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धनबाद में पुलिस की नाक के नीचे हो रही है कोयला तस्करी, कहां-कहां से होती है चोरी

Updated at : 23 Dec 2022 8:47 AM (IST)
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धनबाद में पुलिस की नाक के नीचे हो रही है कोयला तस्करी, कहां-कहां से होती है चोरी

अलग-अलग क्षेत्रों में वैध-अवैध खदानों के दौरे में पाया कि बड़ी संख्या में लोग काेयला काटकर जगह-जगह जमा करते हैं. पता चला कि यह कोयला किसी डिपो या भट्ठे में इकट्ठा कर ट्रकों से दूसरी जगह भेजा जाता है.

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धनबाद जिला के कतरास, बाघमारा और झरिया कोयलांचल में कोयला चोरी नहीं थम रही है. तस्करों में पुलिस-प्रशासन का तनिक भी खौफ नहीं है. रात की कौन कहे, दिन के उजाले में भी लोग कोयला काटते और ढोते मिल जायेंगे. यह कोयला भट्ठों के अलावा जाली पेपर के सहारे अन्य प्रांतों में खपाया जाता है. कोयला काटनेवाले अक्सर होनेवाली घटनाओं से भी सबक नहीं लेते हैं. प्रभात खबर ने अलग-अलग क्षेत्रों में वैध-अवैध खदानों के दौरे में पाया कि बड़ी संख्या में लोग काेयला काटकर जगह-जगह जमा करते हैं. पता चला कि यह कोयला किसी डिपो या भट्ठे में इकट्ठा कर ट्रकों से दूसरी जगह भेजा जाता है. धंधे से जुड़े लोगों ने बताया कि तस्करी में छूट के बदले निर्धारित प्वाइंट पर उनसे पैसे वसूले जाते हैं. यह राशि अलग-अलग होती है.

कतरास इलाका : सुबह 06 बजे

सुबह के छह बज गये थे. यह देखने के लिए कि इतना कोयला कहा से आता है, जिस रास्ते भारी संख्या में लोग साइकिल से कोयला लेकर आ रहे थे उधर गये. इस क्रम में छोटकी बौआ बस्ती होते हुए गोंदूडीह कोल डंप कॉलोनी के रास्ते आगे बढ़ने पर दिखा कि गोंदूडीह पैच के ऊपर सैकड़ों की संख्या में लोग बोरों में कोयला भर रहे थे. सबकी साइकिल, बाइक व मोपेड वहीं खड़े थे. आगे कोई रास्ता नहीं था. आसपास कोई बस्ती भी नहीं थी. वहां पर तीन ऐसा स्थल दिखा, जहां सैकड़ों की संख्या में लोग कोयला चोरी में लगे थे. काफी भीड़ होने के बाद भी कोई शोरगुल नहीं था. सब चुपचाप अपने काम लगे हुए थे. कुछ स्थानीय तस्कर बाहरी कोयला चोरों को सहयोग कर रहे थे. वहां पर स्थानीय तस्कर ने हमारी टीम को रोका और लौट जाने को कहा. इस बीच वो आक्रामक हो रहा था, टीम के सदस्य उनसे रास्ता भटकने की बात कह लौट गये.

गोंदूडीह : सुबह आठ बजे

सुबह के आठ बज चुके थे. हम रंगुनी तालाब (भूली) पहुंचे. वहां पर दर्जनाधिक साइकिल वाले रुके थे. उनमें से एक ने पूछने पर बताया कि वो लोग भूली बी ब्लॉक, झारखंड मोड़, कशियाटांड़ होते हुए बरवाअड्डा, गोविंदपुर, टुंडी के विभिन्न भट्ठा में कोयला बेचते है. जिसकी जहां सेटिंग रहती है, वहां कोयला वो लोग गिरते हैं. उन्हें अच्छे पैसे मिल जाते हैं.

कहते हैं आसपास के दुकानदार

इस क्रम में टीम पहुंची बड़की बौआ स्थित एक चाय की दुकान पर. वहां पर नाम नहीं छापने की शर्त पर दुकानदार ने बताया कि इस रास्ते होकर कोयला चोरी का धंधा आम है. इन चोरों के खिलाफ जो बोलता है, उसकी सरेआम पिटाई कर दी जाती है. उसने लौट जाने की बात कहते हुए चेताया कि जरा सा भी शक होने पर सब कोयला चोर किसी की भी पिटाई करने लगते हैं. पुलिस व सीआइएसएफ जवान भी चुप रहते हैं.

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सुरक्षा की गारंटी के लिए अलग से पैसे लेते हैं

कुछ संगठित स्थानीय युवक भी इस धंधे में लिप्त हैं. कोयला चोरों को ओवरब्रिज पार कराने तक का इन लोगों का जिम्मा रहता है. रामधनी ने बताया कि स्थानीय लोग दिन रात परियोजना में कोयला की अवैध कटाई कर जमा करते हैं, फिर उसे मोटरसाइकिल व साइकिल वालों को सस्ते दामों में परियोजना के निकट ही बेच देते हैं. इस काम में काफी लोग लगे हुए हैं. पुलिस प्रशासन भी चुप है.

कतरास कांटा पहाड़ी प्रोजेक्ट मार्ग : पूर्वाह्न 11 बजे

बीसीसीएल कतरास क्षेत्र के कांटाहाड़ी के रास्ते में दो लड़की भुटू बाबू के बंगला के निकट परियोजना में कोयला की अवैध कटाई कर अपनी साइकिल में लाद कर ले जा रही थी. पूछने पर बताया कि घर के लिए ले जा रही हैं.

तस्कर मुहाने पर ही खरीद लेते हैं कोयला

डेको आउटसोर्सिंग के पास ही तस्कर वहां के ग्रामीणों से कोयला 100 रुपये झोड़ी (बड़ा) खरीद लेते हैं. फिर वो लोग उसे ट्रक व ट्रैक्टर वाले तस्कर को 500 रुपये झोड़ी के हिसाब से बेच देते हैं. झोड़ी में बात नहीं बनी, तो पांच रुपये किलो के हिसाब से खरीदकर 10 रुपये किलो के हिसाब से बेच देते हैं.

अंगारपथरा डेको आउटसोर्सिंग : पूर्वाह्न 11:30 बजे

डेको आउटसोर्सिंग में सौ से अधिक लोग अवैध रूप से कोयला कटाई में लगे थे. एक तरफ आउटसोर्सिंग कंपनी का काम चल रहा था, तो दूसरी ओर कोयला चोर खदान के अंदर अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार कोयला कटाई कर ऊपर मैदान में रख रहे थे. कई स्थानों पर कोयला का भंडार किया गया था. भारी संख्या में महिला-पुरुष व बच्चे कोयला काटने और ढोने में लगे हुए थे. तसवीर लेते देख एक युवक पास आया और बोला, काहे दादा काहे पेट पर लात मार रहे हैं. सब जी खा रहा है. इस दौरान दूर खड़ी महिलाएं चिल्ला-चिल्लाकर विरोध करने लगीं और हमे लौटना पड़ा.

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