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Dev Uthani Ekadashi 2021: कल है देवोत्थान एकादशी और तुलसी-शालीग्राम विवाह, जानें पारण का सही समय और पूजा विधि

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Dev Uthani Ekadashi 2021: कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवोत्थान एकादशी और देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन से चार महीने से रूके हुए सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं. इस बार ये एकादशी 14 नवंबर को पड़ रही है.

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तुलसी विवाह पर बन रहा यह शुभ संयोग

तुलसी विवाह के दिन हर्षण योग का शुभ संयोग बन रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार हर्षण योग 15 नवंबर की देर रात 1 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष के अनुसार शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए हर्षण योग को अत्यंत उत्तम माना गया है.

इस वजह से 15 नवंबर को है एकादशी व्रत

एकादशी दो प्रकार की होती है- (1)सम्पूर्णा (2) विद्धा.

सम्पूर्णा:-जिस तिथि में केवल एकादशी तिथि होती है अन्य किसी तिथि का उसमे मिश्रण नहीं होता उसे सम्पूर्णा एकादशी कहते हैं.

विद्धा एकादशी : यह एकादशी पुनः दो प्रकार की होती है

(1) पूर्वविद्धा (2) परविद्धा

पूर्वविद्धा:- दशमी मिश्रित एकादशी को पूर्वविद्धा एकादशी कहते हैं. यदि एकादशी के दिन अरुणोदय काल (सूरज निकलने से 1घंटा 36 मिनट का समय) में यदि दशमी का नाम मात्र अंश भी रह गया तो ऐसी एकादशी पूर्वविद्धा दोष से दोषयुक्त होने के कारण वर्जनीय है. यह एकादशी दैत्यों का बल बढ़ाने वाली है. पुण्यों का नाश करने वाली है. इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी में ही एकादशी व्रत रखना चाहिए. ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है.

तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त

सोमवार, नवम्बर 15, 2021 को

द्वादशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 15, 2021 को सुबह 06:39 बजे

द्वादशी तिथि समाप्त – नवम्बर 16, 2021 को सुबह 08:01 बजे

शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:58 बजे से 05:51 बजे तक

अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:44 बजे से 12:27 बजे तक

विजय मुहूर्त- दोपहर 01:53 बजे से 02:36 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:17 बजे से 05:41 बजे तक

अमृत काल- रात 01:02 बजे से 02:44 बजे तक

निशिता मुहूर्त- रात 11:39 बजे से 12:33 सुबह तक, नवम्बर 16

तुलसी पूजन मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।

धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।

तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

तुलसी विवाह 15 नवंबर को जानिए वजह

इस साल प्रबोधिनी एकादशी 14 और 15 नवंबर दोनों दिन लग रही है. ऐसे में ज्यादातर लोग एकादशी तिथि को लेकर असमंजस में है जबकि तुलसी विवाह को लेकर भी यह सोच रहे हैं कि 14 नवंबर को करें या 15 नवंबर को. धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार यदि जब एकादशी तिथि के साथ द्वादशी लग रही हो तो उस दिन तुलसी विवाह प्रदोष काल में कराना चाहिए. बताए गए इस नियम के अनुसार इस साल 15 नवंबर को तुलसी विवाह कराना और प्रबोधिनी एकादशी व्रत रखना सबसे शुभ होगा. तुलसी विवाह के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है.

15 नवंबर शाम 6 बजे से 7 बजकर 39 मिनट तक प्रदोष काल में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त है.

तुलसी विवाह के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

: अंखड सौभाग्य और सुख-समृद्धि के लिए हर सुहागन स्त्री को तुलसी विवाह जरूर करना चाहिए.

: पूजा के समय मां तुलसी को सुहाग का सामान और लाल चुनरी चढ़ाना चाहिए.

: तुलसी के गमले में शालीग्राम को साथ रखना चाहिए और तिल चढ़ाना चाहिए.

: तुलसी और शालीग्राम को दूध में भीगी हल्दी का तिलक लगाना चाहिए.

: पूजा के बाद किसी भी चीज के साथ 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करने की परंपरा है.

: मिठाई और प्रसाद का भोग लगाना चाहिए.

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