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Doctor's Day 2023: कोल्हान में चार बड़े अस्पताल, पर डॉक्टरों की कमी से इलाज मुश्किल

Updated at : 01 Jul 2023 12:44 PM (IST)
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Doctor's Day 2023: कोल्हान में चार बड़े अस्पताल, पर डॉक्टरों की कमी से इलाज मुश्किल

Doctor's Day 2023: लगातार बहाली के बाद भी चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम जिले के अस्पतालों में 144 डॉक्टरों की जरूरत है लेकिन वहां सिर्फ 77 डॉक्टर ही हैं. कोल्हान में चार बड़े अस्पताल हैं, पर डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज मुश्किल है.

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जमशेदपुर, ब्रजेश सिंह. एक जुलाई को देश डॉक्टर्स डे मनाता है. मरीजों को भी उम्मीद होती है कि उसका इलाज बेहतर ढंग से हो, लेकिन जमशेदपुर समेत कोल्हान के अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं. लोगों को बेहतर इलाज मिलना मुश्किल है. खासकर विशेषज्ञों की. अच्छे चिकित्सक यहां आना नहीं चाहते हैं और जो हैं वह छोड़कर जा रहे हैं. जबकि जमशेदपुर बिहार-झारखंड के अग्रणी शहरों में शुमार है. अस्पताल लगातार चिकित्सकों की बहाली निकाल रहे हैं, लेकिन उन्हें डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं. जमशेदपुर के सबसे बड़ा अस्पताल टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) हो या फिर कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम या फिर रेलवे का चक्रधरपुर या टाटानगर अस्पताल, हर जगह चिकित्सकों की बहाली है, लेकिन योग्य चिकित्सक नहीं आ रहे हैं. पूर्वी सिंहभूम में 144 चिकित्सकों की जरूरत है, जबकि इसके विपरित करीब 77 चिकित्सक ही उपलब्ध हैं.

एमजीएम की स्थिति

पद : जरूरत : कार्यरत

प्रोफेसर : 26 : 15

एसोसिएट प्रोफेसर : 40 : 32

असिस्टेंट प्रोफेसर : 51 : 43

ट्यूटर : 47 : 23

सीनियर रेजिडेंट : 73 : 37

जूनियर रेजिडेंट : 87 : 46

यह भी जानें

डब्लूएचओ के मुताबिक, देश में डॉक्टर मरीज के 1: 1000 अनुपात की जरूरत है. अभी यह अनुपात 1: 1499 है. देश में हर साल करीब 80 हजार डॉक्टर्स मेडिकल कॉलेज से पास हो रहे हैं. इसके बावजूद यह अनुपात हासिल करना आसान नहीं है. बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्थिति बेहद खराब है

रेलवे अस्पताल : जरूरत 24 डॉक्टरों की, स्वीकृत पद 12, हैं तीन

रेलवे की ओर से भी हाल के दिनों में स्थायी चिकित्सकों की बहाली के बजाय कांट्रैक्ट पर ही बहाली की जा रही है. इस वजह से भी कई बार बहाली निकालने के बाद भी चिकित्सको के पद खाली ही रह जा रहे हैं. ज्यादा पैसा कमाने के लिए सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देते हैं. टाटानगर रेलवे अस्पताल में रेलवे के नौ हजार कर्मचारियों, पांच हजार रिटायर कर्मियों और उनके परिवार वालों का इलाज होता है, लेकिन यहां चिकित्सकों की कमी है. तीन चिकित्सक के भरोसे स्टेशन आने वाले यात्रियों की भी जांच की जाती है. अगर कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज आ जाता है, तो उसे रेफर कर दिया जाता है. यहां करीब 24 चिकित्सकों की जरूरत है, जबकि स्वीकृत पद 12 ही हैं. अनुबंध पर दो चिकित्सक हैं, जो बदलते रहते हैं. चक्रधरपुर रेलवे अस्पताल में भी चिकित्सक के पद खाली हैं. यहां फिर से 6 पदों के लिए बहाली निकाली गयी है. लेकिन कोई आवेदन नहीं कर रहा है.

टीएमएच में बहाली निकालने के बाद भी पद खाली

टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) अपनी सेवाओं के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल में यह अस्पताल लगातार चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है. जिस रफ्तार से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है, उसके अनुपात में चिकित्सक काफी कम हैं. इसे देखते हुए टाटा स्टील मेडिकल सर्विसेज ने टीएमएच के अलावा हर लोकेशन के लिए चिकित्सकों की बहाली निकाली है. मेडिसिन स्पेशलिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, हेमोटॉलॉजिस्ट, नेफ्रालॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन, ऑप्थोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिक्स, गाइनिक, कार्डियोलॉजिस्ट, वैस्कुलर सर्जन, मेडिकल ऑफिसर, ऑप्थेलमोलॉजिस्ट, इमरजेंसी मेडिसिन और इंटेंसिव केयर जैसे चिकित्सकों के लिए बहाली निकाली गयी है. लेकिन आवेदन कम आने से पद खाली रह जा रहे हैं.

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