Emergency Brake: ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक क्या है, जानें किन हालतों में हो सकता है इसका इस्तेमाल
Published by : Shaurya Punj Updated At : 12 Oct 2023 7:19 AM
North East Express Train Derails,Emergency Brake,Bihar Train Accident: बिहार के बक्सर में रघुनाथपुर स्टेशन पर बुधवार रात को गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन जाने वाली नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. बताया जा रहा है कि ये ट्रेन आनंद विहार से आ रही थी.
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नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस रात 9.35 बजे बक्सर जिले के रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास डीरेल
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जानें अचानक से ब्रेक लगाया जाए तो क्या होगा
North East Express Train Derails,Emergency Brake.Bihar Train Accident: बिहार के बक्सर (Buxar) जिले में बड़ा रेल हादसा हुआ है.दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन से गुवाहाटी के कामाख्या स्टेशन जाने वाली नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस रात 9.35 बजे बक्सर जिले के रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास डीरेल हो गई. कई लोगों की मौत की सूचना भी मिल रही है, हालांकि प्रशासन की तरफ से अब तक छह लोगों के मौत की पुष्टि की गई है. जिला प्रशासन ने इस हादसे में 60 से 70 लोगों के घायल होने की पुष्टि भी की है. रेल मंत्री ने ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों के प्रति संवेदना जताई. उन्होंने कहा, ”अपूरणीय क्षति के लिए गहरी संवेदनाएं. पटरी से उतरने के कारण का पता लगाया जाएगा.”
अनुमंडलीय अस्पताल जगदीशपुर तथा शाहपुर अस्पताल, जिला भोजपुर में चिकित्सा पदाधिकारी सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी बचाव व राहत कार्यों को लेकर तैयार है। रोहतास, बक्सर व भोजपुर जिलों की एंबुलेंस को घटनास्थल पर भेज दिया गया है। #TrainAccident #Bihar pic.twitter.com/ViZVpG2Xw5
— Office of Tejashwi Yadav (@TejashwiOffice) October 11, 2023
आपको ये जानने की इच्छा जरूर होगी की ट्रेन में अचानक से ब्रेक लगाया जाए तो क्या होगा. ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम के बारे में. क्या आप जानते है कि ट्रेन चलाने वाला ड्राइवर यानि लोकोपायलट ट्रेन को अचानक क्यों नहीं रोक पाता है. ट्रेन में आखिर कौन सा ब्रेक होता है. कितने ब्रेक होते हैं. ब्रेक लगाने के बाद ट्रेन कितनी देर में रूकती है. ट्रेन का इमरजेंसी ब्रेक (Emergency Brake) किसे कहते है. आइए जानते है ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम के बारे में…
ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक कैसे काम करता है?
जब कभी ट्रेन में पायलट द्वारा इमरजेंसी ब्रेक लगाया जाता है, तो ट्रेन सही सलामत रुक जाती है. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इसी emergency ब्रेक को लगाने से ट्रेन derail भी हो जाती है. बतादें कि ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम एयर प्रेसर के द्वारा काम करती है. जहां ट्रेन के नीचे पूरे कोच में दो पाइप बिछाई जाती है. जिसे ब्रेक पाइप और फीड पाइप कहा जाता है. इन दोनों पाइपों में लोकमोटिव के अंदर लगे कम्प्रेसर कि सहायता से 5.6 केजी का प्रेसर मैन्टेन किया जाता है. जिससे ब्रेक सिलिन्डर में लगा पिस्टन ब्रेक शुज को खिच कर रखता है और ब्रेक रिलीज रहते है. जब ट्रेन में ब्रेक अप्लाइ करनी होती है तो लोकोपायलट कैबिन से एयर का प्रेसर को कम करते है. ब्रेक पिस्टन ब्रेक शुज को अंदर धकेलता है और शुज पहिये से चिपक जाता है, जिससे ब्रेक लग जाती है.
आइये अब अध्ययन करते हैं कि ट्रेन में कितने प्रकार की ब्रेक होती हैं?
ब्रेक्स को रेलवे ट्रेनों के कोचों पर धीमा, नियंत्रण त्वरण को सक्षम करने या पार्क किए जाने पर खड़े रखने के लिए उपयोग किया जाता है.
जबकि बुनियादी सिद्धांत सड़क वाहन के समान है, लेकिन कई जुड़े हुए रेल के डिब्बों को नियंत्रित करने की आवश्यकता और परिचालन सुविधाएं ट्रेन में अधिक जटिल होती हैं. किसी भी ब्रेकिंग सिस्टम के नियंत्रण में किसी भी वाहन में ब्रेकिंग एक्शन को नियंत्रित करने वाले महत्वपूर्ण कारक दबाव, संपर्क में सतह क्षेत्र, ताप उत्पादन की मात्रा और ब्रेकिंग सामग्री का उपयोग किया जाता है.
उनके सक्रियण की विधि के अनुसार, ब्रेक को चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. वायवीय ब्रेक (Pneumatic Brake)
a) वैक्यूम ब्रेक (Vacuum Brake)
b) संपीडित एयर ब्रेक (Compressed Air Brake)
2. Electropneumatic brakes
3. मैकेनिकल ब्रेक (Mechanical Brake)
4. विद्युत चुम्बकीय ब्रेक (Electromagnetic Brake)
क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के ड्राईवर (लोकोपायलट) को ब्रेक लगाना कब जरुरी होता है?
ट्रेन को किस समय चलना है और कब रुकना है, ये लोकोपायलट सिग्नल और गार्ड के हिसाब से तय करता है. रेलवे में तीन सिग्नल होते हैं: हरा, पीला और लाल. हरे सिग्नल का मतलब है ट्रेन का अपनी स्पीड पर चलना, पीला सिग्नल मिलने पर लोकोपायलट ट्रेन की स्पीड को धीमी करना शुरू करता है, इसके लिए वह दो ब्रेक का इस्तेमाल करता है, एक इंजन के लिए और दूसरा पूरी ट्रेन के लिए. जैसा की ऊपर हम देख चुके है कि ट्रेन के हर डिब्बे और पहिये पर ब्रेक होता है और ये सभी ब्रेक पाइप से जुड़े होते हैं. लाल सिग्नल मिलने पर उसको ट्रेन को रोकना होता है. हम आपको बता दें कि ट्रेन को रफ्तार से चलाना, 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलाना आसान होता है लेकिन ब्रेक लगाना काफी मुश्किल.
क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के ड्राईवर (लोकोपायलट) को ब्रेक लगाना कब जरुरी होता है?
ट्रेन को किस समय चलना है और कब रुकना है, ये लोकोपायलट सिग्नल और गार्ड के हिसाब से तय करता है. रेलवे में तीन सिग्नल होते हैं: हरा, पीला और लाल. हरे सिग्नल का मतलब है ट्रेन का अपनी स्पीड पर चलना, पीला सिग्नल मिलने पर लोकोपायलट ट्रेन की स्पीड को धीमी करना शुरू करता है, इसके लिए वह दो ब्रेक का इस्तेमाल करता है, एक इंजन के लिए और दूसरा पूरी ट्रेन के लिए. जैसा की ऊपर हम देख चुके है कि ट्रेन के हर डिब्बे और पहिये पर ब्रेक होता है और ये सभी ब्रेक पाइप से जुड़े होते हैं. लाल सिग्नल मिलने पर उसको ट्रेन को रोकना होता है. हम आपको बता दें कि ट्रेन को रफ्तार से चलाना, 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलाना आसान होता है लेकिन ब्रेक लगाना काफी मुश्किल.
इमरजेंसी ब्रेक ट्रेन में कहां होता है और कब लगाया जाता है?
इमरजेंसी मतलब आपात स्थिति. लोकोपायलट तब इमरजेंसी ब्रेक लगाता है जब अचानक से कोई जानवर या कोई व्यक्ति सामने आ जाए, पटरी में कुछ खराबी दिखे इत्यादि. ये ब्रेक लोकोपायलट के बगल में ही होता है और उसी लीवर से लगता है जिससे सामान्य ब्रेक. लीवर को अधिक समय के लिए खीचने पर इमरजेंसी ब्रेक लग जाता है. अब सवाल उठता है कि इमरजेंसी ब्रेक के लगाने पर कितनी देर में ट्रेन रूकती है.
अगर ट्रेन 150 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चल रही हो और ऐसे में लोकोपायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़े तो ब्रेक के लगते ही, ब्रेक पाइप का प्रेशर पूरी तरह से खत्म हो जाएगा और गाड़ी के हर पहिये पर लगा ब्रेक शू पूरी ताकत के साथ रगड़ खाने लगेगा. तब पर भी ट्रेन लगभग 1200 से 1500 मीटर तक चलने के बाद रुक पाएगी. मालगाड़ी में इमरजेंसी ब्रेक लगाने पर गाड़ी लगभग 1100 से 1200 मीटर जाकर रूकती है ये निर्भर करता है कि उसमें कितना माल है और डेमू (DEMU) गाड़ी को रोकने के लिए 625 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. DEMU का अर्थ है डीजल (D), इंजन (E), मल्टिपल (M) और यूनिट (U). इस तरह की ट्रेन में अलग से इंजन नहीं होता है. ट्रेन के पहले और आखिरी डिब्बे में दो छोटे-छोटे इंजन लगे होते हैं. ये लोकल ट्रेन होती है और दो शहरों के बीच कम रूट पर चलती है. इनकी रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रतिघंटा तक होती है.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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