आज किसी भी सवाल का जवाब चाहिए होता है, तो हम अब गूगल की जगह सीधे ChatGPT, Grok और Gemini जैसे AI टूल्स से पूछने लगे हैं. जैसे-जैसे ये AI चैटबॉट्स हमारे रोजमर्रा के काम और पर्सनल इस्तेमाल का हिस्सा बनते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उनकी सीमाएं समझना भी जरूरी हो गया है. हमें यह समझना चाहिए कि ये टूल्स मदद के लिए बनाए गए हैं, न कि इंसानी सोच या फैसले की जगह लेने के लिए.
कई बार अनजाने में ऐसे सवाल पूछ लिए जाते हैं, जो आगे चलकर प्राइवेसी से जुड़ा खतरा बन सकते हैं. इसलिए आज हम आपको उन 5 बातों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें AI चैटबॉट्स से पूछने से आपको बचना चाहिए.
मेडिकल बीमारी या इलाज से जुड़ी सलाह पूछने से बचें
आपको ये बात गांठ बांध लेनी पड़ेगी कि AI चैटबॉट डॉक्टर नहीं होते. ChatGPT या Gemini जैसे प्लेटफॉर्म लक्षणों को आसान भाषा में समझा सकते हैं या मेडिकल शब्दों का मतलब बता सकते हैं, लेकिन ये किसी बीमारी की पहचान नहीं कर सकते और न ही इलाज सुझा सकते हैं. सही इलाज के लिए डॉक्टर की जांच, मेडिकल हिस्ट्री और प्रोफेशनल राय जरूरी होती है. दवा, डोज या बीमारी को लेकर AI पर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है. AI का इस्तेमाल सिर्फ सामान्य जानकारी समझने के लिए करें, डॉक्टर की जगह नहीं.
व्यक्तिगत, वित्तीय या संवेदनशील डिटेल्स शेयर करने से बचें
AI सिस्टम टेक्स्ट को समझने और प्रोसेस करने के लिए बनाए जाते हैं, न कि आपकी निजी जानकारियों को सेफ रखने के लिए. इसलिए बैंक डिटेल्स, आधार नंबर, पासवर्ड, निजी दस्तावेज या ऑफिस से जुड़ा गोपनीय डेटा कभी भी शेयर नहीं करना चाहिए. भले ही AI यह कहे कि वह बातचीत याद नहीं रखता, फिर भी सेफ्टी और क्वालिटी चेक के लिए इनपुट सेव या रिव्यू किए जा सकते हैं. संवेदनशील फाइलें या पर्सनल डेटा एनालाइज करने को कहना आपकी प्राइवेसी के लिए जोखिम भरा हो सकता है और गलत इस्तेमाल या अनजाने में लीक होने की संभावना बढ़ा देता है.
गैरकानूनी या गलत कामों से जुड़ी हिदायतें या तरीके पूछने से बचें.
हैकिंग, धोखाधड़ी, पाइरेसी या कानून से बचने जैसे गैरकानूनी और गलत कामों से जुड़े सवाल पूछने से आपको बचना चाहिए. किसी सॉफ्टवेयर को क्रैक करने, टैक्स से बचने या सिस्टम में हेरफेर करने जैसे कामों के लिए AI चैटबॉट्स नहीं बने होते. Grok जैसे प्लेटफॉर्म्स में ऐसे कंटेंट को रोकने के लिए सेफ्टी इंतजाम होते हैं. भले ही कहीं अधूरी जानकारी मिल जाए, लेकिन उसे अपनाने पर कानूनी परेशानी हो सकती है और इसकी पूरी जिम्मेदारी यूजर की ही होती है.
AI से प्रोफेशनल सलाह जैसी राय लेने से बचें
‘क्या मुझे नौकरी छोड़ देनी चाहिए?’ या ‘क्या यह बिजनेस फैसला सही है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो AI के जवाबों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करा सकते हैं. चैटबॉट आपकी पूरी स्थिति, भावनाओं या लंबे समय के असर को नहीं समझते. वे सिर्फ फायदे-नुकसान बता सकते हैं, इंसानी समझ, मेंटर या एक्सपर्ट की जगह नहीं ले सकते.
AI से मिलने वाले जवाबों को बिल्कुल सच न मानें
चैटबॉट्स अपने जवाब डेटा में मौजूद पैटर्न के आधार पर देते हैं, न कि तुरंत जांच-पड़ताल करके. इनमें गलती होने, बातों को जरूरत से ज्यादा आसान बनाने या पुरानी जानकारी देने की संभावना रहती है. कानून, निवेश या ताजा खबरों जैसे मामलों में बिना दोबारा जांचे AI पर भरोसा करना भ्रामक हो सकता है. AI को रिसर्च की शुरुआत के तौर पर इस्तेमाल करना बेहतर होता है, आखिरी फैसले के लिए नहीं.
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