क्या आप भी QR कोड को ‘स्कैनर’ कहते हैं? UPI यूजर्स की जुबान पर क्यों चढ़ गया यह शब्द?

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UPI पेमेंट करते वक्त हर कोई करता है ये गलती // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

ऑनलाइन पेमेंट करते समय क्या आप भी दुकान पर स्कैनर मांगते हैं? जानिए कैसे मोबाइल ऐप्स और आम बोलचाल की आदतों ने QR कोड का नाम बदलकर उसे हमेशा के लिए स्कैनर बना दिया.

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भारत में डिजिटल क्रांति आने के बाद से हमारी जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. आज सब्जी की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह ऑनलाइन पेमेंट का बोलबाला है. लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि आम तौर पर जब कोई ग्राहक दुकान पर पैसे देने जाता है, तो वह अमूमन ‘QR Code’ दिखाने के बजाय ‘स्कैनर’ मांगता है? पहली बार सुनने में यह भले ही एक आम बात लगे, लेकिन इसके पीछे इंसानी दिमाग की एक बहुत ही दिलचस्प साइकोलॉजी और हमारी भाषा बदलने का एक बड़ा कारण छिपा हुआ है. आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों तकनीकी रूप से गलत होने के बाद भी यह शब्द हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है.

कैसे एक ‘ऐक्शन’ बन गया दुकानदारों की पहचान

तकनीक की दुनिया में QR कोड एक स्थिर छवि (Static Image) होती है और हमारा मोबाइल फोन उसे पढ़ने के लिए ‘स्कैनर’ का काम करता है. लेकिन भारत के बाजारों में आम बोलचाल का तरीका हमेशा से थोड़ा अलग रहा है. यहां लोग अक्सर किसी तकनीक का असली नाम सीखने के बजाय, उससे जुड़े काम या ऐक्शन को ही उस चीज का नाम दे देते हैं. चूंकि ग्राहक अपने फोन से उस कोड को ‘स्कैन’ करते हैं, इसलिए धीरे-धीरे वह पूरा स्टैंड ही लोगों की नजर में ‘स्कैनर’ बन गया. आज आलम यह है कि बिना किसी हिचकिचाहट के दुकानदार भी समझ जाते हैं कि ग्राहक असल में क्या मांग रहा है. यह भी पढ़ें: OTP के लिए अब बच्चों को नहीं करना होगा इंतजार, Paytm के नये फीचर से आसान होगा UPI पेमेंट

मोबाइल ऐप्स ने और बढ़ा दिया यह कन्फ्यूजन?

इस भाषाई बदलाव को बढ़ावा देने में हमारे स्मार्टफोन्स और पेमेंट ऐप्स ने भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई है. जब भी हमें किसी को पैसे भेजने होते हैं, तो हम पेटीएम, फोनपे या गूगल पे खोलते हैं. इन ऐप्स में पेमेंट करने वाले बटन पर साफ तौर पर ‘QR Scanner’ या ‘Scan Any QR’ लिखा होता है. हर दिन स्क्रीन पर इस शब्द को बार-बार देखने की वजह से लोगों के दिमाग में कोड और स्कैनर के बीच का अंतर पूरी तरह से खत्म हो गया. नतीजा यह हुआ कि लोगों ने दुकान पर रखे उस प्लास्टिक स्टैंड को ही सीधे स्कैनर पुकारना शुरू कर दिया.

बाजार में समझदारी का नया नियम

व्यापार और बाजार हमेशा से बहुत ही व्यावहारिक तरीके से काम करते हैं. यहां बातचीत का मकसद सिर्फ अपनी बात को कम से कम शब्दों में सामने वाले को समझाना होता है. जब कोई ग्राहक कहता है कि “भैया जरा स्कैनर देना”, तो दुकानदार को तुरंत समझ आ जाता है कि उसे पेमेंट लेनी है. अगर इस जगह पर कोई तकनीकी रूप से बिल्कुल सही होकर ‘क्विक रिस्पॉन्स कोड’ यानी QR कोड मांगे, तो शायद बातचीत थोड़ी लंबी या अजीब हो सकती है. यही वजह है कि दोनों पक्षों के लिए ‘स्कैनर’ बोलना सबसे आसान और समय बचाने वाला जरिया बन गया है. यह भी पढ़ें: चाय, ऑटो और लोकल शॉपिंग के लिए बार-बार UPI PIN डालने की जरूरत नहीं, जानिए आसान तरीका

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राजीव कुमार

लेखक के बारे में

By राजीव कुमार

राजीव, हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और प्रभातखबर डॉट कॉम में कार्यरत हैं. अपने 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारीय अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. आसान भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी कंटेंट राइटिंग की सबसे बड़ी पहचान है.

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जमशेदपुर में जन्मे राजीव की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद उन्होंने भारतीय विद्या भवन, पुणे से जर्नलिज्म ऐंड मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उनको आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद करती है.

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