एंथ्रोपिक रिसर्च का दावा: भाषा बदलते ही बदल जाता है AI का व्यवहार, हिंदी में दिखाता है ज्यादा अपनापन

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Photo : AI

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एक नई रिसर्च में सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट अलग-अलग भाषाओं में अपना मिजाज बदल लेते हैं. एआई चैटबॉट 'क्लॉड' हिंदी और अरबी में बातचीत के दौरान ज्यादा मददगार और संवेदनशील पाया गया है, जबकि अंग्रेजी में इसका रवैया फैक्ट-बेस्ड होता है.

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Anthropic research : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चैटबॉट को लेकर अब तक यह माना जाता था कि वे हर भाषा में एक जैसा ही जवाब देते हैं, लेकिन एक नई रिसर्च ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. एआई कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) की नवीनतम रिसर्च के अनुसार, उनका प्रमुख चैटबॉट 'क्लॉड' अलग-अलग भाषाओं और मिजाज के हिसाब से अपना व्यवहार बदल लेता है. वैज्ञानिकों ने क्लॉड द्वारा व्यक्त की जाने वाली 3,307 मानवीय वैल्यूज का बारीकी से विश्लेषण किया. इस शोध में सामने आया कि हिंदी और अरबी भाषा में क्लॉड के जवाब बेहद गर्मजोशी, आदर और सहानुभूति से भरे होते हैं, जबकि अंग्रेजी और रूसी में उसका रवैया पूरी तरह विश्लेषणात्मक, सटीक और फैक्ट-बेस्ड (तथ्यों पर आधारित) हो जाता है.

यह सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि संस्कृति का आईना है

शोधकर्ताओं के मुताबिक, एआई के इस बदलते व्यवहार का कारण कोई भेदभाव नहीं है, बल्कि यह उस भाषा की सांस्कृतिक बुनावट को दर्शाता है. यह बदलाव विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध ट्रेनिंग डेटा और उनकी अंतर्निहित संवाद शैली के कारण दिखाई दे रहा है. रिसर्च के अनुसार, क्लॉड हिंदी और अरबी में अधिक सहानुभूतिपूर्ण और मददगार रहता है. वहीं, दूसरी ओर अंग्रेजी और रूसी में उसका व्यवहार केवल तथ्यों पर आधारित होता है. अगर वह अपनी गलती तुरंत स्वीकार करता है, तो इंडोनेशियाई भाषा में वह अत्यधिक आत्मविश्वास दिखाता है. यह व्यवहार सीधे तौर पर उस भाषा को बोलने वाले समाज की संस्कृति से मेल खाता है.

भारत बना एंथ्रोपिक का दूसरा सबसे बड़ा AI हब

इस रिपोर्ट में भारत को लेकर भी एक बड़ा दावा किया गया है. अमेरिकी बाजार के बाद भारत अब एंथ्रोपिक का दूसरा सबसे बड़ा ग्लोबल मार्केट बन गया है. कंपनी के कुल वैश्विक इस्तेमाल का 5.8 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत से आ रहा है. भारतीय उपभोक्ताओं के तेजी से बढ़ते झुकाव के चलते पिछले चार महीनों में भारत में कंपनी का रेवेन्यू रन रेट (कमाई की रफ्तार) भी दोगुना हो गया है. इस बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कंपनी ने बेंगलुरु में ऑफिस खोलकर रेज़रपे जैसी बड़ी भारतीय फिनटेक कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारियां भी शुरू कर दी हैं.

हिंदी भाषी यूजर्स के लिए दोहरा फायदा

विशेषज्ञों के मुताबिक, हिंदी भाषा में इस तरह का भावनात्मक रूप एआई की दुनिया में एक बड़ा बदलाव है. वर्तमान में इंटरनेट पर हिंदी का डेटा अंग्रेजी के मुकाबले भले ही कम है, लेकिन एआई का यह 'अपनापन' और 'मददगार रवैया' हिंदी भाषी यूजर्स को तकनीक से जोड़ने में बहुत मददगार साबित होगा. यह रिसर्च साबित करती है कि भविष्य में एआई सिर्फ एक मशीन की तरह नहीं, बल्कि इंसानी भावनाओं और संस्कृतियों को समझकर उसके अनुरूप संवाद करने में सक्षम हो रहा है.


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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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