Coronavirus in Bengal: बंगाल में ‘कोरोना योद्धाओं’ को दिया जा रहा ऐसा भोजन, सबसे खराब हालत ग्रुप डी कर्मचारियों की

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Apr 2020 1:17 PM

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Coronavirus in Bengal: कॉलेज स्क्वायर स्थित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी देनेवाले मेडिकल स्टाफ को खराब भोजन खिलाया जा रहा है.

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कोलकाता : कॉलेज स्क्वायर स्थित कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी देनेवाले मेडिकल स्टाफ को खराब भोजन खिलाया जा रहा है. अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक स्थित क्वारेंटाइन सेंटर में कार्य करनेवाले ग्रुप डी कर्मचारियों की ओर से यह आरोप लगाये गये हैं. आरोप है कि उन्हें सही समय पर भोजन नहीं दिया जा रहा है. सोमवार सुबह 9.30 बजे नाश्ता दिया गया था. नाश्ते में केवल चार पीस ब्रेड, जबकि दोपहर का भोजन दो बजे दिया गया, जिसे खा कर वे बीमार पड़ सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद इसी भोजन को ग्रहण कर वह कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं.

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ज्ञात हो कि कोरोना के प्रकोप को देखते हुए विभिन्न सरकारी अस्पतालों के क्वारेंटाइन सेंटर में कार्य कर रहे हैं. स्वास्थ्यकर्मी सात दिन ड्यूटी और सात दिन छुट्टी दी जा रही है. इस बीच अस्वास्थ्यकर तरीके से इन स्वास्थ्यकर्मियों को भोजन परोसा जा रहा है. अस्पताल के एक किचनकर्मी ने बताया कि रविवार तक किचन से क्वांरेटाइन सेंटर के डॉक्टर, नर्स व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को भोजन दिया था. सुबह नास्ते में चाय, ब्रेड, दो अंडा, दो केला. दोपहर में चावल, दाल, सब्जी मछली या अंडा. रात में चावल, दाल, सब्जी, अंडा या चिकन. भोजन फ्वाइल बॉक्स में पैक कर उक्त स्वास्थ्यकर्मियों तक पहुंचाया जा रहा है. ज्ञात हो कि अस्पताल के इसी किचन में यहां भर्ती अन्य मरीजों के लिए खाना पकाया जाता है. किचन में अलग से स्वास्थ्यकर्मियों को खाना पाया जा रहा है.

ग्रुप डी के कर्मचारियों ने की भोजन की गुणवत्ता की शिकायत

इस बीच कुछ ग्रुप डी कर्मचारियों ने भोजन की गुणवत्ता व स्वाद को लेकर शिकायत की थी, जिसके कारण सोमवार सुबह से अस्पताल के एक अन्य कैंटीन से भोजन मंगवाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि यही से सुबह का नाश्ता व दोपहर का खाना मंगवाया जा रहा है, जबकि रात का भोजन किचन से भेजा जायेगा. किचन में करीब 52 कर्मचारी हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण अधिकतर कमर्चारी नहीं आ पा रहे हैं. इसलिए हमें भोजन तैयार करने में भी परेशानी हो रही है. अस्पताल के अन्य स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि पहले भोजन से अस्पताल के किचन पैक कर हम तक पहुंचाया जाता था. अब किसी तरह भोजन को अस्वास्थ्यकर तरीके से पॉलिथिन में पैक कर हम तक भेजा जा रहा है. समय पर खाना नहीं दिया जाता है. कई बात तो हमे घर से भोजन मंगवाना पड़ता है.

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पॉलिथिन पैक भोजन की जानकारी नहीं

भोजन को लेकर शिकायत मिली थी. इसके बाद ही एसएसकेएम के कैंटीन से भोजन मंगवाया जा रहा है, ताकि हमारे स्वास्थ्यकर्मियों को किसी तरह की परेशानी न हो. भोजन को पॉलिथिन में पैक कर भेजा जा रहा है इसकी सूचना मेरे पास नहीं है. सुबह में ब्रेड नहीं, सैंडविच दिया गया था.

प्रो. डॉ इंद्रनील विश्वास, अस्पताल अधीक्षक, कलकत्ता मेडिकल कॉलेज

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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