Ayodhya Ram Mandir Bhumi Pujan : 1992 में अयोध्या में कार सेवा के दौरान घायल हुए थे विनय, कहा- धन्य हैं प्रभु, हम काम आ सके
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 05 Aug 2020 4:55 PM
Ayodhya me ram mandir ka bhumi pujan गोपालगंज : अयोध्या में श्री राम मंदिर के भूमि पूजन से रोम-रोम खिल उठा. धन्य हैं प्रभु कि हम आपके काम आ सके. तब उम्मीद नहीं थी कि हमारे जीवनकाल में मंदिर का निर्माण हो पायेगा, लेकिन अब यह तय हो गया है कि हमारे सामने ही मंदिर बनकर तैयार हो जायेगा. इसके पीछे माध्यम भले ही कोई रहा हो, लेकिन यह तो तय है कि प्रभु श्रीराम की मर्जी के बिना कुछ हो ही नहीं सकता.
Ayodhya me ram mandir ka bhumi pujan गोपालगंज : अयोध्या में श्री राम मंदिर के भूमि पूजन से रोम-रोम खिल उठा. धन्य हैं प्रभु कि हम आपके काम आ सके. तब उम्मीद नहीं थी कि हमारे जीवनकाल में मंदिर का निर्माण हो पायेगा, लेकिन अब यह तय हो गया है कि हमारे सामने ही मंदिर बनकर तैयार हो जायेगा. इसके पीछे माध्यम भले ही कोई रहा हो, लेकिन यह तो तय है कि प्रभु श्रीराम की मर्जी के बिना कुछ हो ही नहीं सकता.
न्यायालय का फैसला भी शायद राम की प्रेरणा से ही आया और उन्हीं की प्रेरणा से प्रधानमंत्री मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किये. कोरोना काल में भले ही हमें जाने का मौका न मिले, लेकिन मैंने मान लिया, वहां हृदय से मौजूद रहा. यह कहते हुए आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे. ये खुशी के आंसू थे कुचायकोट थाने के गोपालपुर परसौनी गांव के रहने वाले स्व रामचंद्र राय के पुत्र विनय राय के. अयोध्या में श्री राम मंदिर के भूमि पूजन से से जुड़ी हर Latest News in Hindi से अपडेट रहने के लिए बने रहें हमारे साथ.
विनय ने अयोध्या भूमि पूजन के दौरान अपनी बुजुर्ग माता उमा देवी, पत्नी मैत्रेयी देवी के साथ घर पर ही श्री राम की आरती पूजा-पाठ की. टीवी पर लाइव देख अभिभूत हो उठे. विनय ने बताया कि आज जीवन का वह संकल्प भी पूरा हो गया जो 1992 में लिया था. मंदिर की परिकल्पना जब दिमाग में उकेरती है, तो रोम-रोम खिल उठता है.
आयोध्या में कार सेवा के लिए गोपालगंज से विनय राय के साथ छवही के रहने वाले बच्चा सिंह बचनेश, ढ़ेबवा के शिक्षक सोमेश्वर मिश्र, विजय सिंह समेत तीन दर्जन लोग शामिल हुए थे. पांच दिन पूर्व से ही जाकर आयोध्या में रह रहे थे. 6 दिसंबर 1992 को कार सेवा के दौरान विनय राय गंभीर रूप से घायल हो गये. जब उनको होश आया, तो वे फैजाबाद अस्पताल में भर्ती थे. बाकी लोग पैदल भागकर चले आये. विनय राय को फैजाबाद जेल भेज दिया गया. जेल से स्थिति बिगड़ने पर विनय राय को किंगजार मेडिकल कॉलेज लखनऊ भेजा गया. जहां ठीक होने के बाद लखनऊ जेल में शिफ्ट किया गया. वहां नौ जनवरी 1993 को जमानत पर रिहा हुए.
लखनऊ जेल में ही सीबीआइ ने पूछताछ की. उसके बाद 40 लोगों के विरूद्ध केस दर्ज किया. जिसमें लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी के साथ विनय राय जो बिहार -झारखंड में एकलौता व्यक्ति हैं, आरोपित बनाया गया. बाद में नौ और लोगों को उस कांड में जोड़ा गया. 49 लोगों पर ट्रायल सीबीआइ कोर्ट में चल रहा है. हालांकि, विनय 1990 में सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनायेंगे के नारों के साथ गोपालगंज में जुलूस लेकर निकले थे, उस समय भी गिरफ्तार कर उन्हें कैंप जेल में डाल दिया गया था.
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