Navratri, Ram Navmi 2021 Puja Vidhi, Shubh Muhurat : दुर्गा अष्टमी की पूजा कैसे करें, कन्या पूजन से लेकर रामनवमी तक की तैयारी के लिए विस्तार से पढ़ें ये खबर
Chaitra Navratri 2021, Durga Ashtami, Ram Navmi 2021 Puja Vidhi, Kanya Pujan, Hawan Samagri : आज नवरात्रि का आठवां दिन है. माता जी के भक्त आज नवरात्रि के आठवें दिन हवन कर कन्या पूजन करते हैं. इसके साथ ही इसी दिन अपना उपवास भी खोल लेते हैं. नवरात्रि अष्टमी के दिन मां महागौरी का पूजन किया जाता है. मान्यता है कि इनकी पूजा से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं. इसे दुर्गा अष्टमी और महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. वहीं कल राम नवमी है. यहां जानिए महाअष्टमी और राम नवमी के दिन पूजा करने की विधि, हवन विधि, पूजा मुहूर्त, कन्या पूजन के नियम, कथा और आरती…
मां दुर्गा की आठवीं शक्ति हैं महागौरी
महागौरी को एक सौम्य देवी माना गया है. महागौरी को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति भी कहा गया है. महागौरी की चार भुजाएं हैं और ये वृषभ की सवारी करती हैं. इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है. ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा है.
पूजा सामग्री
गंगा जल, शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही, पंचामृत, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र और इसके साथ ही आभूषण, पान के पत्ते, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, धूप, कपूर, लौंग और अगरबत्ती आदि का प्रयोग पूजा में करना चाहिए.
कोरोना काल में सरल विधि से करें हवन
नवरात्रि हवन की विधि बहुत ही सरल है. इसके लिए जरूरी नहीं है कि कोई ब्राह्मण ही उपलब्ध हो. आप इस विधि को समझकर स्वयं हवन कर सकते हैं.
पहले अपनी नियमित पूजा कर लें, फिर हवन की तैयारी करें.
हवनकुंड वेदी को साफ करें. इसके बाद कुण्ड का लेपन गोबर जल आदि से करें.
फिर आम की चौकोर लकड़ी हवन के लिए लगा लें.
नीचे में कपूर रखकर जला दें.
अग्नि प्रज्जवलित हो जाए तो चारों ओर समिधाएं लगाएं.
हवनकुंड की अग्नि प्रज्जवलित हो जाए तो पहले घी की आहुतियां दी जाती हैं.
इन मंत्रों से शुद्ध घी की आहुति दें
ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये न मम्।
ॐ इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय न मम्।
ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये न मम।
ॐ सोमाय स्वाहा। इदं सोमाय न मम।
ॐ भूः स्वाहा।
इन मंत्रों से हवन शुरू करें
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा
ऊँ चंद्रयसे स्वाहा
ऊं भौमाय नमः स्वाहा
ऊँ बुधाय नमः स्वाहा
ऊँ गुरवे नमः स्वाहा
ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा
ऊँ शनये नमः स्वाहा
ऊँ राहवे नमः स्वाहा
ऊँ केतवे नमः स्वाहा
इसके बाद गायत्री मंत्र से आहुति दें
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
फिर आप इन मंत्रों से हवन करें
ऊं गणेशाय नम: स्वाहा
ऊं गौरये नम: स्वाहा
ऊं वरुणाय नम: स्वाहा
ऊं दुर्गाय नम: स्वाहा
ऊं महाकालिकाय नम: स्वाहा
ऊं हनुमते नम: स्वाहा
ऊं भैरवाय नम: स्वाहा
ऊं कुल देवताय नम: स्वाहा
ऊं स्थान देवताय नम: स्वाहा
ऊं ब्रह्माय नम: स्वाहा
ऊं विष्णुवे नम: स्वाहा
ऊं शिवाय नम: स्वाहाऊं जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुते स्वाहा
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए