7.1 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

Corona Effect: बिहार के स्कूल संचालक बन गए पॉल्ट्री फार्म और फर्नीचर के कारोबारी, कोरोनाकाल में औंधे मुंह गिरे प्राइवेट स्कूल

डेढ़ साल से कोविड काल ने निजी विद्यालयों को औंधे मुंह गिरने पर मजबूर कर दिया. डेढ़ सालों से विद्यालयों में कोरोना महामारी को लेकर ताला लटका हुआ है. बीच के दिनों में जब महामारी के पहले स्टेज पर थोड़ा लगाम लगा तो एक साल से बंद विद्यालयों को संचालकों ने महाजनों से कर्ज लेकर फिर से खोला. लेकिन एक महीने भी स्कूल नहीं चल सका और कोरोना की दूसरी स्टेज शुरू हो गयी. जिसके कारण विद्यालयों में फिर ताला लगाना पड़ा. जानकारी अनुसार 100 में से 90 निजी विद्यालय किराये के मकान में संचालित हो रहे हैं.

डेढ़ साल से कोविड काल ने निजी विद्यालयों को औंधे मुंह गिरने पर मजबूर कर दिया. डेढ़ सालों से विद्यालयों में कोरोना महामारी को लेकर ताला लटका हुआ है. बीच के दिनों में जब महामारी के पहले स्टेज पर थोड़ा लगाम लगा तो एक साल से बंद विद्यालयों को संचालकों ने महाजनों से कर्ज लेकर फिर से खोला. लेकिन एक महीने भी स्कूल नहीं चल सका और कोरोना की दूसरी स्टेज शुरू हो गयी. जिसके कारण विद्यालयों में फिर ताला लगाना पड़ा. जानकारी अनुसार सुपौल के वीरपुर में 100 में से 90 निजी विद्यालय किराये के मकान में संचालित हो रहे हैं.

विद्यालय बंद रहने से आमदनी बंद रहने के कारण विद्यालय संचालक मकान मालिक को भवन का किराया नहीं दे पा रहे हैं. डेढ़ साल का बकाया किराया के एवज में मकान मालिक ने स्कूल का डेस्क बेंच, टेबुल, कुर्सी को जब्त कर लिया है. वहीं मकान मालिकों ने विद्यालय में अपना ताला भी जड़ दिया है. न्यू कैम्ब्रिज रेसिडेंशियल स्कूल वीरपुर के निदेशक मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि स्कूल के वाहनों का टायर एक साल से अधिक समय से गाड़ी के खड़े रहने के कारण खराब हो गया है. गाड़ी के इंजन में भी खराबी आ चुकी है.

निदेशक मिथिलेश कुमार झा ने कहा कि स्कूल संचालक को अपना पेट भर पाना कठिन हो रहा है. ऐसे में शिक्षक व अन्य कर्मी को सहयोग कैसे कर पाएंगें. दिव्य सनातन स्कूल सीतापुर के निदेशक विजय देव ने बताया कि बच्चों के भविष्य तो इस कोरोना ने अंधकारमय कर दिया है. निजी स्कूल संचालकों को भी भुखमरी के कगार पर ला दिया. अब वे दूसरे व्यवसाय की दिशा में सोचने पर मजबूर हो गए हैं.

Also Read: बिहार में जीवित डॉक्टर को घोषित किया मृत, विदेश से सबूत भेजकर बोलीं- ‘जिंदा हूँ मैं’, मचा हड़कंप…

कोविड महामारी से चौपट स्कूल के व्यवसाय का भविष्य अब स्कूल संचालकों को अंधकार मय दिखने लगा है. इसके मद्देनजर कई स्कूल संचालक धंधा बदल चुके हैं. एपीएस करजाईन बाजार के निदेशक प्रदीप कुमार ने स्कूल का धंधा बदलकर फर्नीचर उद्योग की ओर रुख कर लिया. वहीं रतनपुर के विजय कुमार ने किराना दुकान की राह पकड़ ली.

कई स्कूल संचालक गाय पालन, पॉल्ट्री आदि की ओर रुख कर लिया है. स्कूल संचालक को स्कूल का धंधा अब फायदे का नहीं दिख रहा. सालों से गरीब छात्रों को मुफ्त पढ़ाने के एवज में मिलने वाली सरकारी सहायता की राशि का सहयोग उनको प्राप्त नहीं हो रहा. सरकार की सोच इस दिशा में सकारात्मक होती तो निजी विद्यालय की स्थिति बेहतर होती.

POSTED BY: Thakur Shaktilochan

Prabhat Khabar News Desk
Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel