कुछ बच्चे ऐसे भी, जिन्हें पता नहीं क्या होता है बाल दिवस

Updated at : 15 Nov 2019 1:28 AM (IST)
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कुछ बच्चे ऐसे भी, जिन्हें पता नहीं क्या होता है बाल दिवस

शहर के होटलों व गैराजों के कार्यों में भी व्यस्त रहे बच्चे स्टेशन परिसर में भीख मांगते भी देखे गये नाबालिग सिलीगुड़ी : पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में एक ओर पूरा देश जहां बच्चों के साथ कार्यक्रम के आयोजन में व्यस्त रहा. वहीं समाज में बच्चों का एक वर्ग ऐसा […]

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शहर के होटलों व गैराजों के कार्यों में भी व्यस्त रहे बच्चे

स्टेशन परिसर में भीख मांगते भी देखे गये नाबालिग
सिलीगुड़ी : पंडित जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में एक ओर पूरा देश जहां बच्चों के साथ कार्यक्रम के आयोजन में व्यस्त रहा. वहीं समाज में बच्चों का एक वर्ग ऐसा भी था जो दो वक्त की रोटी की जुगाड़ के लिए संघर्ष कर रहा था. सिलीगुड़ी के कई होटलों व गैराजों में कम पैसे देकर बच्चों से काम कराया जाता है.
बाल श्रम जैसे अपराध को रोकने के लिए पुलिस, प्रशासन यहां तक की स्वंयसेवी संगठनों के सदस्य दिन-रात काम कर रहे हैं. फिर भी ये अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है. ये बच्चे बाल दिवस के मौके पर भी खुशियां पाने से वंचित रह गये.
ये बच्चे अधिकतर समय परिवार का पेट पालने के लिए छोटे उम्र में बचपन को दरकिनार करते हुए काम में लग जाते हैं. नदी से बालू निकालने से लेकर होटलों में लोगों के जूठे बर्तन साफ करने के लिए इन बच्चों का इस्तमाल किया जाता है. कारण ये भी है कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती. इन लोगों में कई बच्चे तो ऐसे भी होते है, जिन्होंने आज तक विद्यालय के चौखट का भी दीदार नहीं किया है. सिलीगुड़ी जंक्शन इलाके में अपनी दो बहनों के साथ भीख मांग रहे एक किशोर वीरनाथ ने बताया कि वे सिलीगुड़ी के बंधुनगर का रहने वाला है. उसने बताया कि उसकी पिता की मौत हो गई है.
मां भी काम पर चली जाती है. उसे स्कूल जाना भी अच्छा नहीं लगता. जिस वजह से वे अपने दो बहनों को लेकर लोगों से भीख मांगता है. केवल वीर ही नहीं बल्कि पूरे देश में लाखों ऐसे वीर हैं जो इसी तरह का जीवन-यापन कर रहा है. आज भीख मांगते-मांगते ये लोग गलत संगत में पड़ जाते हैं. जिसके बाद चोरी के वारदात समेत नशे की लत में पड़े रहने में ही जिंदगी चली जाती है. गलत राह पर जाने के बाद इनलोगों को वापस समाज के मुख्यधारा में लौटाना चुनौती बन जाता है.
इस विषय पर सिलीगुड़ी के एसडीओ सुमंत सहाय ने बताया कि सभी को शिक्षा का समान अधिकार है. उन्होंने बताया कि सिलीगुड़ी महकमा इलाकों में इनके लिए सरकार ने सरकारी स्कूल भी खोल रखे हैं. इतना ही नहीं पढ़ाई के साथ-साथ इन बच्चों को मिड-डे-मील तथा अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती है. स्कूलों में बच्चों को पोशाक भी उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने बताया कि वे किसी बच्चे को जबरदस्ती पकड़कर स्कूल नहीं भेज सकते हैं.
लेकिन फिर भी प्रशासन की पूरी कोशिश होती है कि सभी को सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं का लाभ मिल सके. श्री सहाय ने बताया कि शिशु श्रम को रोकने के लिए प्रशासन भी हर वक्त चैकन्ना रहती है. उन्होंने बताया कि इसके लिए डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन टीम(डीसीपीयू) जोरशोर से लगी है. उन्होंने बताया कि हाल ही में डीसीपीयू ने सुकना इलाके से नौ बच्चों को बरामद किया था.
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