झारखंड: काला बिल्ला लगाकर डॉक्टरों ने मनाया काला दिवस, राजस्थान सरकार के राइट टू हेल्थ बिल किया विरोध

Updated at : 28 Mar 2023 5:21 AM (IST)
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झारखंड: काला बिल्ला लगाकर डॉक्टरों ने मनाया काला दिवस, राजस्थान सरकार के राइट टू हेल्थ बिल किया विरोध

डॉ श्याम जी भगत ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से चिकित्सकों पर हताशा में निर्णय लिया गया है. बिल के कारण सेवा भावना का अभाव हो जायेगा. सरकार मनमानी कर रही है. अगर निर्णय में परिवर्तन नहीं किया गया तो आने वाले समय में देश भर में व्यापक आंदोलन चलाया जायेगा.

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गोड्डा: आइएमए भवन में संघ से जुड़े पदाधिकारी व चिकित्सकों ने सोमवार को काला दिवस मनाया. संघ के आह्वान पर विरोध प्रर्दशन करते हुए जिले के 60 चिकित्सकों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया. यह विरोध राजस्थान के चिकित्सकों पर राइट टू हेल्थ बिल को लेकर किया गया. बिल के विरोध में आइएमए भवन में प्रेस वार्ता की गयी. मौके पर आइएमए अध्यक्ष डॉ श्याम जी भगत, सचिव डॉ प्रभा रानी प्रसाद, व कोषाध्यक्ष डॉ डीके चौधरी के साथ वरीय चिकित्सक सह आइएमए सदस्य डॉ अशोक कुमार, डॉ एसके चौधरी मुख्य मौजूद थे.

हताशा में लिया गया है निर्णय

अध्यक्ष डॉ श्याम जी भगत ने कहा कि राजस्थान सरकार की ओर से चिकित्सकों पर हताशा में निर्णय लिया गया है. बिल के कारण सेवा भावना का अभाव हो जायेगा. सरकार मनमानी कर रही है. अगर निर्णय में परिवर्तन नहीं किया गया तो आने वाले समय में देश भर में व्यापक आंदोलन चलाया जायेगा. सचिव डॉ प्रभा रानी प्रसाद ने कहा कि इस तरह के निर्णय के पीछे केवल एक ही बात सामने आती है. चिकित्सक, इंजीनियर, पब्लिक सेवा से जुड़े लोग या अन्य कोई मगर नेताओं के पास योग्यता के मापदंड की जरूरत नहीं रहने की वजह से ज्ञान के अभाव में इस तरह का निर्णय लिया जाता है. ऐसे नेताओं के लिए भी शैक्षणिक जानकारी जरूरी रहने की बात डॉ प्रभा रानी ने कही.

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राजस्थान सरकार बिल में करे सुधार

डॉ दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि हर बार चिकित्सकों पर ही आवश्यक टेस्ट किया जाता है. समाज में चिकित्सकों के साथ इस तरह के दमनात्मक कार्य कर मरीजों को ही परेशान परेशान किया जाता है. सरकार अपने बिल पर आवश्यक सुधार करें. वरीय चिकित्सक डॉ अशोक कुमार ने कहा कि पिछले एक दशक से डॉक्टरों पर परेशानी बढी है. चिकित्सक के बारे में गलत इमेज बनाने का काम किया जा रहा है. क्लीनिकों में अपनी सेवा दे रहे ऐसे चिकित्सकों को पहले डिग्री लेने के बाद अपने जीवन का 35 साल स्वयं को प्रतिष्ठाापित करने में लगाना पड़ता है. सरकार का निर्णय जान बचानेवाले को जान लेने जैसा है. वरीय चिकित्सक डॉ एसके चौधरी ने कहा कि चिकित्सक व रोगियों के बीच बड़ी खाई लाने का काम सरकार ऐसे बिल के माध्यम से कर रही है. बदलाव होना चाहिए. मौके पर डॉ आकाश, डॉ अंकिता , डॉ अभिषेक, डॉ महमूद आदि मौजूद थे.

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