बेंगलुरु ट्रैफिक से परेशान यात्री को जब दिखा DigiYatra का जादू, मिनटों में पूरी हुई बोर्डिंग
सवा दो घंटे सड़क पर फंसा रहा यात्री, फिर 9 मिनट में ऐसे पकड़ी फ्लाइट / सिम्बॉलिक पिक एआई से बनी
बेंगलुरु में सवा दो घंटे ट्रैफिक में फंसने के बाद फ्लाइट छूटने का डर सता रहा था. लेकिन DigiYatra तकनीक की मदद से केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट के गेट तक पहुंचने में लगे सिर्फ 9 मिनट.
बेंगलुरु के भीषण ट्रैफिक को लेकर अक्सर नए-नए किस्से सामने आते रहते हैं, लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने शहर की बुनियादी सुविधाओं का एक ऐसा विरोधाभास उजागर किया है जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया है. इंदिरा नगर से केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए निकले नितिन शर्मा नाम के एक यात्री को बारिश के कारण जलभराव और भीषण जाम से जूझना पड़ा. सवा दो घंटे तक सड़क पर गाड़ियों के लंबे काफिले में फंसे रहने के बाद जब वह किसी तरह एयरपोर्ट पहुंचे, तो उन्हें लगा कि उनकी फ्लाइट छूट चुकी होगी. हालांकि, एयरपोर्ट परिसर में कदम रखते ही कुछ ऐसा चमत्कारिक मोड़ आया जिसने नितिन समेत सोशल मीडिया के लाखों यूजर्स को हैरत में डाल दिया.
सड़क पर 135 मिनट की जंग और छूटने की कगार पर फ्लाइट
नितिन शर्मा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस वाकये को साझा करते हुए बताया कि बारिश की वजह से सड़कें पूरी तरह ठप हो चुकी थीं. आमतौर पर तय समय में पूरी होने वाली दूरी को तय करने में उन्हें 2 घंटे और 15 मिनट (135 मिनट) का लंबा वक्त लग गया. एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें पूरा यकीन हो गया था कि इस भारी ट्रैफिक के चलते उनकी फ्लाइट मिस होना तय है और उनका सफर यहीं थम जाएगा.
देखें वायरल पोस्ट:-
DigiYatra का जादू: टर्मिनल से गेट तक केवल 9 मिनट
निराशा के बीच जब नितिन आखिरकार केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के एंट्री गेट पर पहुंचे, तो असली ट्विस्ट सामने आया. एयरपोर्ट में एंट्री करने के बाद बोर्डिंग गेट तक पहुंचने में उन्हें महज 9 मिनट का समय लगा. इतनी तेज प्रक्रिया देखकर वे खुद हैरान रह गए. इस त्वरित क्लीयरेंस और सुचारू अनुभव के लिए उन्होंने भारत सरकार के आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म DigiYatra और एयरपोर्ट के कुशल ऑपरेशन्स टीम की जमकर तारीफ की.
'तीसरे दर्जे का फिजिकल इंफ्रा, वर्ल्ड-क्लास डिजिटल नेटवर्क'
अपनी पोस्ट में नितिन शर्मा ने बेंगलुरु की ट्रैफिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए एक विचारणीय टिप्पणी लिखी. उन्होंने लिखा कि एक ऐसे शहर में जहां की भौतिक बुनियादी ढांचागत स्थिति बेहद निराशाजनक है, वहां विश्वस्तरीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण जीवन कुछ हद तक सहन करने योग्य बन पाता है. उनकी यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और इसे 70,000 से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं.
बेंगलुरु की दो अलग तस्वीरों को दर्शाती वायरल घटना
यह पूरा मामला बेंगलुरु शहर के दो बिल्कुल विपरीत पहलुओं को बेहद स्पष्ट रूप से उजागर करता है. एक तरफ शहर की खस्ताहाल सड़कें और बारिश में चरमराती ट्रैफिक व्यवस्था है जो यात्रियों का घंटों समय बर्बाद करती है, तो दूसरी तरफ आधुनिक तकनीक से लैस केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट का तेज-तर्रार मैनेजमेंट है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बेंगलुरु में अब फ्लाइट में सफर करना कठिन नहीं रहा, बल्कि एयरपोर्ट तक पहुंचना असली चुनौती बन चुका है.
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