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Chaturmas 2022: चातुर्मास आज से, जानें कब समाप्त होगा, इन 4 महीनों में वर्जित होते हैं ये शुभ कार्य

Updated at : 10 Jul 2022 7:33 AM (IST)
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Chaturmas 2022: चातुर्मास आज से, जानें कब समाप्त होगा, इन 4 महीनों में वर्जित होते हैं ये शुभ कार्य

Chaturmas 2022: चातुर्मास की शुरुआत आज यानी 10 जुलाई से हो रही है. चातुर्मास जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह चार महीनों का होता है जिसमें पूजा-पाठ को छोड़ कर सभी महत्वपूर्ण शुभ कार्य जैसे शादी-विवाह, उपनयन संस्कार आदि वर्जित होते हैं. यह समय पूजा, उपवास आदि के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.

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Chaturmas 2022: आज से चातुर्मास शुरू हो रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार चातुर्मास की शुरुआत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से होती है. इस दिन से भगवान विष्णु निद्रा योग में चले जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे चार महीने के लिए सो जाते हैं, इसलिए चातुर्मास (Chaturmas 2022) शुरू होता है. इन महीनों श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक के दौरान, सभी शुभ कार्य जैसे विवाह, सिर मुंडन, उद्घाटन आदि को रोक दिया जाता है. ऐसा माना जाता है कि चातुर्मास के दौरान शुभ कार्य करने से अपशकुन और प्रतिकूल परिणाम मिलते हैं. यह व्यक्ति के जीवन में मुश्किलें भी लाता है. इस बार देवशयनी एकादशी ((Devshayani Ekadashi 2022) 10 जुलाई को पड़ रही है. इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत हो रही है जो 4 नवंबर 2022 को समाप्त होगी.

चतुर्मास 2022 तिथियां (Chaturmas 2022 Date)

चतुर्मास 2022 तिथियां-

चातुर्मास आरंभ- 10 जुलाई से शुरू हो रहा है.

चातुर्मास समाप्त- 4 नवंबर को समाप्त हो रहा है.

Chaturmas 2022: चातुर्मास के 4 महीने

आषाढ़ माह: देवशयनी एकादशी से लेकर आषाढ़ पूर्णिमा तक 6 तिथियां
श्रावण माह: पूरा महीना यानी 30 तिथियां
भाद्रपद माह: पूरा महीना यानी 30 तिथियां
अश्विन माह: पूरा महीना यानी 30 तिथियां
कार्तिक माह: देवउठनी एकादशी तक.

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Chaturmas 2022: चातुर्मास के दौरान क्या न करें

चातुर्मास के दौरान शुभ कार्य वर्जित होते हैं लेकिन धार्मिक कार्य जारी रहते हैं. यह समय पूजा, उपवास आदि के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. कहा जाता है कि इस अवधि में मनुष्य किसी भी प्रकार के व्रत की शुरुआत कर सकता है और जो इस समय उपवास शुरू करते हैं उन्हें दुगना फल मिलता है.

  • इन 4 महीनों में विवाह समारोह, बच्चे का नामकरण, उद्घाटन, सिर मुंडवाना, जनेऊ आदि सभी शुभ कार्य वर्जित हैं.

  • चातुर्मास के दौरान लोगों को किसी से झूठ नहीं बोलना चाहिए.

  • इस व्रत के दौरान दूध, तेल, बैगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मांस और शराब आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.

  • बिस्तर के बजाय जमीन पर ही सोना चाहिए, ऐसा करने से भगवान सूर्य प्रसन्न होेते हैं.

  • इन चार महीनों के दौरान प्रतिदिन तुलसी की पूजा करने से दरिद्रता समाप्त होती है.

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