OTT से वरुण धवन की फिल्म बवाल को हटाने की उठी मांग, यहूदी संगठन ने अमेजन प्राइम वीडियो को लिखा पत्र
Published by : Ashish Lata Updated At : 27 Jul 2023 2:24 PM
वरुण धवन और जान्हवी कपूर की फिल्म बवाल ने एक यहूदी संगठन को परेशान कर दिया है, जिसने नाजी डेथ कैंप में एक काल्पनिक दृश्य फिल्माने के लिए निर्माताओं की आलोचना की है. साथ अमेजन प्राइम वीडियो को पत्र भी लिखा है.
बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन और जान्हवी कपूर की फिल्म ‘बवाल’ फैंस को काफी पसंद आ रही है. मूवी 21 जुलाई को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुआ था. अब कुछ दर्शकों के एक वर्ग ने फिल्म के उस सीन्स के लिए आलोचना की, जो ऑशविट्ज़ के नाजी डेथ कैंप से प्रेरित था. एक यहूदी संगठन (Jewish organisation) ने फिल्म को हटाने के लिए प्राइम वीडियो को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें ओटीटी प्लेटफॉर्म से बावल का मुद्रीकरण बंद करने का आग्रह किया गया है, जो ‘नाजी नरसंहार के लाखों पीड़ितों की पीड़ा और व्यवस्थित हत्या’ को तुच्छ बताता है.
बवाल फिल्म को लेकर प्राइम वीडियो को खुला पत्र
नाजी नरसंहार के पीड़ितों की याद में समर्पित एक मानवाधिकार गैर सरकारी संगठन, साइमन विसेन्थल सेंटर (एसडब्ल्यूसी) ने प्राइम वीडियो से ‘एक साजिश उपकरण के रूप में नाजी नरसंहार के अपमानजनक दुरुपयोग के कारण’ फिल्म बवाल को हटाने का आग्रह किया. बयान में कहा गया है, “प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्माता नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित, फिल्म की कहानी जो समकालीन समय पर आधारित है, ऐसे दृश्यों की ओर ले जाती है, जिसमें नायक ऑशविट्ज़ में एक गैस चैंबर में प्रवेश करते हैं और धारीदार कपड़े पहने हुए उनका दम घुट जाता है. फ़िल्म में मानवीय लालच के लिए हिटलर को एक रूपक के रूप में प्रयोग किया गया है, जिसमें मुख्य नायक अपनी पत्नी से कह रहा है, ‘हम सब कुछ हद तक हिटलर की तरह हैं, है ना?”
फिल्म 6 मिलियन मारे गए यहूदियों की स्मृति को अपमानित करती है
फिल्म और निर्देशक नितेश तिवारी की आलोचना करते हुए एसडब्ल्यूसी के रब्बी अब्राहम कूपर ने खुले पत्र में कहा, “ऑशविट्ज़ कोई रूपक नहीं है. यह मनुष्य की बुराई करने की क्षमता का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है. इस फिल्म में नायक द्वारा यह घोषणा करवाकर कि ‘हर रिश्ता उनके ऑशविट्ज़ से चलता है.’ नितेश तिवारी, हिटलर के नरसंहार शासन के हाथों पीड़ित 6 मिलियन मारे गए यहूदियों और लाखों अन्य लोगों की स्मृति को तुच्छ और अपमानित करते हैं.
अमेजन को हटा देना चाहिये बवाल फिल्म
आगे बोलते हुए कि कैसे फिल्म प्रलय के दौरान लाखों लोगों की हत्या को तुच्छ समझती है, उन्होंने कहा, “अगर फिल्म निर्माता का लक्ष्य कथित तौर पर नाजी डेथ कैंप में एक काल्पनिक दृश्य फिल्माकर अपनी फिल्म के लिए पीआर हासिल करना था, तो वह सफल हो गया है. अमेज़ॅन प्राइम (प्राइम वीडियो) को नाज़ी नरसंहार के लाखों पीड़ितों की पीड़ा और व्यवस्थित हत्या के इस साधारण तुच्छीकरण को तुरंत हटाकर बवाल से कमाई करना बंद कर देना चाहिए.”
सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बैकड्राप पर बुनी प्रेम कहानी
फिल्म की कहानी अजय उर्फअज्जू भैया (वरुण धवन) की है. अज्जू एक टीचर है, फिल्म के पहले 5 मिनट में अज्जू के प्रोफेशन और व्यक्तित्व को जिस तरह से स्क्रीन को ब्लैक एंड वाइट से रंगीन कर गया है. वह बता गया है कि अज्जू के लिए तरह से बदला जाता है. वह यह बता जाता है कि इमेज ही सब कुछ है. उसने निशा से शादी की है, जो एक मिर्गी की बीमारी से जूझ रही है.निशा की यह बीमारी अज्जू की बनी बनायीं इमेज को ख़राब कर सकता है. निशा उसके लिए डिफेक्टिव पीस है, इसलिए वह निशा से दूरी बना लेता है. दोनों की शादी तलाक तक पहुंच जाती है,लेकिन कहानी में हालात कुछ ऐसे बनते है कि दोनों को एक साथ यूरोप टूर पर जाना पड़ता है.इस दौरान क्या ये एक-दूसरे के करीब आ पाएंगे. इनकी शादी बच जाएगी. अज्जू की इमेज का क्या होगा. यही आगे की कहानी है.
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By Ashish Lata
आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.
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