क्या आप जानते हैं 'Google' की कहानी? कहां से आया गूगल का नाम, कैसे हुई इसकी शुरुआत

Edited by Rajeev Kumar
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Story of Google

Story of Google: आज हर कोई गूगल का इस्तेमाल करता है.लेकिन कोई भी गूगल के बारे में नहीं जानता. आज के इस आर्टिकल में जानिए गूगल की शुरुआत से लेकर अब तक का सफर.

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Story of Google: किताबों की दुनिया से निकल कर अब हम टेक्नोलॉजी की दुनिया में आ गए हैं. पहले किसी चीज के बारे में जानने के लिए हम किताबों का सहारा लेते थे और अब गूगल का. हम दिन में एक बार तो जरूर गूगल सर्च इंजन का इस्तेमाल कर ही लेते हैं. बस एक शब्द लिखते हैं और गूगल हमें उस टॉपिक से जुड़ी हजारों जानकारी हमें दिखा देता है. पढ़ाई से लेकर देश-दुनिया, एंटरटेनमेंट, कुकिंग और स्पोर्ट्स से लेकर हर चीज की जानकारी हम आसानी से आज गूगल से ले सकते हैं. शायद ही ऐसी कोई जनकारी होगी जिसके बारे में गूगल नहीं जानता होगा.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे काम आने वाला यह गूगल आखिर बना कैसे? इस तरह की टेक्नोलॉजी को बनाने के पीछे किसकी सोच थी. नहीं न, तो आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे गूगल की कहानी…

जानकारी कहां से लाता है गूगल

सबसे पहले हम जानते हैं की आखिर गूगल जानकारी लाता कहां से है? दरअसल, गूगल एक सॉफ्टवेयर वेब क्रॉलर का इस्तेमाल करता है. यह सॉफ्टवेयर तरह-तरह की वेब पेजों को खोजता है और उनमें मौजूद लिंक्स को फॉलो कर उसका डेटा इकट्ठा करता है. इसके बाद उस डेटा को गूगल के इंडेक्स में जोड़ने का काम करता है. ऐसे में जब हम गूगल पर कुछ चीजें सर्च करते हैं तो फिर गूगल हमारे सवाल को अपने इंडेक्स में खोजता है और फिर हमें उसका जवाब देता है.

ऐसे हुई Google की खोज

Google की खोज दो पीएचडी (PHD) स्टूडेंट्स Larry Page और Sergey Brian ने की थी. साल 1996 के दौरान कैलिफोर्निया के स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में PHD की पढ़ाई कर रहे Larry Page और Sergey Brian ने Google को एक छोटे प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया. दोनों ने साथ मिलकर Google.stanford.edu सर्च इंजन बनाई. जिसका नाम इन्होंने Backrub रखा था.

Google का मतलब

जानकारी के अनुसार, 1997 में Google की शुरुआत करने के दौरान Larry Page और Sergey Brian ने अपने इस छोटे प्रोजेक्ट का नाम Backrub से बदलकर “Google” रखा. Google शब्द मैथ्स से जुड़ा हुआ “Googol” से प्रेरित था. जिसका मतलब नंबर के पीछे 100 जीरो से है. “Google” को शरू करने के पीछे Larry Page और Sergey Brian का मकसद सारी जानकारियों को एक जगह इकट्ठा करना था. लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि उनका ये छोटा सा प्रोजेक्ट आज सभी की जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा बन जाएगा. इतना ही नहीं, आज गूगल दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन भी है. लेकिन डोमेन रजिस्टर करने के दौरान Googol को गलती से Google लिख दिया गया. जिसके बाद से यह Google के नाम से फेमस हो गया.

पहला डूडल होमपेज बना ‘Google’

इसके बाद 1998 में कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क में Google का पहला ऑफिस खोला गया. जहां से गूगल इंक की शुरुआत आधिकारिक तौर पर की गई. दुनिया भर में इसने अपनी एक अलग पहचान बना ली. इसी साल Google का पहला डूडल होमपेज (Doodle Homepage) बनाया गया. जिसके एक साल बाद 1999 में कंपनी ने मेनलो पार्क से गूगल ऑफिस को कैलिफोर्निया के पालो अल्टो में शिफ्ट कर दिया.

इसके बाद Google ने साल 2000 में गूगल ऐडवर्ड्स (Google AdWords) की शुरुआत की. जिसके बाद देखते ही देखते ऑनलाइन एड (Online Advertising) देने वाली सबसे बड़ी कंपनी Google बन गई. जिसके बाद अपनी सेवाओं का विस्तार करते हुए गूगल ने दुनिया को अप्रैल 2004 में Gmail फिर 2005 में Google Map का तोहफा दिया. इसके बाद साल साल 2006 में दुनिया का सबसे बड़ा वीडियो प्लेटफ़ॉर्म “यूट्यूब” (YouTube) अपने नाम कर लिया. 2007 में Google ने एंड्रायड (Android) को खरीद लिया, जो आज स्मार्टफोन का सबसे बढ़िया ऑपरेटिंग सिस्टम है. इसके बाद Google ने 2008 में Chrome को लॉन्च किया.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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