्राप्ति होती है.
निर्जला एकादशी को सभी प्रकार की एकादशी में श्रेष्ठ माना गया है. इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं. मान्यता है कि निर्जला एकादशी व्रत करने मात्र से सभी एकादशी व्रत का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है.
योगिनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि की पूजा करने पर सभी प्रकार के पाप और श्राप से मुक्ति मिलती है. इस व्रत को करने पर साधक के जीवन से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं.
आषाढ़ मास में पड़ने वाली इस एकादशी को आषाढ़ी एकादशी, देवशयनी एकादशी, हरिशयनी और पद्मनाभा एकादशी आदि नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं.
कामिका एकादशी को पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु का पावन व्रत रखने पर साधक की न सिर्फ इस जन्म की बल्कि पूर्वजन्म की भी बाधाएं दूर होती हैं और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाली एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहते हैं. मान्यता है कि इस व्रत को करने पर व्यक्ति को भगवान विष्णु की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती है.
मान्यता है कि अजा एकादशी का व्रत विधि-विधान से रखने पर भगवान विष्णु जी के साथ धन की देवी मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है.
परिवर्तिनी एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन श्री हरि शयन करते हुए करवट लेते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस व्रत को करने पर वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है.
मान्यता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से न सिर्फ भगवान विष्णु का आशीर्वाद बल्कि पितरों को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. इस एकादशी पर भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है.
मान्यता है कि साधक को इस इस पावन व्रत के पुण्य फल रूपी अंकुश से पाप रूपी हाथी को नियंत्रण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है. यह व्रत साधक के जीवन से जुड़े सभी दोष को दूर करता है.
भगवान विष्णु के लिए रखे जाने वाले एकादशी व्रत में रमा एकादशी का बहुत महत्व है. इस व्रत को करने पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी के रमा स्वरूप की भी साधना की जाता है. इस व्रत के शुभ फल से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान या फिर देवउठनी या फिर प्रबोधिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं. जिसके बाद सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है.
मान्यता है कि उत्पन्ना एकादशी के दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था, जिन्हें भगवान विष्णु की एक शक्ति का स्वरूप माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने पर मनुष्य के पूर्व एवं वर्तमान जन्म के सारे पाप दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.
भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाले मोक्षदा एकादशी का व्रत करने पर जीवन से जुड़े सभी प्रकार के मोह का नाश होता है और साधक को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
पौष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ने वाला सफला एकादशी का व्रत करने पर साधक को कठिन से कठिन कार्य में भी शीघ्र ही सफलता प्राप्त होती है.
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